शहरों में 20 फीसदी से कम बच्चे खाते हैं रोजाना फल : सर्वेक्षण

Jameel Khan

Publish: Oct, 12 2017 11:01:13 (IST)

Management Mantra
शहरों में 20 फीसदी से कम बच्चे खाते हैं रोजाना फल : सर्वेक्षण

भारत में कक्षा छह से दस के बीच पढऩे वाले शहरी बच्चों में से केवल 18 फीसदी ही रोजाना फल खाते हैं, एक सर्वेक्षण के परिणाम में यह बात सामने निकलकर आई है।

नई दिल्ली। भारत में कक्षा छह से दस के बीच पढऩे वाले शहरी बच्चों में से केवल 18 फीसदी ही रोजाना फल खाते हैं, एक सर्वेक्षण के परिणाम में यह बात सामने निकलकर आई है। सर्वेक्षण में देश के ज्यादार बच्चों के खाने की खराब आदतों का खुलासा हुआ है। देश में 100 से ज्यादा स्कूल चला रहे पोद्दार एजुकेशन ग्रुप द्वारा किए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि एक दिन में एक बार प्रोटीन खाने वाले बच्चों का अनुपात भी 14 प्रतिशत है जो पहले के मुकाबले कम है।

सर्वेक्षण में भारत के मेट्रो शहरों में कक्षा 6 से 10 में पढ़ रहे 1,350 बच्चों के माता-पिता के जवाब शामिल हैं। परिणाम बताते हैं कि केवल 35 प्रतिशत बच्चे ही भोजन के हिस्से के रूप में सब्जियों का उपभोग करते हैं। पोद्दार शिक्षा समूह के ट्रस्टी राघव पोद्दार ने एक बयान में कहा, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) कहता है कि विकासशील देशों में बचपन का मोटापा एक 'खतरनाक सपने' जैसा है।

पोद्दार ने कहा, स्वस्थ बचपन देश के लिए महत्वपूर्ण हैं, और माता-पिता एवं स्कूलों के बीच मजबूत एकजुट कार्य की आवश्यकता है। सर्वेक्षण में भारत के स्कूली बच्चों के खाने की आदतों के मूल्यांकन में यह भी पाया गया कि उनमें से 50 प्रतिशत जंक फूड, मिठाई या अन्य अस्वास्थ्यकर भोजन का रोजाना उपयोग करते हैं।

कुल मिलाकर जो बड़ी बात है कि लगभग 76 प्रतिशत माता-पिता ने कहा कि उनके बच्चे आउटडोर खेल खेलते हैं। और लगभग 24 प्रतिशत ने कहा कि उनके बच्चों को बाहर खेलना बिल्कुल पसंद नहीं है।

 

कॉलेज चयन में इंटरनेट की भूमिका 33 फीसदी : सर्वेक्षण
छात्र जब स्कूल से कॉलेज में प्रवेश लेते हैं 35 फीसदी छात्रों के अनुसार अभिभावक कॉलेज चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जबकि इसमें इंटरनेट की भूमिका 33 फीसदी होती है। 46 फीसदी शिक्षकों का मानना है कि छात्र और अभिभावक करियर संबंधी फैसलों को लेकर बेहद तनाव में रहते हैं। करीब 98 फीसदी विश्वविद्यालयों के अनुसार स्कूल स्तर पर ज्यादा जानकारी और बेहतर काउन्सलिंग छात्रों को युनिवर्सिटी/ कॉलेज के लिए बेहतर तैयार कर सकती है। करियर और कॉलेज काउन्सलिंग पर आधारित एक सर्वेक्षण में बुधवार को यह जानकारी दी गई।

आईसी3 (इंटरनेशल करियर एंड कॉलेज काउन्सलिंग) सर्वेक्षण के निष्कर्षों में बताया गया कि 56 फीसदी विश्वविद्यालयों के अनुसार हाई स्कूल छात्रों के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं, 58 फीसदी विश्वविद्यालय हाई स्कूलों के साथ 'सम्बन्ध निर्माणÓ जैसे विषयों पर चर्चा करते हैं। वहीं, 41 फीसदी विश्वविद्यालयों ने बताया कि वे विशेष रूप से 'विद्यार्थिया की भर्तीÓ पर ध्यान केन्द्रित करते हैं।

इस सर्वेक्षण में कहा गया कि हाल ही में विभिन्न देशों में हुए राजनीतिक बदलाव के बावजूद 31 फीसदी विश्वविद्यालयों में इस साल अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थियों की संख्या में मामूली सी वृद्धि हुई है। इनमें से 45 फीसदी का मानना है कि ये आंकड़े पिछले साल के बराबर है।

सही समय पर परामर्श देना चाहिए
आईसी3 सम्मेलन के अध्यक्ष, केआईसी युनिव असिस्ट के अध्यक्ष एवं चीफ मेंटर तथा पूर्व हाई स्कूल कॉलेज काउन्सलर गणेश कोहली ने आयोजित इंटरनेशल करियर एंड कॉलेज काउन्सलिंग सम्मेलन के दौरान कहा, सर्वेक्षण से पता चला है कि सही उम्र में सही परामर्श/काउन्सलिंग के अभाव के चलते भारतीय विद्यार्थियों को विदेशी विद्यार्थियों की तुलना में कम प्राथमिकता मिलती है। हमें भारतीय विद्यार्थियों को सही समय पर सही परामर्श देने के प्रयास शुरू करना होगा ताकि वे अन्तरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मनचाही स्थिति हासिल कर सकें।

करियर से जुड़े फैसले तनाव का कारण होते हैं
सर्वेक्षण में शामिल तकरीबन 33 फीसदी कम्पनियां प्रतिभा के विकास में निवेश कर रही हैं। वहीं, 38 फीसदी छात्रों ने बताया कि टेकनॉलोजी करियर विकल्पों के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 48 फीसदी शिक्षकों के लिए करियर से जुड़े फैसले अभिभावकों और छात्रों के लिए तनाव का कारण होते हैं। फेडरेशन ऑफ इण्डियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के सहयोग से भारत एवं दुनिया के अन्य प्रमुख स्थानों पर किए गए इस सर्वेक्षण में 'हाई स्कूल एवं काउन्सलर्स', 'विद्यार्थियों', 'विश्वविद्यालयों एवं विश्वस्तरीय अकादमिक संस्थानों' तथा 'उद्योग जगत के दिग्गजों' की राय ली गई।

सर्वेक्षण के निष्कर्षों से पता चलता है कि आज भी भारतीय विद्यार्थी पारम्परिक पाठ्यक्रमों को ही चुनते हैं क्योंकि भारत में करियर एवं कॉलेज काउन्सलिंग के लिए अन्तरराष्ट्रीय मानदण्डों के समकक्ष काउन्सलिंग प्रथाओं का अभाव है। ऐसा विशेष रूप से जागरुकता एवं अवसरों की कमी केे कारण है। इसमें बताया गया कि 40 फीसदी छात्रों का कहना है कि वे सुरक्षित विषय जैसे विज्ञान, टेकनॉलोजी, इंजीनियरिंग और गणित के विकल्प चुनना चाहते हैं, 22 फीसदी छात्रों ने आर्ट, एंटरटेनमेन्ट एवं स्पोट्र्स को प्राथमिकता दी, वहीं 18 फीसदी छात्रों ने बिजनेस एवं फाइनेन्स को तथा 17 फीसदी छात्रों ने हेल्थ एण्ड मेडिसिन को अपना पसंदीदा विषय बताया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ रहा पंजीकरण
साथ ही अन्तरराष्ट्रीय बाजार में छात्रों का पंजीकरण तेजी से बढ़ रहा है। विदेशों में पढ़ाई की बात करें तो 45 फीसदी छात्र अमरीका को, 14 फीसदी कनाडा को, 13 फीसदी ब्रिटेन को, 10 फीसदी ऑस्ट्रेलिया को और 8 फीसदी दक्षिण-पूर्वी एशिया को तथा 7 फीसदी छात्र यूरोप को प्राथमिकता दे रहे हैं।

व्यक्तिगत रुचि पर निर्भर करता है
फेडरेशन ऑफ इण्डियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के सहायक महानिदेशक शोभा मिश्रा घोष ने कहा, आज की डिजिटल दुनिया में कॉलेज से करियर की ओर छात्र का स्थानान्तरण उसकी व्यक्तिगत रुचि पर निर्भर करता है। उद्योग जगत सेमिनारों और विभिन्न मंचों के माध्यम से छात्रों को करियर के विभिन्न विकल्पों के बारे में जानकारी दे रहा है। इस मौके पर सिटी मॉन्टेसरी स्कूल के संस्थापक-प्रबन्धक डॉ जगदीश गांधी को शिक्षा क्षेत्र में योगदान के लिए विशेष पुरस्कर से सम्मानित किया गया।

 

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