यहां के मैदान में गोंडकालीन सैनिक होते थे प्रशिक्षित

अब आदिवासियों के लिए बना तीर्थस्थल

By: Mangal Singh Thakur

Updated: 19 Feb 2021, 04:47 PM IST

मंगल सिंह
मंडला. जिले के रामनगर के पास चौगान की मडिय़ा गोंड आदिवासियों के लिए तीर्थस्थल की तरह है। मान्यताओं के अनुसार, यहां प्राचीनकाल की सीढ़ी है जिसे स्वर्ग सीढ़ी के नाम से जाना जाता है। गोंड आदिवासियों का कहना है कि इस चौगान में मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। 50 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है जब से यहां मन्नत पूरी होने के बाद चैत्र नवरात्रि के दौरान यहां दूर-दूर से लोग जवारे बोने आते हैं। बिछिया विकासखंड के अंतर्गत आने वाले चौगान के नाम यहां के बड़े-बड़े मैदानो की वजह से पड़ा है। सैनिक के लिए प्रशिक्षण स्थल बने मैदान को गौड़ी भाषा में चौगान बोलते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि चौगान गोंडवाना साम्राज्य के शक्तिशाली शासक महाराजा हिरदेशाह का सैनिक प्रशिक्षण केंद्र था। चौगान में गोंड़ युवाओं को सैनिक प्रशिक्षण देकर गोंडवाना सेना में भर्ती किया जाता था। महाराजा हिरदेशाह ने प्रत्येक गोंड़ युवक के लिए सैनिक शिक्षा अनिवार्य कर दी थी। इस काल में गोंडवाना सेना बहुत शक्तिशाली थी। चौगान में एक मडिय़ा भी है यहाँ पर महाराजा हिरदेशाह पूजा पाठ किया करते थे।
चौगान मढिय़ा में बनी सीढ़ी का स्वर्ग से जोड़ बताया जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा होती है। सिर्फ मध्यप्रदेश से ही नहीं, महाराष्ट्र, झारखंड और छत्तीसगढ़ सहित कई प्रांतों से आदिवासी श्रद्धालु यहां आते हैं। चौगान मडिय़ा के उपासक हमेशा सफेद पोशाक ही धारण करते हैं। यहां तक कि विवाह के दौरान दुल्हन भी सफेद जोड़े में मायके से विदा होकर ससुराल जाती है। इस धर्म और समाज के मुखिया सफेद रंग को शांति और उन्नति का प्रतीक बताते हैं।
सिर्फ घोषणा तक सिमटा विकास
लोंगो का कहना है कि गौड़कालीन समय की राजधानी रामनगर चौगान आज भी विकास को तरस रहा है। रामनगर में हर साल आदि उत्सव का आयोजन किया जाता है। यहां मुख्यमंत्री, मंत्री के द्वारा आदिवासी समाज संस्कृति के हितार्थ घोषणाएं की गई थीं जो कि शासकीय रिकॉर्ड में भी दर्ज हैं, उन्हें आज तक पूरा नहीं किया गया है। न ही जमीनी स्तर पर उनका क्रियान्वयन कहीं दिखाई दे रहा है, इन घोषणाओं में आदि उत्सव 2016 में 10 अप्रैल 2016 को केंद्रीय जनजाति मंत्री जुएल ओराम द्वारा ग्राम चौगान में 4 करोड़ रुपये की लागत से जनजातीय संग्रहालय बनाने, ग्राम चौगान में आदिवासी सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा की गई थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा ग्राम चौगान में पेयजल व्यवस्था के लिए 65 लाख रुपए की घोषणा, ग्राम रामनगर को केंद्र बनाकर आसपास के गोंडवाना क्षेत्रों को मिलाते हुए गोंडी टूरिज्म सर्किल विकसित करना की घोषणा की गई थी। 5 वर्ष बीतने के बाद भी पूरा नहीं किया गया है।

Mangal Singh Thakur
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