1996 में ढह गया था कांग्रेस का मजबूत गढ़, अब फिर पांव जमाने की जुगत में हाथ

बीजेपी का वर्चस्व कायम

By: amaresh singh

Published: 04 Apr 2019, 12:40 PM IST

मंडला। संसदीय क्षेत्र क्रमांक 14 की लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित है। आज से लगभग 23 वर्षों पहले यह सीट कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी। लेकिन वर्ष 1996 से इस सीट पर भाजपा का ही वर्चस्व कायम रहा है, यदि 2009 के चुनाव को छोड़ दें तो पिछले कुछ चुनावों से यह सीट बीजेपी के ही कब्जे में रही है। बीजेपी को जितनी बार भी इस सीट पर जीत मिली वो पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के कारण ही मिली है। पार्टी ने इस बार भी प्रत्याशी के रूप में कुलस्ते के नाम पर मुहर लगा दी है। कुलस्ते यहां से पांच बार सांसद रह चुके हैं। पिछली बार के चुनावी वर्ष 2014 में उन्होंने कांग्रेस के ओमकार सिंह को हराया था। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, इस बार कांग्रेस मंडला लोकसभा सीट को बेहद गंभीरता से ले रही है और जिस प्रत्याशी को भी टिकट दिया जाना है उसे हर कसौटी पर परखा जा रहा है ताकि भाजपा का गढ़ बन चुके मंडला संसदीय क्षेत्र में सेंध लगाई जा सके। यही कारण है कि कांग्रेस ने क्षेत्र से अपने प्रत्याशी की घोषणा अब तक नहीं की है।


ये है क्षेत्र की राजनीतिक पृष्ठभूमि
मंडला लोकसभा सीट पर साल 1957 में पहली बार चुनाव हुआ। कांग्रेस के मंगरुबाबू उईके ने यहां पर जीत हासिल की थी। इसके बाद से मंगरू यहां पर 1962, 1967 और 1971 के चुनाव में भी जीत हासिल कर संसद तक पहुंचे। 1977 के चुनाव में उनको हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस के हाथ से यह सीट चली गई। भारतीय लोकदल पहली बार इस सीट पर जीतने में कामयाब रही। 1980 के चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर इस सीट पर वापसी की और 1991 तक लगातार यहां पर जीत हासिल की। इसके बाद 1996 से 2004 तक यहां सीट भाजपा के हिस्से में जाती रही। हालांकि 2009 के चुनाव में भाजपा के फग्गन सिंंह को हार का सामना करना पड़ाण् लेकिन एक चुनाव हारने के बाद 2014 में उन्होंने एक बार फिर वापसी की और यहां से एक बार फिर सांसद बने। इसके बावजूद यदि तुलनात्मक समीक्षा की जाए तो 1957 से 2014 के बीच कांग्रेस को इस सीट पर सबसे ज्यादा 9 चुनावों में जीत मिली है। मंडला लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं- शाहपुरा, निवास, लखनादौन, डिंडोरी, मंडला, गोटेगांव, बिछिया, केवलारी यहां की विधानसभा सीटें हैं।
1951- मंगरूबाबू उइके, कांग्रेस से जीते, वोट मिले 181123, निकटतम प्रतिद्वंदी सवाईमल ओसवाल, सोशलिष्ट पार्टी, वोट मिले 52073 (तब मंडला जबलपुर साउथ सीट थी)
1957- मंगरूबाबू उइके, पार्टी कांग्रेस, निर्विरोध जीते
1962- मंगरूबाबू उइके, पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस, वोट मिले 47789, निकटतम प्रतिद्वंद्वी गंगाराम, पार्टी आरआरपी, वोट मिले 26962
1967- मंगरूबाबू उइके, पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस, वोट मिले 67390, निकटतम प्रतिद्वंद्वी धोकलसिंग, पार्टी पीएसपी, वोट मिले 33569
1971- मंगरूबाबू उइके, पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस, वोट मिले 54021, निकटतम प्रतिद्वंद्वी श्यामलाल, पार्टी बीजेएस, वोट मिले 43118
1977- श्यामलाल धुर्वे, पार्टी बीएलडी, वोट मिले 126646, निकटतम प्रतिद्वंद्वी मंगरूबाबू उइके, पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस, वोट मिले 3847
1980- छोटेलाल उइके, पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस, वोट मिले 91524, निकटतम प्रतिद्वंद्वी श्यामलाल धुर्वे, पार्टी जेएनपी, वोट मिले 75536
1984- मोहन लाल, पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस, वोट मिले 198095, निकटतम प्रतिद्वंद्वी श्यामलाल धुर्वे, पार्टी बीजेपी, वोट मिले 69787
1991- मोहन लाल, पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस, वोट मिले 165607, निकटतम प्रतिद्वंद्वी राम भजन, पार्टी बीजेपी, वोट मिले 77934
1996- फग्गनसिंह कुलस्ते, पार्टी बीजेपी, वोट मिले 246334, निकटतम प्रतिद्वंद्वी मोहन लाल, पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस, वोट मिले 181714
1998- फग्गनसिंह कुलस्ते, पार्टी बीजेपी, वोट मिले 268739, निकटतम प्रतिद्वंद्वी छोटे लाल उइके, पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस, वोट मिले 255227
1999- फग्गनसिंह कुलस्ते, पार्टी बीजेपी, वोट मिले 232042, निकटतम प्रतिद्वंद्वी देवेंद्र टेकाम, पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस, वोट मिले 225470
2004- फग्गनसिंह कुलस्ते, पार्टी बीजेपी, वोट मिले 238073, निकटतम प्रतिद्वंद्वी हीरा सिंह मरकाम गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, वोट मिले 173176
2009- बसोरी सिंह मसराम, पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस, वोट मिले 391133, निकटतम प्रतिद्वंद्वी फग्गनसिंह कुलस्ते, पार्टी बीजेपी, वोट मिले 326080
2014- फग्गनसिंह कुलस्ते, पार्टी बीजेपी, निकटतम प्रतिद्वंद्वी ओंमकार सिंह मरकाम

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