संत ने खड़े होकर की थी शिवजी की आराधना

सावन माह में अस्था का केन्द्र बना नैनपुर का खड़ेश्वरी मंदिर

By: Mangal Singh Thakur

Published: 21 Aug 2021, 05:36 PM IST

राजेन्द्र ठाकुर
नैनपुर. नगर के वार्ड क्रमांक 4 के मुख्य द्वार में स्थित भगवान शिवजी का मंदिर सावन माह में आस्था का केन्द्र बना हुआ है। यहां करीब 150 से भी अधिक वर्ष प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। जहां प्रतिदिन नगर वासी पूजा अर्चना करने पहुंच रहे हैं। लोंगो की मान्यता है कि यहां शिवलिंग की स्थापना के बाद संत ने खड़े होकर तपस्या की थी। इस कारण शिव मंदिर की पहचान खड़ेश्वरी मंदिर से होने लगी। वहीं शिवलिंग को लेकर भी लोंगो की अलग मान्यता है कहा जाता है कि यहां के शिवलिंग कुंआ में खुदाई के दौरान प्राप्त हुए हैं। वार्ड के बुजुर्ग रामकिशोर अवधवाल, आरआर नाग ने बताया कि लगभग 150 वर्ष पूर्व यहां ख्याली महाराज एक कुटिया में रहा करते थे। आध्यात्मिक होने के कारण उनकी कुटिया में अक्सर संतो का आना जाना लगा रहता था। इसी दौरान एक संत वहां पहुंचे जिन्हे क्षेत्र में पानी की समस्या ने विचलित कर दिया। पानी की समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने अपने पास रखे चमीटे से कुंए की खुदाई शुरू कर दी। खुदाई के दौरान एक शिवलिंग निकाला जिसे मंदिर में स्थापित कर दिया। इसके बाद उन्हीं संत ने चैत्र-वैशाख के माह में खड़े रहकर भगवान भोले नाथ की आरधना की थी। जिसके बाद भगवान भोलेनाथ के प्रति लोंगो की आस्था बढ़ी और यहां शिव मंदिर का निर्माण कर दिया।


35 साल पहले कराया जीर्णोद्वार
लोगों का कहना है कि यह स्थान मान्यता पूरी करने वाला है। यहां स्थापित शिवलिंग अति प्राचीन एवं दिव्य है। सावन मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने आते हैं। यहां वर्षभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। यहां तक की जन्माष्टमी का पर्व भी धूमधाम से मनाया जाता है। महाशिवरात्रि महापर्व पर नगर के दर्जनों भक्त 50 किलोमीटर पैदल यात्रा कर त्रिवेणी संगम महाराजपुर से कांवड़ में जल लाकर इसी खड़ेश्वरी मंदिर में स्थापित भगवान भोलेनाथ का नर्मदा जल से अभिषेक करते हैं। पुराने मंदिर के छोटे रूप होने व जीर्णर्शीण हो जाने के बाद जनसहयोग से मंदिर का जीर्णोद्वार कराया गया। यह कार्य 1986 में कराया गया। जिसमें दानदाताओं ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था।

इन्होंने बताया
मेरे पिताजी तुलाराम अवधवाल ने बताया था वर्षों पूर्व साधु संतों का आगमन मंदिर में हुआ था, संत ने खड़े होकर मंदिर में तपस्या की थी। तब से शिव मंदिर का नाम खडेश्वरी मंदिर पड़ा है। इसके बाद से आस्था का केन्द्र बन हुआ। यहां लोग मन्नत मांगते हैं ओर मनोकामना पूर्ण होने पर पूजा अर्जना कराते हैं।
राम किशोर अवधवाल, वार्ड क्रमांक 3 नैनपुर


मेरे ससुर टीकाराम डोंगरे ने बताया था कि एक कुटी में ख्याली नामक महाराज रहते थे। जहां कोई बाबा पहुंचे थे। पानी की कमी देखते हुए बाबा ने चमीटे से कुंआ खोदा था जो आज भी है। कुंए से निकले शिला को भोलेनाथ की पिंडी के नाम से स्थापित किया गया।
आरआर नाग, वार्ड क्रमांक 4 निवासी नैनपुर

Mangal Singh Thakur
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