7 साल बाद 22 आदिवासी परिवारों को मिली आजादी

महापंचायत बैठी, 22 परिवारों से हटा प्रतिबंध

By: Shubham Baghel

Published: 21 Mar 2016, 12:33 PM IST

मंडला। जिला मुख्यालय से लगभग 20 किमी. दूर खुक्सर पंचायत के डुंगरिया गांव में रविवार को आदिवासी समाज की महापंचायत बुलवाई गई। जिसमें शामिल होने के लिए आसपास के लगभग 50 गांवों के 500 लोग शामिल हुए। इसके अलावा प्रशासनिक और पुलिस महकमे के आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी मौके पर उपस्थित थे।

दरअसल डुंगरिया गांव के 22 परिवारों पर लगभग 7 वर्ष पहले सामाजिक प्रतिबंध लगाया गया था और उनपर सामाजिक रीति रिवाजों, कार्यक्रमों, पर्व आदि में शामिल होने पर रोक लगा दी गई थी। पिछले सप्ताह जब प्रतिबंधित 22 परिवारों में से कुछ के वैवाहिक रिश्ते पक्के होने से पहले ही टूट गए तो उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस से फरियाद लगाई। मामला बढ़ता देख 14 मार्च को तहसीलदार केआर नीरज, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शैलेष मिश्रा, डॉ अशोक मर्सकोले आदि की उपस्थिति में डुंगरिया में बैठक बुलवाई गई। जिसमें निर्णय लिया गया था कि 20 मार्च को महापंचायत बुलाई जाएगी।
 
देर से सुलझे मतभेद
जैसे जैसे डुंगरिया के आसपास के गांवों में महापंचायत की बात पहुंचती गई। पीडि़त परिवारों के पक्ष और विपक्ष में लोग जुटते गए। कल मौके पर एसडीएम प्रवीण फुलपगारे, तहसीलदार केआर नीरज, जिपं उपाध्यक्ष शैलेष मिश्रा, डॉ अशोक मर्सकोले, सेवानिवृत्त एसडीएम पीएल बरकड़े और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। रूढि़वादी परंपराओं का अनुसरण करने वाले परिवारों का यही कहना था कि उक्त सभी 22 परिवारों पर प्रतिबंध जारी रहना चाहिए। लेकिन बरकड़े और डॉ मर्सकोले की समझाइश के बाद वे इस बात पर सहमत हो गए कि प्रतिबंध समाप्त कर देना चाहिए। 

लिखित समझौता हुए
महापंचायत द्वारा पूर्व में दिए गए निर्णय को इस महापंचायत में बदल दिया गया। पीडि़त परिवारों को बिना जुर्माने और बिना सामाजिक भोज के समाज में शामिल कर लिया गया। साथ ही इसकी पुष्टि के लिए लिखित समझौता भी किया गया।
Shubham Baghel
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