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पर्याप्त यूरिया होने के बावजूद भी किसान को होना पड़ता है परेशान

पर्याप्त यूरिया होने के बावजूद भी किसान को होना पड़ता है परेशान

मंडला

Published: June 07, 2022 01:47:47 pm

मंडला. जिले में किसानों को खाद संकट का एक बार फिर सामना करना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय के बड़ी खैरी स्थित गोदाम में रोजाना बड़ी संख्या में किसान खाद लेने तो पहुंच रहे हैं लेकिन लंबी-लंबी कतार में लगने के बाद भी किसानों की बारी आने पर काउंटर समय पूर्व ही बंद कर दिया जा रहा है और अगले दिन आने के लिए कहा जा रहा है।
सोमवार को भी खैरी स्थित गोदाम में बड़ी संख्या में किसान आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे थे, इन किसानों ने बताया कि वे सुबह 8 बजे से भूख-प्यासे, चिलचिलाती धूप में खाद के लिए कतार में लगे थे कतार इतनी लंबी थी कि उनकी बारी जैसे ही आई तो खाद वितरण करने वाले कर्मचारियों ने शाम 4 बजे ही यह कहकर खाद देना बंद कर दिया कि आज खाद वितरण का समय समाप्त हो गया है।
अभी ये हाल तो आगे बिगड़ेंगे हालात
कुछ किसानों ने बताया कि बारिश समय नजदीक है, खरीफ की फसल के लिए खेतों की सफाई कर चुके हैं पर सोसाइटियों में जरूरी खाद का संकट बना हुआ है। सोसायटियों से खाद मिलने की प्रक्रिया काफी कठिन है, कई तरह के खेत से संबंधित दस्तावेज जुटाकर जमा करने पड़ते हैं तब जाकर खाद दी जाती है जबकि गोदामों से नगद राशि देकर खाद मिल जाती है, किसानों का कहना है कि वे हर साल पहले से खाद-बीज का प्रबंध करके रख लेते हैं ताकि कृषि कार्य के दौरान खाद-बीज के लिए शहर या सोसायटियों के चक्कर न लगाना पड़े लेकिन इस बार कृषि विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते अभी से खाद के लिए परेशान किया जा रहा है आने वाले दिनों में जब बोनी का समय आएगा तो अचानक खाद की मांग बढ़ेगी और किसान खाद के लिए परेशान हो जाएंगे इसलिए पहले से किसान खाद-बीज का प्रबंध करके रख लेते हैं लेकिन अभी से किसानों को खाद संकट से जूझना पड़ रहा है। सहकारी विपणन संघ से मिली जानकारी अनुसार यूरिया प्रति बोरी 266.50 रुपए, डीएपी 1350 रुपए, पोटाश 1700 रुपए, एनपीके 1470 रुपए प्रति बोरी दी जा रही है। वहीं किसानों ने बताया कि धान की बुआई के साथ ही डीएपी खाद का छिडक़ाव करते हैं। लंबे समय से यह खाद डालते आ रहे हैं ताकि धान की बीज अंकुरित होने के साथ मजबूत रहे हैं और पौधे ग्रोथ के साथ निकले। इससे पौधों की बढ़त बनी रहती है। बाजार में किसानों को खाद महंगे दाम में मिल रही है मांगने पर भी बिल नहीं दे रहे हैं। किसान जाकिर खान, धमेन्द्र ठाकुर आदि ने बताया कि सोसायटी से प्रति एकड़ के एवज में मात्र 2 बोरी खाद दी जा रही है। जबकि एक एकड़ जमीन में कम से कम 3 से 4 बोरी खाद की जरूरत होती है, इसलिए बाकि खाद बाजार से लेने की मजबूरी हो जाती है लेकिन बाजार में खाद काफी उंचे दामों में बेची जा रही है इसी के साथ खाद की गुणवत्ता ठीक है या नहीं है इसकी भी कोई गारंटी नहीं होती है।
उतर चुके हैं सडक़ पर
पूर्व में देखा गया है कि खाद-बीज के लिए कई बार किसानों को परेशान होकर सडक़ में उतरने तक की नौबत आ चुकी है, बड़ी खैरी स्थित गोदाम में अव्यवस्थाओं के चलते कई बार किसान यहां आक्रोश दिखाते हुए सडक़ तक जाम कर चुके हैं जिसके आसार एक बार फिर बन रहे हैं, यदि समय रहते किसानों की खाद, डीएपी वितरण की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो एक बार फिर किसान सडक़ में उतर सकते हैं।
जैविक खेती के लिए नही किया जा रहा प्रेरित
कृषि योग्य भूमि में लगातार रसायनिक उर्वरकों का उपयोग किए जाने से भूमि की उर्वरता कम होती जा रहा है, जिसे जैविक खेती से कम किया जा सकता है, लेकिन जिले में कृषि विभाग द्वारा किसानों को जैविक खेती करने के न तो लाभ बताए जा रहे हैं और न ही किसानों को जैविक खाद ही उपलब्ध कराई जा रही है। जाकिर खान का कहना है कि यदि सोसायटियों से रसायनिक खाद के साथ जैविक खाद का भी वितरण किया जाता है तो किसान अपने खेते के कुछ भाग में जैविक खाद का भी उपयोग कर सकेंगे और इसी के साथ किसानों को जैविक खाद का महत्व भी समझ आएगा।
खैरी गोदाम में इंतजार कर रहे किसानों का कहना
गोदाम में ट्रकों से रोजाना बड़ी मात्रा में खाद यूरिया पहुंच रही है। लेकिन किसानों को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। निश्चित किसानों के लिए पहुंचाई जा रही खाद यूरिया की कालाबाजारी की जा रही है।
सुरेश बर्मन, लिमरूआ, किसान।
सोसायटियों से खाद के लिए कई तरह के दस्तावेज मांगे जाते हैं जिनकी पूर्ती करना मुश्किल हो जाता है जिससे चलते सरकारी गोदामों से ही खाद खरीद लेते हैं लेकिन गोदामों के प्रभारी द्वारा किसानों को खाद उपलब्ध कराने में परेशान किया जा रहा है।
जगन्नाथ भावरे, नांदिया, किसान।
एक एकड़ के लिए मात्र 2 बोरी यूरिया दी जा रही है, जबकि एक एकड़ में तीन से चार बोरी यूरिया की जरूरत पड़ती है, अतिरिक्त यूरिया की पूर्ती बाजार से महंगे दामों में खाद लेकर करना पड़ेगा।
इंदर लाल चक्रवर्ती, सिलगी
सुबह 8 बजे से खाद के लिए कतार में लगे थे जैसे ही बारी आई तो खाद वितरण करने वाले कर्मचारियों ने कह दिया कि आज नहीं कल खाद दी जाएगी।
राकेश हरदहा, दिवारा, किसान
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