सीवर लाइन प्रोजेक्ट को दुबारा मिली स्वीकृति
नर्मदा को स्वच्छ करने राजी हुआ जर्मनी

मंडला. नर्मदा नदी को पूर्णत: स्वच्छ करने के लिए शुरू गई महत्वाकांक्षी योजना को बीच में ही बंद कर दिया गया था क्योंकि उसके मापदंडों की अवहेलना की गई थी। वही योजना एक बार फिर से शुरू होने जा रही है। इस योजना के तहत नर्मदा में आकर मिलने वाले नगर के 16 गंदे नालों के मार्ग परिवर्तन के लिए निर्माण कार्य शुरु किया गया जाएगा। जर्मनी देश का केएफडब्ल्यू बैंक इस योजना में व्यय होने वाली राशि का 70 प्रतिशत निवेश करने के लिए राजी हो गया है। तय मापदंडों पर खरा नहीं उतरने के कारण बैंक ने आधे प्रोजेक्ट पर ही निवेश करने से हाथ रोक लिए थे।
33 करोड़ की योजना
स्थानीय नगरपालिका क्षेत्र के 24 वार्डों के रिहायशी क्षेत्र की सभी नालियां 16 नालों के जरिए नर्मदा नदी में मिलती हैं। दशकों पर दशक गुजर गए, तीनों ओर से नगर को घेरते हुए प्रवाहित होने वाली नर्मदा दिनों दिन प्रदूषित होती रही और हालात इतने बदतर हो गए हैं कि नर्मदा के वे सभी 16 घाट जहां आकर नाले मिलते थे। उनमें दिन भर बदबू और सड़ांध छाई रहती है। नर्मदा को स्वच्छ करने के लिए उक्त सभी 16 नालों को बंद करने के लिए वृहद सीवर लाइन के निर्माण को नगरपालिका परिषद ने स्वीकृति दी। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 33 करोड़ रुपए की राशि व्यय होने हैं जिसमें 70 प्रतिशत वित्तीय सहायता जर्मनी देश का केएफडब्ल्यू बैंक द्वारा दिया जाना तय था।
वर्ष 2018-19 में बैंक प्रतिनिधियों की टीम ने सीवर लाइन के निर्माण और उसके लिए निर्धारित किए गए मापदंडों की जांच पड़ताल की तो गड़बड़ी मिलने पर उक्त प्रोजेक्ट के लिए दी जाने वाली राशि पर रोक लगा दी। हाल ही में इस प्रोजेक्ट को पुन: स्वीकृति दी गई है। इसके लिए आवश्यक सर्वे कार्य भी अभी अभी पूर्ण हुआ है। बताया गया है कि शीघ्र ही प्रोजेक्ट पर दोबारा काम शुरू होगा।
गंदे पानी का शुद्धिकरण
नगर के सभी गंदे नालों को एक सीवर लाइन से जोड़ा जाना है। यह सीवर लाइन इंटेक वेल के पास बन रहे विशाल सोकपिट में आकर खुलेगी। इस सोकपिट में पानी का शुद्धिकरण किया जाएगा और उसके बाद उसे नर्मदा में प्रवाहित किया जाएगा। स्वामी सीताराम वार्ड स्थित इंटेक वेल के पास बन रहा सोक पिट एवं शुद्धिकरण संयंत्र निर्माणाधीन अवस्था में है। इसके लिए नर्मदा के घाट पर विशाल टंकी और विशाल कांक्रीट दीवार का निर्माण कराया जा रहा है। उच्च तकनीक से बन रहे इस पिट में अभी भी और काम होना बाकी है। गौरतलब है कि इस सीवर लाइन प्रोजेक्ट में 70 प्रतिशत वित्तीय सहायता जर्मनी और शेष 30 प्रतिशत वित्तीय अनुदान राज्य शासन द्वारा दिया जाएगा।
बंद हो गया नकटा नाला
नगर का सबसे बड़ा नाला, नकटा नाला आजाद वार्ड स्थित घाट में आकर मिलता था। लगभग 20 फिट गहरे और 50 फिट से अधिक चौड़े नाले में शहर की सैकड़ों नालियां आकर मिलती थीं। इस नाले को बंद कर दिया गया है। इसके लिए कई टन मिट्टी, कई ट्रक मुरम, मलबा आदि से भराव किया गया है। नगरपालिका द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, लगभग 2.50-3.00 लाख रुपए सिर्फ इस नाले के भराव में खर्च किए गए। इसके बाद घाट पर विशाल कांक्रीट वॉल का निर्माण कराया गया।
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