शिक्षकों के अनिवार्य सेवानिवृत्ति का किया विरोध

एसोसिएशन ने कहा 20-50 का फार्मूला नवीन शिक्षक संवर्ग पर लागू नहीं होता

मंडला। सरकार द्वारा 20-50 के फार्मूले के अंतर्गत 16 शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने का विरोध करते हुए ट्राईबल वेलफेयर टीचर एसोसिसन ने सभी शिक्षक संगठनों के साथ मिलकर विरोध करने फैसला लिया। एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष डीके सिंगौर के नेतृत्व में शैलेंद्र मिश्रा शिक्षक की सेवानिवृत्ति का मामला हाईकोर्ट जबलपुर में लगाया गया। सेवानिवृत्त किए गए शिक्षक शैलेन्द्र मिश्रा के खण्डवा जिले में पदस्थ थे जहां का परीक्षाफल 58 प्रतिशत था, जो 30 प्रतिशत से कम की श्रेणी में नहीं आता। स्थानांतरण के बाद इन्होंने 31 जनवरी 2019 को रीवा जिले के जिस विद्यालय में ज्वाइंन किया, वहां के खराब परीक्षाफल के लिए दोषी मानते हुए शैलेन्द्र मिश्रा को परीक्षा देने के लिए बाध्य किया गया, जिसका इन्होंने विरोध किया। जबकि खंडवा जिले के कलेक्टर द्वारा शिक्षक शैलेन्द्र मिश्रा को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया था। ऐसे में शिक्षक की पूर्व उपलब्धियों को नजरंदाज करते हुए अनेक शिक्षकों पर सेवानिवृत्ति की विसंगति पूर्ण कार्यवाही की गई है। एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष सेवानिवृत्त किए गए शिक्षक शैलेन्द्र मिश्रा के साथ जाकर मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें इस पूरे विसंगति पूर्ण प्रकरण से अवगत कराया। साथ ही अन्य शिक्षक संगठनों के साथ मंत्रालय में प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा रश्मि अरुण शामी, संचालक लोकशिक्षण गौतम सिंह से मिलकर 20-50 फार्मूले के तहत की गई कार्यवाही का विरोध किया। प्रांताध्यक्ष डी के सिंगौर द्वारा रखे तर्कों एवं वास्तविक तथ्यों के आधार पर आयुक्त ने शिक्षकों का पक्ष सुने बिना अनिवार्य सेवानिवृति की कार्यवाही को अपनी चूक माना एवं प्रभावित 16 शिक्षकों से अभ्यावेदन लेकर वास्तविकता जानने एवं उस आधार पर पुनर्विचार करने के लिए आश्वासन दिया है। एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष ने प्रमुख सचिव के सामने स्पष्ट तौर पर कहा है कि अध्यापक से बना शिक्षक को आप उसे अनिवार्य सेवा निवृति नहीं दे सकतीं, क्योंकि पेंशन विहीन होने के कारण पेंशन नियम 1976 के तहत 20-50 का फार्मूला नवीन शिक्षक संवर्ग के ऊपर लागू नहीं होता। बिना परीक्षण किए आनन फानन में सेवानिवृति की कार्यवाही की गई है। इसके लिए दोषियों को भी सजा मिलना चाहिए। 4-4 बार पुस्तक रखकर परीक्षा देने के बाद भी पास नहीं होने की बात कहकर शिक्षकों को बदनाम किया जा रहा है। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग ने भरोसा दिलाया कि आरटीई के तहत अब प्राइवेट स्कूल में एडमिशन कराने का दबाव शिक्षकों के ऊपर से खत्म होगा। साथ ही यह आश्वासन भी दिया कि सर्व शिक्षा अभियान में वर्षों से प्रतिनियुक्ति में जमे शिक्षकों को स्कूलों में वापिस बुलाया जाएगा। एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजीव सोनी ने बताया कि ट्रायबल विभाग में भी 20 शिक्षकों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति की फाइल चल रही है। जिस पर ट्रायबल विभाग के अधिकारियों ने एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष को आश्वस्त किया कि पूरी जांच पड़ताल करने के बाद ही विभाग उन शिक्षकों पर कोई कार्यवाही करेगा। आयुक्त कोष एवं लेखा से पता चला कि आईएफएमआईएस में सातवें वेतनमान का ऑप्शन खोलने का पत्र कोष एवं लेखा पर्यावास भवन में भेजा ही नहीं गया।

Sawan Singh Thakur
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