कोरोना कर्फ्यू के बाद डीएपी तोड़ेगी किसानों की कमर

देने होंगे 7 सौ रुपए अतिरिक्त, सरकार ने बढ़ाया दाम

By: Mangal Singh Thakur

Published: 17 May 2021, 01:20 PM IST

मंडला. लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण के बाद किसानों के लिए एक और मुसीबत आ गई है। आगामी फसल में किसानों को यूरिया की मारामारी के बीच डीएपी के लिए भी अधिक राशि देनी होगी। यह राशि 50-100 नहीं पूरे सात सौ रुपए है। दरअसल कोरोना संक्रमण के दौर में रासायनिक खाद की कीमतों में 58 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। इससे धान, सब्जी और अन्य फसल लेने वाले किसानों की परेशानी बढ़ जाएगी। डी अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के लिए किसानों को प्रति बोरा 700 रुपए अतिरिक्त देना होगा। ऐसे में किसानों की उत्पादन लागत बढ़ जाएगी और उनका लाभ कम हो जाएगा।


बता दें कि हाल ही में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ ने डीएपी और एनपीके खाद की कीमतों में वृद्धि की है। इससे पिछले 15 दिन पूर्व तक 1200 रुपए में मिलने वाली 50 किलो डीएपी की बोरी अब सीधे 1900 रुपए की हो गई है। जिले में यूरिया के बाद सबसे अधिक मांग डीएपी की रहती है। इसी तरह एनपीके (12:32:16) और एनपीके (10:26:26) की बात करें तो यह पहले करीब 1075 रुपए प्रति बोरी थी, जो अब क्रमश: 1800 और 1775 रुपए पहुंच गई है।


6 हजार मेट्रिक टन की डिमांड
जिले में इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान लगभग 2.52 लाख हेक्टेयर में विभिन्न फसलों की बोवनी होना है। इसके मद्देनजर कृषि विभाग द्वारा 6 हजार मेट्रिक टन डीएपी की डिमांग भेजी है। जबकि लगभग 3 हजार मेट्रिक टन का भंडारण है। जो पूर्व से रखा है उसे पूराने दाम में दिया जाएगा। इसके बाद किसानों को 19 सौ रुपए प्रति बोरी डीएपी लेनी होगी। जिससे अतिरिक्त भार बढ़ जाएगा।

इनका कहना है
कोरोना महामारी के चलते आम लोगों के साथ-साथ किसान भी परेशान हैं। ऐसी स्थिति में डीएपी सहित अन्य रासायनिक उर्वरकों के दामों में वृद्धि के चलते किसानों पर दोहरी मार पड़ेगी और वह खरीफ सीजन के लिए खाद खरीदने में असहाय हो जाएंगे।
जाकीर खान, किसान, महाराजपुर

रासायनिक खाद की कीमत बढऩे से वैसे तो सभी किसानों को नुकसान होगा। लेकिन सब्जी उत्पादकों को इसकी सबसे ज्यादा मार झेलनी पड़ेगी। धान की फसल के लिए एक एकड़ में एक बोरी डीएपी की आवश्यकता होती। वहीं सब्जी उत्पादकों को एक एकड़ में दो से तीन बोरी डीएपी की जरूरत पड़ती है।
राकेश ठाकुर, किसान, मुगदरा

जिले में यूरिया की मांग अधिक है। विभाग द्वारा प्रस्तावित फसलो के अनुसार खाद की मांग की जाती है। इस बार 6 हजार मेट्रिक टन डीएपी की मांग की गई है। कुछ डीएपी बची हुई है। इसका मूल्य व वितरण शासन स्तर पर तय होते हैं।
एसएस मरावी, उपसंचालक कृषि

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