दलदली माता मंदिर में सूनी झोली भरने के लिए मांग रहे मन्नत

Murari Soni

Publish: Dec, 08 2017 11:55:52 (IST)

Mandla, Madhya Pradesh, India
दलदली माता मंदिर में सूनी झोली भरने के लिए मांग रहे मन्नत

दूर दराज से पहुंचे भक्तों की भीड़ उमड़ रही मेले में

नैनपुर. जिन दंपत्तियों की गोद अब तक सूनी है, वे अपनी खाली झोली भरने की मन्नत लेकर चकोर नदी के तट पर भरने वाले दलदली माता के मेले में बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अगहन माह की पूर्णिमा तिथि से आयोजित हो रहे मेले में सिर्फ स्थानीय लोग या आसपास के ग्रामीण इलाकों से ही नहीं, बल्कि जिले के दूरदराज के इलाकों और अन्य जिलों से भी लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।
नगर से लगभग तीन किलोमीटर पर जेवनारा ग्राम पंचायत के ग्राम शालिवाणा के समीप आस्था एवं धार्मिकता से परिपूर्ण माता दलदली की पूजा अर्चना कर माता से मन्नते मांगी जा रही हंैं। रविवार से आयोजित हुए इस पांच दिवसीय मेले का गुरुवार को अंतिम दिन रहा। इसलिए यहां सैकड़ों की संख्या मे भक्तगण अपने परिवार के साथ पहुंचे और दलदली माता की पूजा अर्चना की।
अपने घर-आंगन में एक किलकारी सुनने की आस लिए यहां आ रहे हजारों लोग दलदली माता से मन्नत मांग रहे हैं। मान्यता है कि यहां संतान की चाह रखने वाले हजारों दंपति मां के दरबार में अपनी झोली को भर देने की अर्जी लगाते हैं। लोगों का दावा है कि दलदली माता उनकी मुरादें पूरी करती हैं। मंदिर के सामने दलदल में भरे पानी की भी लोगों द्वारा पूजा-पाठ किया जाता है। स्थानीय लोगों की माने तो यहां का पानी पीने से सारे रोग दूर हो जाते हैं।
पालने के सामने बैठकर मांगते संतान प्राप्ति की मन्नत
लोगों की मान्यता है कि दलदली माता इसी स्थान से प्रकट हुई हैं इसलिए इस सिद्ध स्थान का नाम दलदली माता रखा गया है। नि:संतान दंपति पहले मंदिर के सामने दलदल पर भरे पानी की पूजा करते हैं और उसके बाद मंदिर के बाजू में पालने के सामने बैठकर संतान प्राप्ति की मन्नत मांगते हैं। संतान प्राप्ति के बाद दंपति अपनी संतान के साथ पहुंचते हैं और संतानदायनी दलदली माता को प्रसाद अपर्ण करते हैं। सिवनी जिले से आई एक महिला श्रद्धालु का कहना था कि विवाह के सालों बाद भी वो नि:संतान थी। इलाज के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ। दलदली माता की शरण में पहुंचकर मन्नत मांगी जिसके बाद उन्हें संतान प्राप्ति हुई है और इसलिए अब वो माता के मंदिर में प्रसाद चढ़ाने आये हैं।
पुजारी अरुण चौबे के कथन के अनुसार, संतानदायिनी कहे जाने वाली दलदली माता मंदिर अति प्राचीन है। पहले दादाजी और उनके पिता इस मंदिर पर पुजारी थे उनके बाद वो ये जवाबदारी संभाल रहे हैं। माता के दरबार में मन्नत मांगने से हर मुराद पूरी होती है।

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