आठ महायोगों में भक्तों ने किया नर्मदा स्नान

35 वर्षों बाद सिद्ध संयोगों में पड़ी गंगा दशहरा

By: shivmangal singh

Published: 24 May 2018, 07:18 PM IST

मंडला 24 मई को गंगा दशहरा का शुभ मुहूर्त आठ महायोगों के साथ संपन्न हुआ। यही कारण है कि सुबह से नर्मदा के ज्यादातर घाटों पर भक्तों की भीड़ दिखाई पड़ी जो इन महायोगों पर पुण्य लाभ लेना चाहते थे। ज्योतिषाचार्यो के अनुसार, इस बार गंगा दशहरा पर 10 में से 8 योग घटित हुए। आजाद वार्ड निवासी पंडित राकेश शास्त्री ने बताया कि शास्त्र के अनुसार ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा का अवतरण दिवस माना जाता है। हिंदू धर्म के सभी वेद पुराणों में गंगा को पापनाशिनी, मोक्षदायनी माना गया है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाराज भागीरथ के कठोर तप से प्रसन्न होकर स्वर्ग से गंगा माता पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। गंगा दशहरा वाले दिन गंगा में स्नान करने से बहुत लाभ मिलता है। यदि ऐसा संभव नहीं हो तो घर में मौजूद पानी में थोड़ा-सा गंगा जल डालकर भी स्नान करने से गंगा स्नान का फल प्राप्त होता है। चूंकि मंडला नगरी नर्मदा नदी से तीनों ओर से घिरी हुई है। इसलिए यहां जगह जगह पर नर्मदा के पवित्र और विशाल घाट हैं। ज्यादातर नगरवासियों ने नर्मदा स्नान कर पूजन, हवन, दान आदि किए और धर्मलाभ लिया। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन जप, तप तथा दान उपवास करने से सभी तरह के पाप नष्ठ होते हैं और मनुष्य के सभी मनोरथ पूरे होते हैं।
गंगा दशहरा पर बनें ये 8 महायोग
ज्योतिषाचार्य शास्त्री ने बताया कि इस बार गंगा दशहरा पर ज्येष्ठ माह, शुक्लपक्ष, दशमी तिथि, चंदमा कन्याराशि मे, सूर्य वृषभ राशि में, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र उपरांत हस्त नक्षत्र, अधिकमास -पुरुषोत्तम मास आदि एक साथ रहे।
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जब्त होंगे अवैध टुल्लू पंप

मुख्य नगरपालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद से प्राप्त जानकारी अनुसार, चेतावनी जारी की गई है कि कुछ जल उपभोक्ताओं द्वारा नगर पालिका से प्रदाय किए जा रहे पेय जल आपूर्ति के नलों में सीधे टुल्लू पम्प लगाकर अतिरिक्त पानी लिए जाने से अन्य लोगों के लिए कृत्रिम रूप से जल संकट उत्पन्न किया जा रहा है जो नियम विरूद्ध है। नगर में उत्पन्न किए जा रहे जल संकट को दूर करने के लिए नगर पालिका द्वारा टुल्लू जब्ती अभियान शुरु किया जा रहा है। अभियान के दौरान नलों में सीधा टुल्लू पम्प लगे पाये जाने पर टुल्लू पम्प जब्ती की कार्रवाई नगर पालिका अधिनियम 1961 के तहत की जाएगी और इस कानूनी कार्यवाही के तहत उक्त नल कनेक्शन विच्छेद कर दिया जावेगा। जिसकी सम्पूर्णं जिम्मेदारी नल कनेक्शन धारक की होगी।
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