किसान कर रहे दूसरे कैनाल का इंतजार

किसानों ने मुकास जलाशय के गहरीकरण की भी उठाई मांग

बबलिया. मुकासकला के आसपास के दर्जनों गांव के किसानों को जलाशय होने के बाद भी उसके लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है। यहां सर्वे को तो दो कैनाल के लिए हुआ था लेकिन एक ही कैनाल से पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। मुकासकला ग्राम के गिरवर सिंह, सुंदरलाल मरावी, जगतसिंह सैयाम, कंधीलाल विश्वकर्मा आदि का कहना है कि हृदय शाह, शंकर शाह मुकास जलाशय का सर्वे व निर्माण जब किया गया था तब दो कैनाल की मांग की जा रही थी। जलाशय लगभग 76 लाख रुपए की लगाता से तैयार किया गया है। जिसके लिए वर्ष 1965 में जब सर्वे हुआ था तब 30 चेन लम्बाई एवं 32 मीटर ऊंचाई दो कैनाल का सर्वे किया गया था जिसमें एक कैनाल से खिन्हा, जेवरा, भैंसवाही, बरबटी, गाड़ा देवरी तक के किसानों के खतों तक पानी पहुंचना था। अभी वर्तमान में एक कैनाल संचालित है। निर्माण के समय 32 मीटर के जगह 27 मीटर की ही उॅचाई दी गई है और लम्बाई 30 चेन की जगह 25 चेन दी गई। जिसकी लम्बाई 3 हजार फिट थी। दूसरा कैनाल का निर्माण ही नहीं कराया गया है। ग्रामीणों ने बताया यह सर्वे दो कैनाल का हुआ था उक्त ग्रामों के लिए कैनाल का निर्माण करा दिया होता तो इन ग्रामों को भी सिंचाई का लाभ मिल सकता। मुकासकला, सिमरिया और देवरी कला बबलिया, मझगांव, बनार, सुखराम तक के किसानों की सिंचाई होना था। जो एक कैनाल बनाया ही नहीं गया है। मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन मंत्री राजेन्द्र शुक्ल द्वारा 1984 में जलाशय का लोकार्पण किया गया था। ग्रामीणों ने बताया है कि मुकासकला जलाशय का गहरीकरण, सफाई एवं उसकी ऊंचाई बढ़ा दी जाए और एक कैनाल दे दिया जाए तो मुकासकला, सिमरिया, देवरीकला, बनार, सुखराम तक के खेतों में पानी पहुंच सकेगा। मुकास जलाशय के अधिकार क्षेत्र में आने वाले जमीन में कुछ लोगों ने अतिक्रमण भी करना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि अतिक्रमण हटाकर गहरीकरण एवं सफाई कराई जाए।

Mangal Singh Thakur
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