बच्चों को प्रेरणा देने के लिए बनेगी सक्सेस स्टोरी

स्कूल में मेधावियों की लगेगी फोटो, रिजल्ट सुधारने तीन स्टेप में स्कूलों पर किया जाएगा फोकस

By: Sawan Singh Thakur

Published: 20 May 2019, 12:20 PM IST

मंडला। माध्यमिक शिक्षा मंडल की दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा में राज्य की मेरिट और जिले की मेरिट में आने वाले छात्र-छात्राओं की तस्वीरें सरकारी स्कूलों में लगाई जाएगी। तस्वीर के साथ ही बच्चों की सक्सेज स्टोरी भी स्कूल के पटल पर डिस्प्ले की जाएगी। इसके साथ ही आर्थिक अभाव में रहकर मेरिट में अपनी जगह बनाने वाले बच्चों की सक्सेज स्टोरी का वीडियो भी बनाया जाएगा। जो दसवीं व बारहवीं के बच्चों को प्रेरित करने के लिए दिखाया जाएगा। इसके साथ ही जिले के सरकारी स्कूलों के रिजल्ट की क्वालिटी और क्वांटिटी में सुधार के लिए एक्सीलेंस, मॉडल और ज्यादा स्टूडेंट संख्या वाले स्कूलों पर फोकस किया जाएगा। रिजल्ट का स्तर सुधारने के लिए जिले के सरकारी स्कूलों में तीन स्टेप में फोकस किया जाएगा। जिले के 9 एक्सीलेंस स्कूल में विषय विशेषज्ञों की कमी दूरी की जाएगी। खासतौर पर मॉडल स्कूलों में अभी तक टीचर शेयरिंग से चल रही व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। इसके बाद तीसरे स्टेप में जिले के ऐसे बड़े सरकारी स्कूल जिनकी छात्र संख्या 1 हजार से ज्यादा है, वहां विषय विशेषज्ञ व संसाधनों की पूर्ति की जाएगी। जिले के ऐसे स्कूल जिनका परिणाम अच्छा नहीं रहा है, वहां रिमेडियल क्लास पर फोकस किया जाएगा। जिले के विषय विशेषज्ञों की टीम ज्ञानपुंज दल के रुप में इन स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्य करेगी।

हर संकाय से दो बच्चों को पढ़ाएगी सरकार
प्रदेश की मेरिट में जगह बनाने वाले मेधावी बच्चों को सुपर 100 योजना के तहत हर संकाय से 2 बच्चों को सरकार खुद पढ़ाएगी। इन बच्चों को भोपाल, इंदौर में आवासीय सुविधा देने के साथ ही पढ़ाई की सुविधा सरकार द्वारा दी जाएगी। इसके अलावा 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा में सरकार मदद करेगी। जिला शिक्षा अधिकारी अशोक झारिया का कहना है कि मेधावी बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए फीस सरकार देती है। मेडिकल, इंजीनियरिंग समेत अन्य कोर्स सरकार अपने खर्च पर करवाती है। ऐसे में जो बच्चे आर्थिक रुप से कमजोर परिवारों के हैं, उन्हें पता है कि बोर्ड एक्जाम में अच्छा परिणाम लाने से उनके करियर की राह आसान हो जाती है। इस वजह से आर्थिक रुप से कमजोर परिवारों के छात्र-छात्राओं में पढऩे व आगे बढऩे की चाहत बढ़ी है।

Sawan Singh Thakur
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