scriptEasing the path of the people of Parikrama by sacking | बोरी बंधान से आसान कर रहे परिक्रमा वासियों की राह | Patrika News

बोरी बंधान से आसान कर रहे परिक्रमा वासियों की राह

महाराजपुर से पुरवा के बीच बंजर नदी में बोरी बंधान से बनाया जा रहा पुल

मंडला

Published: March 04, 2022 08:20:14 pm

मंडला. पैदल नर्मदा परिक्रमा करने वाले भक्तों की राह तो वैसे कठिन ही होती है कभी जंगल तो कभी उबाड़ खबाड़ वाले रास्तों से गुजरना पड़ता है। नर्मदा के जयकारों के साथ सभी रास्ते असान हो जाते हैं। शहर के युवा परिक्रमा वासियों को राहत दिलाने श्रमदान कर रहे हैं। ताकि उन्हें लंबा सफर तय ना करना पड़े इसके लिए बंजर नदी में अस्थाई पुल बनाने में जुटे हुउ हैं। जानकारी के अनुसार माहिष्मती गौ सेवा रक्तदान संगठन के तत्वाधान में महाशिवरात्रि के से पुरवा एवं महाराजपुर के बीच कच्चे पुल के लिए श्रमदान किया जार रहा है। जो कि कुछ दिन लगातार जारी रहेगा। प्रतिदिन सुबह 8 बजे से 10 बजे तक श्रमदान का कार्य किया जाएगा। संगठन के माध्यम से बंजर नदी से रेत निकालकर बोरी में भरकर एवं बोरी को बांधकर पुराने क्षतिग्रस्त पुल पर रखा जा रहा है। महिष्मति गौ सेवा रक्तदान संगठन के सदस्यों के साथ समाजसेवियों ने अपना योगदान दिया। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप चंद्रोल ने युवा समाजसेवियों से अपील की है कि प्रतिदिन सुबह यह कार्य जारी रहेगा जिसमें श्रमदान करें। पहले दिन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेन्द्र सिंह कंवर ने आकर सभी कार्य सेवको का मनोबल बढ़ाया। कार्यक्रम में डॉ दिलीप चंद्रोल, हनुमंत बैरागी, शिवम यादव, हैप्पी जैन, पंकज मलिक, सचिन गुप्ता, राहुल जैन, रितेश यादव , वीरेंद्र चौरसिया बम्हनी, शिवा बैरागी, बालकृष्ण बंशकार, कृष्णा झरिया, देवी नंदा, राजा नंदा, बसंत पटेल, हरिशंकर नामदेव, गौ पुत्र दिलीप चंद्रौल एवं अन्य लोगों श्रमदान किया। स्वल्पाहार की व्यवस्था कारसेवकों के लिए जिला लोधी समाज जिला उपाध्यक्ष व क्षेत्रीय जनपद सदस्य आनंद ठाकुर मुगदरा एवं महिष्मति गौ सेवा रक्तदान संगठन के संरक्षक रोचीराम गुरबानी, मनोज गुरबानी के द्वारा की गई। समाज सेवी बब्बल खरया के द्वारा केला एवं पानी की व्यवस्था की गई। गौरतलब है कि बंजर नदी में महाराजपुर से पुरवा के बीच पूर्व में अस्थाई पुल का निर्माण किया जाता था। जिससे नबंवर से जून तक अवागमन होता था। वहीं शेष दिनो में नाव से सफर किया जा सकता था। पुल निर्माण में दर्जनो ट्राली मुरम डाल दी जाती थी। जिससे नर्मदा नदी के जल स्तरपर असर पड़ रहा था। लगातार विरोध के बाद पुल निर्माण का कार्य बंद कर दिया गया है। हलांकि यहां लोग एनिकट या स्थाई पुल निर्माण की मांग भी कर रहे हैं। लेकिन अब पुल निर्माण का कार्य नहीं हो रहा है जिससे परिक्रमा वासी व स्थानी लोगों को 8 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। वहीं पानी कम होने पर लोग जोखिम उठाकर नदी पार करते हैं। बोरी बंधान से बारिश के समय तक मार्ग से अवागमन किया जा सकेगा।

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