एक माह धरना, फिर भूख हड़ताल

प्रशासन के प्रति बढ़ रहा महिलाओं आक्रोष

By: Mangal Singh Thakur

Published: 14 Dec 2017, 11:37 AM IST

मंडला. मप्र बुलंद आवाज नारी शक्ति संगठन तत्वावधान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की हड़ताल लगातार जारी है। धरना प्रदर्शन के बाद कृमिक भूख हड़ताल की जा रही है। बुधवार को राजकुमारी परते, द्रोपती उईके, सकुन यादव, रामो धुर्वे, मानकी बाई भुख हड़ताल पर रहीं। गौरतलब है कि अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर ६ नवंबर से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं हड़ताल पर हैं। कलेक्टर मार्ग में टेंट लगाकर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। जिसमें जिले के विभिन्न विकासखंडो से कार्यकर्ता शामिल हो रही हैं। संगठन की जिला सचिव अभिलाषा राय ने बताया कि कार्यकर्ता, सहायिकाओं द्वारा शासन की शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला कल्याण से जुड़ी कई योजनाओं में भागीदारी निभाई जाती है। लेकिन मानदेय के नाम पर सिर्फ पांच हजार रुपए दिया जा रहा है। राज्य सभा संसाद उईके को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा संचालित होने वाली कई योजनाओं को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं द्वारा सफल बनाया जाता है। योजनाओं को लागू करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान समाज में दिया जाता है लेकिन उन्हें वेतन के नाम पर नाममात्र राशि दी जा रही है। साथ ही अन्य सुविधाओं से उन्हें वंचित किया जा रहा है। उचित मानदेय व अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर उनके द्वारा पूर्व में भी धरना आंदोलन कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा गया लेकिन उन्हें आश्वासन से ज्यादा आज तक कुछ भी नहीं मिल सका है। धरने में बैठी कार्यकर्ता व सहायिकाओं ने बताया कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं हो जाएंगी तब तक केन्द्रों में ताला लगा रहेगा और वह धरना स्थल पर उपस्थित रहेंगी।
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दो दिन हड़ताल पर रहे बीएसएनएल कर्मचारी
मंडला. केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में बीएसएनएल कर्मचारियों की दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल रही। इसी तारतम्य में स्थानीय बीएसएनएल कार्यालय में सभी कर्मचारियों ने १२ एवं १३ दिसंबर को बीएसएनएल सयुंक्त मोर्चा के तत्वाधान में प्रदर्शन किया। सयुंक्त मोर्चा सभा को संबोधित करते हुए कॉमरेड रविन्द्र सिंग बघेल ने बताया कि केंद्र सरकार की नीतियों से सारे सरकारी कर्मचारी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। पिछले 3 सालों में देश में बेरोजगारी और पूंजीवाद बढ़ रहा है। जब से पूंजीवाद सरकार बनी है उसका केवल एकमात्र एजेंडा यही रहा है कि जितने भी सरकारी कम्पनियां है उन सब को चुन चुन कर पुंजवादियों को उपहार स्वरूप दी जाएं। बैंक, बीमा, रेलवे, पेट्रोलियम, कोल इत्यादि सारी कम्पनियों को बर्बाद करने के बाद अब सरकार की निगाहें बीएसएनएल पर है। सरकार गुपचुप तरीके से बीएसएनएल को तोड़कर अलग टावर कम्पनी बनाने की साजिश कर रही है। पर बीएसएनएल का हर कर्मचारी संकल्पबद्ध है कि वो किसी भी हालत में सरकार की कॉरपोरेट लॉबी को अपने मंसूबों में कामयाब नही ंहोने देगी। सभा को आगे संबोधित करते हुए कॉमरेड जगदीश सेन ने कहा कि मोदी सरकार जिस सातवें पेय कमीशन को ले कर अपनी पीठ थपथपा रही थी उससे गन्दा पेय कमीशन इतिहास में नहीं रहा। जिस तरस से महंगाई दिन दूनी रात चौगनी बढ़ रही उसकी तुलना में यह पेय रिवीजन उठ के मुंह में जीरा की तरह है। उसमें भी इतने पेंच इस पेय रिवीजन में डाले गए हैं कि अधिकांश पब्लिक सेक्टर को सही पेय रिवीजन नहीं मिल पा रहा। बीएसएनएल जो लगातार सरकार को करोड़ो रुपए कमा कर दिया तथा सरकार की हर नीतियों को जमीनी रूप से सिद्ध किया। इसके बावजूद सरकार लगातार कॉरपोरेट इशारे में बीएसएनएल की उपेक्षा कर रही है। कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाते हुए कॉमरेड ललित धकरिया ने कहा कि इतिहास में पहली बार सरकार ने सारे पब्लिक सेक्टर को बर्बादी के कगार पर ला कर खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि आज देश के सारे सरकारी कर्मचारी लामबंद ही गए है एवं जिस तरह से उनमें असंतोष बढ़ रहा है वह सरकार के लिए खतरे की घंटी है। प्रदर्शन के दौरान एसपी प्यासी, बृजलाल तिवारी, विनोद अमुद्गरे, प्रशांत गोंटिया, सुरेश कोरी, राजेन्द्र नायक, सीके वैष्णव, एसके सरोते, केएस संदया, बारेलाल, हेम सिंह मरावी, जावेद खान, सुखदेव रजक, गिरजा शंकर, दिनेश सिंह, शिवनारायण शर्मा, राजकुमार कौशल, नवीन पड़वार, अल्फोंसा सोरेंग, सुनीता ठाकुर, उर्मिला ठाकुर सहित सभी कर्मचारी उपस्थित रहे।

Mangal Singh Thakur
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