scriptDistrict hospital's fire engine expiry, danger of accident looming | जिला चिकित्सालय के अग्रिशमन यंत्र एक्सपायरी, दुर्घटना का मंडरा रहा खतरा | Patrika News

जिला चिकित्सालय के अग्रिशमन यंत्र एक्सपायरी, दुर्घटना का मंडरा रहा खतरा

जिम्मेदार विभाग नही दे रहा ध्यान

मंडला

Published: August 03, 2022 09:05:04 pm

मंडला. जिला अस्पताल में अग्निदुर्घटनाओं को रोकने के लिए जो प्रयास किए गए हैं, वे सिर्फ दिखावटी ही साबित हो रहे हैं, यहां अधिकांश वार्डों में अग्निशमन यंत्र तो लगाए गए हैं, लेकिन इनकी रिफिलिंग की डेट काफी समय पहले ही समाप्त हो चुकी है ऐसे में यदि अचानक कोई हादसा होता है तो ऐसी स्थिति में एक्सपायरी डेट वाले सिलेण्डर आग बुझा पाएंगे या नहीं यह बड़ा सवाल है। गौरतलब है कि सोमवार को जबलपुर अंतर्गत दमोह सागर में स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में आग लगने से करीब दर्जन भर लोगों की मौत हो गई वहीं कई मरीज और अस्पताल स्टॉफ आग में झुलस गया जिनका इलाज अन्य अस्पताल में चल रहा है। इस अग्निकाण्ड ने अस्पतालों में अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने के प्रयासों की कलई खोलकर रख दी है।

जिला चिकित्सालय के अग्रिशमन यंत्र एक्सपायरी, दुर्घटना का मंडरा रहा खतरा
जिला चिकित्सालय के अग्रिशमन यंत्र एक्सपायरी, दुर्घटना का मंडरा रहा खतरा

कुछ महीने पहले जिला अस्पताल के शिशु वार्ड में आग लग गई थी जिसे किसी तरह नियंत्रित कर लिया गया था। सरकारी जिला अस्पताल की तरह ही जिले में कुछ अन्य प्राइवेट अस्पतालों में अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। कटरा अस्पताल प्रबंधन से बात करने पर प्रबंधन सेजुड़े जवाबदार भी यह मानते हैं कि फिलहाल अग्निदुर्घटनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। प्रबंधन का कहना है कि आने वाले 10-15 दिनों में सभी तरह के सुरक्षा इंतजाम पूरे कर लिए जाएंगे।

मुख्य मार्गों में लगाए गए जनरेटर

अग्नि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त इंतजामों को लेकर जिला प्रशासन के अधिकारी ही लापरवाह बने हुए हैं, शहर में जगह-जगह कई प्राइवेट बैंक संचालित किए जा रहे हैं, चाहे पड़ाव मार्ग में स्थित निजी बैंक हों, नेहरू स्मारक के पास निजी बैंक से लेकर बिंझिया में संचालित प्राइवेट अस्पताल के सामने मुख्य मार्ग पर ही जनरेटर रखे हुए हैं। जहां एक ओर ये जनरेटर पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं, वहीं मुख्य मार्ग में रखे गए भारी-भरकम जनरेटरों से आवागमन भी बाधित हो रहा है। जिला मुख्यालय में ही इस तरह कई बड़े निजी संस्थान पर्यावरण से लेकर यातायात नियमों का माखौल उड़ा रहे हैं। बता दें कि जबलपुर के दमोह नाका में निजी अस्पताल में जो अग्निदुर्घटना हुई है वह जनरेटर में ब्लास्टिंग के चलते होना बताया जा रहा है।

नियमों की अनदेखी

शहर में कई सरकारी से लेकर निजी संस्थान किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं, यहां आमजनों की सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। कार्यालयों में दिव्यांगों का पहुंचना ही काफी कठिन होता है क्योंकि कई कार्यालय पहली और दूसरी मंजिलों में संचालित हो रहे हैं इसके अलावा इन कार्यालयों में आने-जाने के लिए एकमात्र गेट है, जिससे अचानक कोई अग्नि दुर्घटना सहित अन्य हादसे होने पर समय रहते कार्यालय से निकलने में लोगों को परेशानी हो सकती है, बता दें कि जबलपुर के चंडाल भाटा में निजी अस्पताल में जब आग लगी तो यहां अस्पताल का स्टॉफ और यहां भर्ती मरीजों को निकलने के लिए सिर्फ एक मात्र ही गेट था जिससे एक साथ समय रहते सभी मरीज और स्टॉफ नहीं निकल पाए और अस्पताल इलाज के लिए पहुंचे मरीजों की अस्पताल में झुलसकर मौत हो गई। इस तरह की दुर्घटनाओं के बाद भी फायर सेफ्टी से जुड़े जरूरी इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।

जिला अस्पताल स्टॉफ की भी कमी जूझ रहा है पर्याप्त डॉक्टर नहीं होने से अब अस्पताल कुछ मरीजों के लिए श्मशान बनते जा रहा है। जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को या तो रेफर किया जा रहा है और यदि गरीब, लाचार मरीज बाहर इलाज कराने में अमसर्थता जाहिर करता है तो उसे अस्पताल में उचित इलाज ही नहीं दिया जाता। जानकारी अनुसार सोमवार की दोपहर जिला अस्पताल में झीना पलहरा की समलवती उम्र 35 वर्ष को भर्ती किया गया। परिजनों के अनुसार समलवती को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। परिजनों ने बताया कि अस्पताल में भर्ती करने के बाद कोई डॉक्टर मरीज को देखने के लिए नहीं पहुंचा। लगातार मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी परिजन मौके पर उपस्थित स्टॉफ नर्सों से डॉक्टर को बुलाने की बिनती करते रहे लेकिन डॉक्टर को नहीं बुलाया गया और आखिर तड़प-तड़प कर महिला मरीज ने कुछ देर में दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल में भर्ती कई मरीजों ने बताया कि भर्ती करने के बाद सिर्फ नर्स ही मरीजों का इलाज करती है कोई डॉक्टर मरीज को देखने के लिए नहीं आते।

जिला अस्पताल में लगे सभी अग्निशमन यंत्रों की रिफलिंग के लिए आर्डर कर दिए गए हैं। स्टॉफ की बेहद कमी है किसी तरह मरीजों को अच्छे से अच्छा इलाज दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आरके शाक्य, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल मंडला

जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है जिला अस्पताल में डॉक्टरों की पदस्थापना को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

देव सिंह सैयाम, विधायक मंडला
पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क

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