कोर के साथ सैलानियों ने की बफर जोन में सफारी

दिसंबर में बफर जोन में पहुंचे रिकार्ड सैलानी, बफर जोन का आकर्षण खींच रहा सैलानियों को

By: Mangal Singh Thakur

Published: 03 Jan 2020, 08:26 PM IST

मंडला. विश्व प्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क में नए वर्ष के अभिवादन की होड़ सैलानियों में ऐसी लगी कि जब उन्हें कोर जोन में एंट्री टिकट नहीं मिली तो उन्होंने बफर जोन के लिए कान्हा पार्क में एंट्री की। वर्ष 2019 की विदाई के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व का के्रज सैलानियो में इतना अधिक रहा कि रिकार्ड तोड़ एंट्री हुई। कान्हा प्रबंधन के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2019 में कान्हा पार्क के बफर जोन में जितने सैलानियों की एंट्री हुई उतनी उसके पहले दो महीनों में भी तुलनात्मक रूप से नहीं हो सकी। जानकारों का कहना है कि आज की जिंदगी की भागदौड़ से मुक्ति और तनाव से बचने के लिए प्रकृति के करीब जाना सर्वाधिक असरदायक होता है। यही कारण है कि इस बार सैलानियों ने अपनी रुचि में भी बदलाव किया और कान्हा पार्क के कोर जोन के साथ साथ बफर जोन को भी अपने विकल्प में शामिल किया। यही कारण है कि दिसंबर 2019 में लगभग 5 हजार सैलानियों ने बफर जोन में सफारी का आनंद लिया।
तीन सप्ताह पहले ही एंट्री फुल
नए वर्ष 2020 के स्वागत और पुराने वर्ष 2019 की विदाई के लिए कान्हा पार्क में सैलानियों ने दो-दो महीने पहले ही ऑनलाइन बुकिंग करा ली। यही कारण है कि लगभग तीन सप्ताह पूर्व कान्हा पार्क में एंट्री की सभी टिकटें बुक हो चुकी थी। ऐसे में सैलानियों ने कोर जोन के बजाय बफर जोन में एंट्री के लिए टिकट बुक कराई और हजारों की तादाद में पहुंचकर सफारी का आनंद लिया।
बफर में नहीं टाइगर मूवमेंट
कान्हा प्रबंधन का कहना है कि कुछ वर्ष पहले तक बफर जोन का इतना के्रज नहीं था क्योंकि कान्हा आने वाले प्रत्येक सैलानी की एक ही ख्वाहिश होती है कि वह बाघ दर्शन करे। बाघ का मूवमेंट कोर जोन में ही होता है, बफर में नहीं। इसीलिए पार्क में आने वाले ज्यादातर सैलानी कोर जोन की टिकट बुकिंग पर ही कान्हा पार्क की ओर रुख करते थे। पिछले दो वर्षों से कान्हा पार्क पहुंचने वाले सैलानियों के विकल्प में बदलाव आए हैं। दरअसल बाघ दर्शन की आवृति दिनों दिन कम होती जा रही है। बदलते दौर के साथ अब टूरिज्म का टे्रेंड भी बदल चुका है। सैलानी कोर जोन के साथ साथ बफर की सफारी में भी रुचि ले रहे हैं। जंगल का घनापन जितना कोर में है उतना बफर में भी है। इसलिए नई जनरेशन के सैलानी बाघ के बजाय जंगल सफारी में अधिक रुचि ले रहे हैं। इसकारण बफर जोन के सैलानियों का आंकड़ा इस वर्ष अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है। बफर जोन की सफारी में सिर्फ भारतीय सैलानी ही नहीं अब विदेशी सैलानी भी रुचि ले रहे हैं।
बफर-कोर में फर्क
अन्य बाघ अभ्यारण्यों की तरह कान्हा नेशनल पार्क भी कोर-बफर जोन में विभाजित है। कोर जोन पार्क का केंद्रीय वन क्षेत्र है यहां वन्य प्राणी अधिक सुरक्षित हैं और यह जोन चारों ओर से बफर जोन से घिरा हुआ है। बफर जोन कोर जोन और बाहरी क्षेत्रों के साथ अपनी सीमाएं साझा करता है। यह कोर जोन को कुशङ्क्षनग इफेक्ट देता है। बफर जोन में एंट्री के लिए तीन प्रवेश द्वार हैं- खटिया गेट, मुक्की गेट, सरही गेट।
बफर मे एंट्री
अक्टूबर 2019- 2602 (देशी), 71 (विदेशी)
नवंबर 2019- 2617(देशी), 66 (विदेशी)
दिसंबर 2019- 4785(देशी), 39 (विदेशी)

Mangal Singh Thakur
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