दिसंबर के अंत तक आएगी नई शिक्षा नीति : जावड़ेकर

जावड़ेकर ने कहा कि समिति के गठन से पहले विधायकों, छात्रों, माता-पिता व अन्य हितधारकों से करीब ढाई साल तक सुझाव मांगे गए।

By: जमील खान

Published: 12 Nov 2017, 07:12 PM IST

गांधीनगर। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने रविवार को कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का पहला मसौदा दिसंबर के अंत तक आ जाएगा। इस नीति को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (आईएसआरओ) के पूर्व अध्यक्ष के.कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय समिति द्वारा तैयार किया जा रहा है। मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री ने कहा कि समिति ने दो दिन पहले अपनी पांचवीं बैठक आयोजित की थी।

जावड़ेकर ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, उन्होंने कहा है कि हमें दिसंबर के अंत तक नीति का पहला मसौदा मिल जाएगा...इस पर (संसद में) चर्चा के बाद इसे जल्द से जल्द लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह तय है कि नई शिक्षा नीति देश के लिए अगले 20 साल तक मुफीद रहेगी और यह पहले से ज्यादा आधुनिक व शोध केंद्रित होगी और बेहतर नागरिक बनाएगी।

मंत्री ने कहा कि समिति के गठन से पहले विधायकों, छात्रों, माता-पिता व अन्य हितधारकों से करीब ढाई साल तक सुझाव मांगे गए। केंद्रीय पर्यटन मंत्री के.जी. अल्फोंस व फील्ड्स मेडल विजेता गणितज्ञ मंजुल भार्गव इस समिति के सदस्य हैं। समिति का गठन इस साल जून में किया गया था।

 

सिर्फ किताबों से नहीं प्राप्त की जाती शिक्षा : प्रकाश जावड़ेकर
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को कहा कि शिक्षा केवल किताबों से नहीं प्राप्त की जाती, बल्कि कौशल और खेल-कूद, व्यायाम आदि से भी आदमी शिक्षित होता है। जावड़ेकर ने यहां शिक्षा पर आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर में यह बात कही। उन्होंने कहा कि एक छात्र के लिए शारीरिक शिक्षा और कौशल प्राप्त करना जरूरी है क्योंकि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती।

उन्होंने कहा कि मानवीय मूल्यों की शिक्षा से परंपरिक शिक्षा से ज्यादा सार्थक होती है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा केवल राज्य का मुद्दा नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय मुद्दा है तथा हम सब उसके हिस्सेदार हैं। जावड़ेकर ने डिजिटल शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि चाहे सर कारी शैक्षणिक संसथान हो या प्राइवेट या एनजीओ सभी अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन सबको एक छत के नीचे लाना है ताकि गुणवत्ता बढ़े। इसके लिए बीवाईजेयू नमक एप्प अच्छा कम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड था अब पूर ेदेश में ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड है, लेकिन इस से शिक्षकों की भूमिका कम नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि कोई शिक्षक कमतर नहीं है बल्कि वह महत्वपूर्ण है क्योंकि वह विश्लेषण करता है ताकि छात्र समझ सकें। मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि शिक्षकों को नवाचार अपनाने की जरुरत है ताकि वे छात्रों की समस्या सुलझा सकें।

चिंतन शिविर में जावड़ेकर ने शिक्षा सारथी नामक एक पोर्टल भी जारी किया जिस पर शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सभी कार्यक्रमों को एक जगह शामिल किया जाएगा। शिविर को मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह और स्कूली शिक्षा सचिव अनिल स्वरुप ने भी संबोधित किया।

 

 

जमील खान
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