घाव का समय पर नहीं हुआ उपचार 4 वर्षीय निहाल की हालत गंभीर

बिन मां के दर-दर भटक रहे दो भाई, पढ़ाई छोड़ रिश्तेदारों के यहां गुजार रहे रात

मंडला. जन्म के साथ ही सिर से मां का साया उठ गया। पिता जी कहां रहते हैं क्या करते हैं बेटों को खुद नहीं पता। अब आठ साल का नसीब अपने छोटे भाई के साथ दो वक्त की रोटी और रात गुजारने के लिए छत के लिए यहां वहां भटक रहा है। यह कोई फिल्म नहीं बल्कि जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर ग्राम कुड़वन में रहने वाले दो बेटों की सच्ची कहानी है। बिन मां के बेटे आठ वर्षीय नसीब व 4 वर्षीय निहाल मरावी के रहने व पढ़ाई की स्थाई व्यवस्था नहीं हो पा रही है। बताया गया कि छोटे भाई निहाल के सिर में कुछ दिन पहले घाव हो गया था। जिसका समय पर उपचार ना होने के कारण बहुत अधिक बढ़ गया है। निहाल की हालत यह हो गई थी की वह रात में सो नहीं पा रहा था। सिर में दर्द से कहरते निहाल को उसकी चटुआमार में रहने वाली भुआ किसी तरह पुचकार कर सुलाती रही। लेकिन जब दर्द हद से अधिक बढ़ गया तो पड़ोसियों की मदद से भुआ ने निहाल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उपचार के दौरान पता चला कि घाव में कीड़े हो गए हैं। निहाल का उपचार कर मलहम पट्टी कर दी गई। उपचार के द्वारा ब्लड बी पॉजिटिव ब्लड की आवश्यकता थी। जिसकी जानकारी अखिल भारतीय हिन्दू सेवा दल के जिला अध्यक्ष रेनू कछवाहा को मिली तो तत्काल अपने मित्र अनिरुद्ध बजपेयी को साथ में ले जाकर ब्लड उपलब्ध कराया गया। बताया गया कि अभी निहाल की हालत गंभीर बनी हुई सिर में काफी गहरा घाव हो गया है। निहाल बोल पा रहा है ना ही गर्दन हिलाने में समर्थ है। ऐसे में बच्चे के बड़े भाई नसीब व उसकी भुआ की चिंता भी बढ़ गई है।
नसीब की छूटी पढ़ाई
परिजनो ने बताया कि निहाल के जन्म के कुछ दिन बाद ही उसकी मां नरवदिया की मौत हो गई थी। पिता नंदलाल मरावी ने बच्चों की परवरिश में काफी लापरवाही बरती। कुछ दिनो से नंदलाल का पता ही नहीं है। नसीब कुड़वन के शासकीय स्कूल में कक्षा दूसरी में अध्ययन कर रहा था वहीं निहाल भी आंगनबाड़ी जानेे लगा था। ताकि मध्यान्ह भोजन से एक समय के भोजन की जरूरत को पूरी की जा सके। पिता जी के अचानक चले जाने से बच्चों की जिन्दगी अस्तव्यस्त हो गई। अब बच्चे खैरी व चटूआमार में रहने वाली उनकी बुआ के यहां रहने को मजबूर हैं।
बीमार बच्चे को तत्काल ब्लड उपलब्ध कराया गया है। निजी चिकित्सकों से भी बात की जा रही है ताकि बच्चे का उचित उपचार कराया जा सके।
रेनू कछवाहा, समाजसेवी

Mangal Singh Thakur
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