रोड़ पर होती है इनकी मौज

नगरपालिका और यातायात के ध्यान नहीं देने से परेशान होते है राहगीर

By: shivmangal singh

Published: 13 Mar 2018, 07:45 PM IST

मंडला. जिला मुख्यालय की सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशी, शहर के लोगों की सबसे बड़ी परेशानी बने हुए है। लगातार इनकी संख्या बढ़ रही है जिसको रोकने के लिए नगर पालिका के अधिकारी भी सक्रिय नहीं हैं। शहर की कॉलोनी हो या फिर कोई अन्य इलाके इनमें गायों के झुंड देखने को मिल ही जाएंगे। इस कारण न केवल लोगों को आने-जाने में दिक्कत होती है बल्कि सड़कों पर गंदगी फैलती है। इन पशुओं से एक्सीडेंट की भी समस्या बढ़ रही है। सड़कों पर प्रतिदिन आवारा मवेशियों की धमाचौकड़ी से आने जाने वाले राहगीरों के साथ-साथ आमजन का भी हाल बेहाल है। नगर के मुख्य मार्गो में आवारा पशुओं की प्रतिदिन धमाचौकड़ी देखने को मिलती है जससे किसी बड़ी दुर्घटना की संभावना हमेशा बनी रहती है। पैदल चलने वाले आम राहगीरों, स्कूली बच्चों, महिलाओं को भी खतरा बना रहता है। हाऊसिंग बोर्ड कालोनी में रहने वाली किरण सिंह बताती हैं कि रात में मोहल्ले में गायों की लाइन लग जाती है और सुबह रोज घर के सामने गंदगी फैली रहती है जिसको साफ करने में घंटों समय लगता है। जवाहर वार्ड इलाके के अमर शर्मा का कहना है कि रेस्ट हाऊस के पास में बहुत सारा कूड़ा पड़ा रहता है और दिन में तो एक दो मवेशी रहते ही है लेकिन रात तक यहां पर दस से भी ज्यादा आवारा मवेशी आ जाते है। लोगों का कहना है कि कई बार सड़क में चलते हुए गाय को बचाने के चक्कर में हादसे हो जाते है। क्षेत्र में कूड़ा का सही समय पर उठाव नहीं होना भी एक बड़ी समस्या है। बाजार इलाके में रहने वाले लोग बताते हैं, कि सब्जी मंडी के लोग सब्जियों को बाहर फेंक देते हैं जिसको खाने के लिए आवारा मवेशियों का झुंड का झुंड खड़ा रहता है समस्या इतनी है कि इनकी वजह से जाम भी लग जाता है क्योंकि इस इलाके की सड़के भी चौड़ी नहीं हैं।
गौ सेवा एवं रक्तदान संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप चंद्रौल ने बताया कि पशुओं के पेट में चार भाग होते हैं। प्रथम तीन भाग में पॉलीथिन और प्लास्टिक फंसने से सिर्फ तबीयत बिगड़ती है, लेकिन अंतिम भाग में फंसने से पेट में पानी भरने के कारण रूमेनल रूटेसिस बीमारी हो जाती है, जिससे पशु की मौत हो जाती है। शहर में अधिक्तर लोग पालीथीन में रखकर खाने की सामग्री फेंक देते है जिसे आवारा मवेशी खा लेते है और उनकी मौत हो जाती है। मवेशियों की जान बचाने और शहर की सड़को से इन्हें हटाने के लिए व्यापक स्तर पर काम करने की आवश्यकता है। संगठन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे है साथ ही मवेशी पालकों को भी समझाईस दी जा रही है। संगठन के बैसाखू नंदा का कहना है कि आवारा मवेशी जाए भी तो कहां, मालिकों द्वारा रोज सुबह दूध निकालने के बाद उन्हें छोड़ दिया जाता है। ऐसे में ये मवेशी जगह की तलाश में भटकते रहते हैं और जिन गौशालाओं में आवारा पशुओं को रखा जाता है, वहां किसी भी प्रकार की व्यवस्था नहीं होने से उनकी जान पर बन आती है।

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