10.54 लाख जनसंख्या पर मात्र एक एमडी चिकित्सक

10.54 लाख जनसंख्या पर मात्र एक एमडी चिकित्सक
Only one MD doctor on 10.54 lakh population

Mangal Singh Thakur | Updated: 06 Oct 2019, 10:00:00 AM (IST) Mandla, Mandla, Madhya Pradesh, India

जिले में 14 पद स्वीकृत, 13 रिक्त, कामचलाऊ दवाइयों से कर रहे उपचार

मंडला. 10.54 लाख की आबादी वाले आदिवासी बहुल्य जिले में मात्र एक एमडी मेडिसिन चिकित्सक उपलब्ध, अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले भर के शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में मरीजों का इलाज किस तरह से किया जा रहा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन जिले भर से सैकड़ों मरीज यही उम्मीद लेकर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं कि यहां उनका अच्छा इलाज होगा, लेकिन यहां उपलब्ध एक चिकित्सक कितने मरीजों का उपचार कर पाएंगे और किस हद तक पूर्ण उपचार कर पाएंगे, इस पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है जिसका जवाब न ही अस्पताल प्रबंधन के पास है और न ही स्वास्थ्य विभाग के पास।
जिला अस्पताल में प्रति माह औसतन 15 हजार मरीज पहुंच रहे हैं। संक्रमण काल में यह आंकड़ा 17 हजार तक जा पहुंचता है। ऐसे में महज एक चिकित्सक के भरोसे जिला अस्पताल में मरीजों को उपचार देने का प्रयास किया जा रहा है।
रेफर ही एकमात्र विकल्प
एमडी मेडिसिन का नितांत अभाव होने के कारण जिले भर के शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में सिर्फ सर्दी-खांसी-बुखार, बस इतनी बीमारियों का ही इलाज पूर्ण रूप से हो पा रहा है। यदि इससे अधिक कुछ है तो या मरीज निजी अस्पतालों या डिस्पेंसरियों में जाए या सीधे जबलपुर की ओर भागे। यह वास्तविकता है आईएसओ प्रमाणित जिला अस्पताल और सभी स्वास्थ्य केंद्रों की है। बारिश में अधिकतर क्षेत्रों में पानी दूषित हो जाने के कारण संक्रामक रोग चरम पर हैं।
यही कारण हैं कि सैकड़ों लोग प्रतिदिन जिला अस्पताल उपचार के लिए पहुंच रहे हैं लेकिन ज्यादातर को आराम नहीं मिल पा रहा है। मिले भी कैसे, उनका उपचार करने वाले सामान्य डिग्रीधारी चिकित्सक हैं जो अपनी योग्यता के अनुसार, साधारण और सामान्य संक्रामक बीमारियों का ही इलाज कर सकते हैं। यदि मरीज को थोड़ी भी जटिल समस्या हो तो उसके लिए मेडिसिन विशेषज्ञ चिकित्सक की उपस्थिति अनिवार्य है और वह चिकित्सक जिला अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं।
क्षमता से अधिक मरीज
जिला अस्पताल में औसतन हर दिन 500 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर उपलब्ध चिकित्सकों ने बताया कि सीमित समय में इतनी अधिक संख्या में मरीजों का सही तरीके से पूर्ण जांच किया जाना असंभव है। जांच पूरी होगी तभी तो सही तरह से इलाज हो पाएगा। इसके लिए और अधिक चिकित्सकों की आवश्यकता है। जानकारी के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में अस्पताल में तीन हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इनमें से लगभ 850 मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा और शेष 2200 मरीजों को ओपीडी में उपचार देकर रवाना किया गया।
नहीं ले रहे रुचि
मिली जानकारी के अनुसार अनूपपुर और नरसिंहपुर से एक-एक चिकित्सक मंडला में अपनी सेवाएं देने की सहमति दिए जाने के बाद भी प्रदेश शासन ने इस दिशा में अब तक कोई कारगार निर्देश जारी नहीं किये हैं। मंडला में जिला अस्पताल का कोई विकल्प नहीं होने से इस आदिवासी अंचल के सभी नागरिक इसी स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। वर्तमान परिस्थिति में जिला अस्पताल में गंभीर बीमारी का उपचार करना तो बहुत दूर की बात है प्राथमिक उपचार मिलना भी कठिन हो गया है। ऐसे में जिलेवासियों के लिए निकटतम उच्च स्वास्थ सुविधा जबलपुर में उपलब्ध है। पिछले चार वर्षो से मंडला-जबलपुर निर्माणाधीन सड़क के कारण मरीजों और उनके परिजनों को निवास होकर जबलपुर जाना पड़ रहा है। इससे आपातकाल में बहुमूल्य समय नष्ट हो रहा है। साथ ही घुमावदार पहाड़ी रास्ता होने के कारण मरीज के स्वास्थ में भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

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