किसानों की तरह मूर्तिकारों को भी दिलाई जाए राहत

आर्थिक संकट झेल रहे मूर्तिकार झेल रहे बेरोजगारी

By: Mangal Singh Thakur

Published: 26 Aug 2020, 07:06 PM IST

मंडला. जिले के मूर्र्तिकार नवरात्र पर्व को लेकर असमंजस्य में है। नवरात्र को एक माह ही शेष है। अब तक मूर्तिकारों को प्रतिमा निर्माण संबंधी कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। गणोशोत्सव में घाटा खा चुके मूर्तिकार आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। ऐसे में चैत्र नवरात्र से उनको काफी उम्मीदें जुड़ी हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए गणेशोत्सव पर प्रशासन द्वारा पूर्व में ही बड़ी प्रमिमाओं का निर्माण न करने की सूचना दे दी गई थी। लेकिन नवरात्र के लिए अब तक कोई जानकारी मूर्तिकारों तक नहीं पहुंची है। कोरोना संक्रमण काल में मूर्तिकारों को प्रशासन की ओर से किसी तरह की आर्थिक मदद नहीं दी गई है। सिंह वाहनी वार्ड, महाराजपुर व अन्य क्षेत्र के मूर्तिकार लक्ष्मीनारायण वंशकार, राकेश चक्रवर्ती, अंकित मनिकपुरी, करूणा रावत, विजय, सुमित, दिलीप, पप्पू, पिंकू यादव, वीरू रावत, अमर रावत, दीपक, मनोज, द्वारका कटारे, प्रवीण आदि मूर्र्तिकारों का कहना है कि मूर्ति निर्माण हमारी फसल की तरह है। चार माह दिन रात मेहनत कर प्रतिमा का निर्माण करते हैं तब जाकर साल भर परिवार का भरण पोषण कर पाते हैं। लेकिन कोरोना संक्रमण काल में मूर्तिकारों कर्ज लेकर परिवार चलाना पड़ रहा है। मूर्र्तिकारों के पास गणेशोत्सव में आधी से अधिक प्रतिमाएं शेष रह गई हैं। जिनसे उनको नुकसान उठाना पड़ा है।
बनी है असमंजस्य की स्थिति
शारदेय नवरात्र में प्रतिमाओं का निर्माण करें या ना करें? मूर्तिकारों में यह असमंजस्व की स्थिति बनी हुई है। सभी मूर्र्तिकारों ने इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा है। जिसमें मांग की गई है कि जिस तरह किसानों को सरकार राहत दे रही है। उसी तरह मुर्तिकारों को भी आर्थिक राहत दी जाए। मूर्तिकार आत्मनिर्भर भारत की ओर बढऩा चाहता है। जिसमें शासन को सहयोग करना चाहिए। शारदेय नवरात्र के लिए बड़ी नहीं, तो कम से कम 3 से 5 फीट की प्रतिमा बनने की अनुमति दी जानी चाहिए। प्रतिमा की अनुमति न मिलने पर मासिक रूप से या एक मुश्त राहत राशि दी जाए ताकि साल भर परिवार का भरण पोषण कर सकें।
पितृपक्ष के बाद अधिमास
पितृपक्ष खत्म होने के एक माह बाद नवरात्र हर साल पितृ पक्ष यानि श्राद्घ समाप्ति के अगले ही दिन से नवरात्रि उत्सव शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार यह पर्व पितृ पक्ष समाप्ति के एक माह बाद शुरू होगा। इस बार 17 सितंबर को पितृ पक्ष खत्म होगा। इसके अगले दिन 18 सितंबर से अधिकमास शुरू हो जाएगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। 17 अक्टूबर से नवरात्रि पर्व शुरू होगा। पंडित नीलू महाराज ने बताया कि इस बार श्राद्घ पक्ष समाप्त होते ही अधिकमास लग जाएगा। ऐसे में नवरात्र व पितृ पक्ष के बीच एक महीने का अंतर आ जाएगा। आश्विन मास में मलमास लगने व एक महीने के अंतर पर नवरात्रारंभ का संयोग 165 साल पहले बना था। चातुर्मास जो हमेशा चार महीने का होता है, इस बार पांच महीने का होगा। ज्योतिषविदों की माने तो 160 साल बाद लीप वर्ष व अधिकमास दोनों ही एक साल में आए हैं।

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