यहां 6.5 लाख की निशुल्क सर्जरी को दिखा रहे ठेंगा

यहां 6.5 लाख की निशुल्क सर्जरी को दिखा रहे ठेंगा
Showing free surgery of 6.5 lakhs here

Mangal Singh Thakur | Updated: 12 Oct 2019, 05:44:43 PM (IST) Mandla, Mandla, Madhya Pradesh, India

कॉक्लियर इम्पलांट की सर्जरी में दिव्यांगों को नहीं रुचि

विख्यात मंडल
मंडला. प्रत्येक के लिए 6.5 लाख रुपए की नि:शुल्क सर्जरी और इलाज के बावजूद यदि हितग्राही अपने मासूम और दिव्यांग बच्चों के इलाज के लिए जागरुकता और इच्छा शक्ति जाहिर न करें तो इसे आदिवासी अंचल के उन दिव्यांग बच्चों के लिए विकट और विडंबनापूर्ण स्थिति ही कही जाएगी। जी हां, यह वास्तविकता है जिले के उन 15 दिव्यांग बच्चों की, जो न ही सुन सकते हैं और न ही बोल सकते हैं। उनकी दिव्यांगता को दूर करने के लिए शासन के आरबीएसके-राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का लाभ दिलाने के लिए उन्हें चयनित किया गया और उन सभी बच्चों के सिर के अंदर सर्जरी के जरिए कॉक्लीयर इम्प्लांट किया गया। ताकि बच्चे सुन सकें और उसके जरिए उनमें बोलने की क्षमता का विकास हो सके। लेकिन अब इस इम्प्लांट पर आशंका के बादल मंडराने लगे हैं क्योंकि बच्चों के इलाज के फॉलोअप के लिए माता-पिता अस्पताल तक आने -जाने का खर्च वहन करने में भी रुचि नहीं ले रहे। जबकि बच्चों का इलाज, दवाइयां, माता-पिता-दिव्यांग बच्चे का रहना-भोजन सभी नि:शुल्क है।
नायाब है कॉक्लीयर
जिला अस्पताल स्थित आरबीएसके के ऑडियोलॉजिस्ट वीरेंद्र पाटिल का कहना है कि कॉक्लीयर उपकरण अपने आप में नायाब है। इसका एक हिस्सा दिव्यांग बच्चे के सिर के अंदर सर्जरी के जरिए फिट किया जाता है और एक हिस्सा सिर के बाहर कान में लगा होता है। सिर के अंदर लगे उपकरण के हिस्से को रिसीवर और उपकरण के बाहर के हिस्से को एडॉप्टर कहते हैं। एडॉप्टर आवाज को ग्रहण कर रिसीवर तक भेजता है और बच्चे को सुनाई पडऩे लगता है। कॉक्लीयर इम्प्लांट की सर्जरी में कुल 5.20 लाख रुपए का खर्च आता है और बच्चे की उपचार, फॉलोअप आदि में 1.30 लाख रुपए का खर्च होता है। इसतरह पूर्ण इलाज में 6.50 लाख रुपए खर्च होते हैं। कॉक्लीयर इम्प्लांट के बाद जब बच्चे को सुनाई पडऩे लगता है तो उसमें प्राकृतिक रूप से बोलने की क्षमता का विकास भी होने लगता है। वे बच्चे जो सुन नहीं पाते वे अक्सर बोलने में भी अक्षम होते हैं।
पहली बार सब नि:शुल्क
ऑडियोलॉजिस्ट वीरेंद्र ने बताया कि जब बच्चे को सर्जरी के लिए चयनित किया जाता है तो पहली बार बच्चे और अभिभावक के आने-जाने-रहने-भोजन और बच्चे के सभी उपचार एवं सर्जरी नि:शुल्क होते हैं। बच्चे को सर्जरी के बाद एक वर्ष तक प्रति माह लगातार उपचार और जांच के फॉलोअप के लिए संबंधित शहर में लाना- ले जाना होता है। दूसरी बार से सिर्फ आने-जाने के लिए माता-पिता को खर्च वहन करना होता है। रहना-भोजन, बच्चे का उपचार दवा सभी नि:शुल्क होते हैं। लेकिन जिले के पीडि़त बच्चों के माता पिता नियमित फॉलोअप के लिए बच्चे को ले जाने के लिए रुचि नहीं ले रहे। जिले में अब तक 15 बच्चों में सर्जरी के जरिए कॉक्लीयर इम्प्लांट किया जा चुका है।

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