महिलाओं की एक पहल ने बदली गांव की तस्वीर

घरों में अब नहीं होता क्लेश, शराब बंदी ने महुआ टोला को दी नई पहचान

रोहित चौकसे
निवास. महिलाओं की एक पहल ने गांव की तस्वीर बदल दी है। जो एक समय शराब बेंचने व शराबखोरी के लिए बदनाम था उस गांव की अब लोग मिसाल दे रहे हैं। अब यहां शराब बेंचना तो दूर पीना कर गांव में आना भी ग्रामीणों के लिए दंडात्मक हो गया। कुछ महिलाओं सोच ने धीरे धीरे पूरे गांव में शांति कायम कर दी है। मामला आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला के विकास खंड निवास के ग्राम पंचायत सतपहरी के पोषक ग्राम महुआटोला का हैं। जहां शराब बंद हुए एक वर्ष हो गए हैं। गत वर्ष शराबखोरी से प्रताडि़त होकर गांव की महिलाओं ने संगठित हुई और नारी शक्ति का परिचय देते हुए शराबबंदी के लिए कमर कस ली। फिर जो भी सामने आया वे नहीं देखीं की यह भाई है कि यह पति है। जिसने भी शराब को हाथ लगाया उसे इन्होंने दण्डित किया। उन्हीं महिलाओं में से एक चंद्रवती बाई बताती हैं कि चूंकि हम ग्रामीण क्षेत्र से हैं जहां महिलाओं का घूंघट ही उसका सबसे बड़ा श्रृंगार होता है वहां यदि अपने ससुर, जेठ आदि बड़ों का सामना होने की स्थिति हमारे लिए अग्निपरीक्षा से कम न था। इस धर्म संकट की परिस्थिति को हमने धर्मयुद्ध की तरह संकल्पित होकर सामना किया और सत्य का साथ दिया। हम सभी के प्रयास से इस आंदोलन में सफलता भी मिली।

प्रशासन की नहीं पड़ी नजर
शासन-प्रशासन शराबबंदी को लेकर अनेकानेक कार्यक्रम आयोजित करता रहता है। जिसके लिए बड़ी राशि भी खर्च की जाती है। जिससे समाज से यह कुरीति को समाप्त की जा सके। गांव में अपराधियों व अपराधों में रोक लग सके। लेकिन इस महिलाओं की पीठ किसी ने भी नहीं थपथपाई। किसी भी सरकारी मंच ने आज तक इन साहसी महिलाओं को न तो सम्मानित किया और न ही किसी प्रकार से सहायता उपलब्ध कराई है। ताकि शराब का बिक्रय छोडऩे वाले परिवार को अपना घर चलाने में मदद मिल सके। महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोडऩे के प्रयास नहीं किए गए हैं।


महिलाओं ने ठानी तो छूटी शराब की लत
इस पुरुष प्रधान समाज में जहां महिलाओं को परिवार को छोटे-छोटे निर्णय लेने का भी अधिकार नहीं होता। वहीं शराबखोरी के विरोध में आई महिलाओं ने अपनी मर्जी के मुताबिक अर्थदंड सुनिश्चित किया कि जिसके घर में शराब बनाई जाएगी उससे 5 हजार रुपए और सेवन करेगा उससे 5 सौ रुपए का आर्थिक दंड वसूला जाएगा। इतना ही नहीं सूचना देने पर पुरस्कार स्वरूप 5 सौ रुपए भी दिए गए। इस नियम मनवाने के लिये भले ही महिलाओं को डंडों का ही सहारा क्यों लेना पड़ा हो उन्होंने लिया लेकिन नियम को टूटने नहीं दिया और पुरुष को मानने पर मजबूर किया। हालांकि महिलाओं की इस हिम्मत में पुलिस ने भी साथ दिया। जिसके परिणाम स्वरूप आसपास गांव के लोग भी महुआ टोला का उदाहरण दे रहे हैं। लगभग 200 आदिवासी परिवार वाले इस गांव के लिये यह भागीरथी प्रयास साबित हुआ है। महुआटोला की इस शराबबंदी गैंग की महिलाओं का दबदबा न केवल महुआटोला में है बल्कि ग्राम पंचायत सतपहरी के सभी गांव के अलावा आसपास के अनेक गांवों में भी धीरे-धीरे महिलाएं संगठित होकर शराबखोरी के विरुध्द मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं।


महुआ शराब से पड़ा महुआटोला नाम
सत्य पर पहरा देने वाला सतपहरी पंचायत के पोषक गांव का नाम महुआटोला क्यों पड़ा इस पर किवदंती है कि पूर्व में इस क्षेत्र में महुआ के पेड़ अधिक थे जिससे अधिक महुआ का उत्पादन होता था। फलस्वरूप महुआ से दारू शराब भी बहुतायत मात्रा में बनाई जाती थी जिससे ही इस गांव का नाम महुआटोला पड़ा। इस शराबबंदी दस्ते की सक्रिय महिलाएं चंद्रवती बाई, उमाबाई, संतोषीबाई, शकुनबाई, दुर्गीबाई, मुलियाबाई, रामबाई ने बताया कि शराबबंदी के पूर्व में गांव लड़ाई झगड़ा पारिवारिक कलह आदि आम बातें थीं आए दिन समाज के बुजुर्गों को पंचायत बैठाकर समझौते करवाने पड़ते थे। आये दिन पुलिस को बुलाकर मामला शांत करवाना पड़ता था। लेकिन जब शराबबंदी की गई है तब से सभी प्रकार के विवादों से भी मुक्ति मिल गई है। विशेषकर तीज त्यौहारों में तो शराबियों का बहुत ही ज्यादा आतंक रहता था लेकिन अब सभी तीज त्यौहार बड़े ही सौहार्द व शांतिपूर्ण तरीके से मनाए जा रहे हैं।


इनका कहना है


शराब मुक्ति को लेकर हम लगातार अभियान चला रहें। लेकिन शराब का व्यवासाय करने वाली महिलाओं के सामने अब आर्थिक तंगी सामने आ रही है। पैसो की कमी के चलते स्वरोजगार के लिए कुछ कर पा रहे हैं ना ही प्रचार-प्रसार कर पा रहे हैं। प्रशासन को आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए स्वरोजगार की व्यवस्था करनी जाएगी।
चंद्रवती बाई, स्थानीय निवासी


मुझे निवास जनपद में पदभार संभाले अभी कुछ दिन ही हुए हैं। आपके द्वारा मुझे जानकारी प्राप्त हुई हैं। जल्द ही उक्त ग्राम का दौरा करूंगा। महिलाओं की शासकीय योजनाओं के तहत जो भी मदद की जाती है दिलाई जाएगी।
हेमेंद्र गोविल, सीईओ जनपद पंचायत निवास


गांव की शांति के लिए महिलाओं का प्रयास काफी सराहनीय है। शाराब बंदी को लेकर महिलाओं की हर संभव मदद की जाएगी। काफी समय से गांव में किसी प्रकार का विवाद ना होना महिलाओं की पहल का नतीजा है।
रतन बचावले, एसआई थाना निवास

Mangal Singh Thakur
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