scriptBank employees protest against privatization | निजीकरण के विरोध में उतरे बैंक कर्मचारी | Patrika News

निजीकरण के विरोध में उतरे बैंक कर्मचारी

एसबीआई मुख्य शाखा के सामने किया प्रदर्शन

मंडला

Published: December 18, 2021 11:00:32 am

मंडला. निजीकरण के विरोध में जिले भर के राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं पर ताले लटके रहे। बैंकों में दो दिन की हड़ताल के दूसरे दिन 50 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ। एटीएम से पैसे निकालकर लोगों ने काम चलाया। काफी उपभोक्ताओं को परेशानी भी उठानी पड़ी। बैंक कर्मचारियों का कहना है कि जिले में भी बैंकों में सैकड़ों की संख्या में स्टॉफ है। शुक्रवार को एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र आदि की लगभग 50 शाखाओं पर ताले लटके रहे। कर्मचारियों ने काम नहीं किया और कई जगह एकत्र होकर प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों ने एसबीआई कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि बैंक कर्मचारियों को निजीकरण के खिलाफ अब घर से बाहर निकलकर प्रदर्शन करना होगा। बैंक कर्मी देश के आर्थिक सेनानी हैं। अपनी पूरी क्षमता से देशसेवा करना उनका धर्म है। इस दौरान नीरज चौरसिया क्षेत्रीय सचिव एसबीआई अवार्ड स्टॉफ इम्प्लाईज यूनियन, सुमित सराफ, निर्भय पटेल, विजय कुमार, मोतीलाल, श्रेयांश सिंगौर, पराग मिश्रा, अनिल बर्मन, शीनू, स्वप्रिल के साथ ही बड़ी संख्या मे बैंक के कर्मचारी मौजूद रहे। एसबीआई के मुख्य शाखा में प्रदर्शन किया गया। कर्मचारियों ने किसी भी सूरत में निजीकरण लागू न होने देने की बात कही। एसबीआई के कर्मचारी नीरज चौरसिया ने बताया कि किसी निजी बैंक को नुकसान होने पर उसे सरकारी बैंक में विलय कर सहारा दिया जाता है। जब सभी बैंक ही निजी हो जाएंगे तो इसकी भरपाई कैसे की जाएगी। निजी बैंक किसी भी सरकारी योजना में सक्रियता नहीं दिखाते हैं। वे केवल अपने लाभ के लिए ही काम करते हैं।
एटीएम रहे नकदी से फुल
जिले की सभी बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे। हालांकि सभी एटीएम में बुधवार रात ही पैसे रखे गए थे। बैंक अफसरों का दावा है एटीएम कार्ड चलाने वाले या ऑनलाइन बैंकिंग इस्तेमाल करने वालों को परेशानी नहीं आएगी। बैंकों में निजीकरण को काफी समय से बढ़ावा दिया जा रहा है। कई बैंकों में एटीएम वैन, सुरक्षा आदि का कार्य निजी कंपनी के हाथों में है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी आउट सोर्सिंग से रखे जा रहे हैं। एसबीआई में लंबे समय से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियुक्त नहीं हुए हैं। नियमित कर्मचारियों की भर्ती न होने की वजह से भी बैंक स्टाफ की किल्लत झेल रहे हैं।

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