जहरीले कंद को परंपरागत तरीके से बना देते हैं पौष्टिक

विलुप्त हो रही कंद-प्रजाति को सहेजने की कवायद शुरु

By: Mangal Singh Thakur

Updated: 06 Jan 2020, 08:15 PM IST

विख्यात मंडल
मंडला. आदिवासी बहुल्य होने के कारण बेहद पिछड़ा माने जाने वाले जिले में दूरदराज के गांवों में रहने वाले आदिवासी ग्रामीण जहरीले कंद को न सिर्फ खाने योग्य बना देते हैं, बल्कि उससे भरपूर पोषण आहार भी ले रहे हैं। और इस प्रक्रिया में न ही किसी मशीन का उपयोग किया जा रहा है और न ही किसी वैज्ञानिक पद्धति का। पीढिय़ों से चले आ रहे परंपरागत तरीके से आदिवासी जहरीले कंद की प्रोसेसिंग कर रहे हैं। इस कंद का नाम है बैचांदी, जो विलुप्त हो रही कंद प्रजातियों की श्रेणी में शामिल है और फिलहाल जिले के मवई अंचल से अमरकंटक के बीच स्थित बैल्ट में पाया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि बैचांदी कंद साल के जंगलों में ही पाया जाता है। मवई के अमवार स्थित बैगा बाहुल्य क्षेत्र के बैगा इसी बैचांदी कंद का इस्तेमाल पोषणयुक्त आहार के रूप में कर रहे हैं। वन विभाग के वनौषधीय प्रसंस्करण केंद्र द्वारा बैंचांदी कंद को सहेजने की कवायद शुरु की गई है और मवई के बैगाओं को इसे संरक्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जहरीला होता है बैचांदी
बैचांदी कंद मूल रूप से बेहद जहरीला होता है। मवई क्षेत्र ग्रामीण अंचलों में यह कंद कुछ बैगा परिवारों द्वारा उगाया जा रहा है। ग्रामीण कंद को चिप्स के आकार में काटकर बांस से बनी टोकनी में रखते हैं और उसे नदी की तेज धार में कुछ इस तरह से रखते हैं कि पानी की तेज धार चिप्स से भरी टोकनी में से होकर गुजरे। लगभग एक सप्ताह के अंदर बैचांदी कंद का जहरीलापन पानी की तेज धार में पूरी तरह से खत्म हो जाता है और लाल कंद का रंग सफेद हो जाता है। कंद का सफेद होना ही इस बात की पहचान है कि कंद में अब जहर नहीं बचा। अब इस कंद को लगभग 15 दिनों तक धूप मे सुखाया जाता है। बेहद पौष्टिक इस कंद की कुछ मात्रा को खाकर बैगा दिन भर कड़ी मेहनत करते हैं। वन विभाग द्वारा संचालित वनौषधीय प्रसंस्करण केंद्र के डॉ एमवाय खोखर का कहना है कि बैचांदी के 50 ग्राम में लगभग तीन हजार कैलोरी होती है।
अधिक मात्रा नुकसानदायक
बैचांदी के प्रोसेस किए हुए चिप्स की थोड़ी मात्रा ही फायदेमंद होती है। अधिक मात्रा में खाने से यह नुकसान कर सकता है क्योंकि इसकी तासीर बेहद गर्म होती है। यदि कंद को बिना प्रोसेङ्क्षसग के खाया जाए तो इंसान की मृत्यु भी हो सकती है। यदि प्रोसेसिंग के दौरान बैचांदी का जहरीलापन पूरी तरह खत्म न हुआ हो तो इसे खाने पर व्यक्ति को नशा आने की भी आशंका बनी रहती है। यही कारण है कि इसे जानकारों की सलाह पर खाना ही उचित होता है।

Mangal Singh Thakur
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