35 वर्षों से मुआवजे को तरस रहे किसान

हाईकोर्ट के आदेश का नहीं हुआ पालन

By: Mangal Singh Thakur

Published: 23 Jan 2021, 12:04 PM IST

मनेरी. जिले में उद्योग की स्थापना के लिए किसानों से ली गई जमीन का मुआवजा 35 साल बाद भी किसानो को नहीं मिला है। पीडि़त किसान मुआवजे का इंतजार करते करते उम्रदराज हो गए हैं। पहले तो किसान अपनी जमीन नहीं देना चाह रहे थे लेकिन प्रशासन ने जमीन ले ली। अब किसान मुआवजा की राशि के लिए भटक रहे हैं। जानकारी के अनुसार औद्योगिक स्थापना के लिए वर्ष 1984-85 में किसानो से ली गई। जामीनो के मुआवजे का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। प्रथम भुगतान 600-500 रुपए एकड़ लेकर दु:खी किसानो ने न्यायालय में याचिका दायर की थी। न्यायालय ने 24 मई 1987 को यह आदेश पारित किया की किसानों के साथ अन्याय हुआ वर्तमान जामिनो की कीमत को देखते हुए 10 हजार रुपए प्रति हेक्टर बढ़ाकर ब्याज सहित केम्प लगाकर भुगतान किए जाने का आदेश पारित किया गया। जिसमें कुछ लोगों को आदेशा अनुसार भुगतान किया जा चुका हैं। लगभग 40 प्रतिशत किसान आज भी मुआवजे से वंचित हैं। कई बार भू-अर्जन अधिकारी के समक्ष किसानों ने गुहार लगाई है। वहीं धनीराम पटेल, सुखुआ मरावी सहित अन्य किसानों का कहना है कि किसानों की जमीन पर कारखाने तो लगा दिए गए हैं लेकिन वही किसान रोजगार को खोकर खुद रोजगार तालाश रहा है। 1984-85 में पारित भुगतान आदेश भू अर्जन मंडला में धूल खा रहा हैं। पीडि़त कई किसानों की मृत्यु भी हो चुकी है। किसानों को ना रोजगार मिला ना मुआवजा। आदेशित राशि भू-अर्जन अधिकारी के खाते में आज भी पड़ी है। किसानों का कहना है कि जल्द भुगतान नहीं किया जाता है तो फिर से न्यायालय की शरण लेंगे।

इनका कहना
मनेरी क्षेत्र के मुआवजा वंचित किसानो ने विधिवत कोर्ट के आदेश सहित फाइल मुझे दी है। विधानसभा सत्र में किसानो के मुआवजे पर सरकार से लड़ूगां।
डॉ अशोक मर्शकोले, विधायक निवास


किसानों के साथ अन्याय नहीं होगा। मनेरी के किसानो की समस्या को मुख्यमंत्री से चर्चा कर न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
फग्गन सिंह कुलस्ते, केन्द्रीय मंत्री व सांसद


समय बितता जा रहा है। जवानी से बुढ़ापा आ गया है। लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला। पता नहीं हम किसानों को जीवित रहते न्याय मिलेगा या नहीं।
रघुनाथ दुबे, किसान, मेढ़ी

Mangal Singh Thakur
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