चारे के अभाव में पिछड़ रहे दुग्ध उत्पादन में

सिमटते चारागाह, महंगे होते दाने से मवेशीपालक परेशान

By: shubham singh

Published: 26 Jun 2020, 11:03 PM IST

मंडला। आदिवासी बहुल्य मंडला जिले के ग्रामीण अंचलों में कृषि एवं दुग्ध उत्पादन ही रोजगार का मुख्य साधन है। कृषि कार्य के लिए मवेशियों की आवश्यकता पड़ती ही है। यही कारण है कि ग्रामीण अंचलों में अधिकांश ग्रामीणों के घरों में कृषि कार्य के अलावा एक-दो दुग्ध उत्पादक मवेशी जैसे गाय भैंस भी अवश्य होते हैं। आज से लगभग 15 वर्षों पहले नगरीय क्षेत्र में होने वाले दूध की पूरी खपत ग्रामीण अचंलों से आने वाले दूध के जरिए होती थी। लेकिन बदलते परिवेश में तकनीकी विकास होने के बावजूद ग्रामीण अंचलों में दुग्ध उत्पादन बढऩे के बजाय घटता जा रहा है और कई बार दुग्ध व्यापारियों को नजदीकी महानगर जबलपुर से दूध बुलवाना पड़ता है।
ग्रामीण अंचलों में दुग्ध उत्पादन घटने का कारण बताते हुए जारगी गांव के निवासी राममोहन बताते हैं कि जंगलों का लगातार कटाव होने से चारागाह सिमटते जा रहे हैं। पहले हरे भरे चारागाह में चरते हुए मवेशियों को दोबारा खुराक देने की जरुरत नहीं पड़ती थी। लेकिन अब चारागाह से उन्हें पर्याप्त खुराक नहीं मिल रही। इससे उनमें दुग्ध उत्पादन कम होता जा रहा है।
दानों पर बढ़ी निर्भरता
बिनेका गांव, जंतीपुर गांव के पशुपालक निर्भय चंद्रोल, अनिल चंद्रोल, अमिताभ पटेल आदि का कहना है कि वर्तमान समय में मवेशियों को दाना देना बहुत जरूरी हो गया है। यदि उनसे अधिक दूध चाहिए तो खली, चुनी, भूसी आदि के साथ साथ कैल्सियम के टॉनिक देना भी अनिवार्य होता जा रहा है। पिछले चार वर्षों में उक्त दानों की कीमत दोगुनी हो चुकी है। भूसा अब मिलता नहीं क्योंकि खेतों में कटाई कार्य हार्वेस्टर के जरिए हो रहा है। हार्वेस्टर की कटाई में भूसा नहीं निकलता। बिना भूसा के सिर्फ दाना यदि मवेशियों को खिलाया जाए तो उनमें भी उनमें पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं बनता। दाने के साथ भूसा जरुरी है। दानों की कीमत के अनुपात में दूध की कीमत नहीं मिल रही है। आज भी ग्राहक 30 से 40 रुपए में शुद्ध दूध पाना चाहते हैं। जबकि मवेशियों को पर्याप्त खुराक देनेे पर दूध प्रति लीटर 60-70 रुपए पड़ता है। इस लागत में 40 रुपए में दूध विक्रय करना संभव नहीं। इसलिए मवेशियों को कम दाना देकर काम चलाया जा रहा है। ये एक ओर वजह है कि दुग्ध उत्पादन घटता जा रहा है।
वर्जन:
* आज भी खरीददार 35-40 रुपए में शुद्ध दूध पाना चाहते हैं। दाने महंगे होते जा रहे हैं। उक्त कीमत पर दूध उपलब्ध कराना संभव नहीं। पर्याप्त दाना नहीं मिलने से मवेशियों में दूध उत्पादन कम होता जा रहा है।
अनिल चंद्रोल, बिनेका।
* चारागाह सिमटते जा रहे हैं। मवेशियों को प्राकृतिक चारा मिलना जरुरी है। चारागाहों को संरक्षित रखने में सरकार को कोई रुचि नहीं। इसलिए भी दुग्ध उत्पादन कम होता जा रहा है।
अजय चंद्रोल, जंतीपुर।
फैक्ट फाइल:
10,000 लीटर रोज शहर में खपत
30-40 रुपए प्रति लीटर मूल्य
50-60 रुपए प्रति मवेशी दाना

shubham singh Incharge
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