हजारों बेरोजगार स्ट्रीट वेंडर योजना से वंचित

जानकारी के अभाव में नहीं कर रहे आवेदन

By: Mangal Singh Thakur

Published: 15 Sep 2020, 12:21 PM IST

मंडला. कोरोना महामारी में बेरोजगार हो चुके रेहड़ी-ठेला-पटरी लगाने वालों के लिए पीएम स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना शुरू की गई है। लेकिन शुरूआती चरण में ही इस योजना का लाभ दिलाने के लिए जिले के जरूरतमंद लोगों तक जानकारी नहीं पहुुंचाई गई। बेहद सीमित प्रचार-प्रसार के कारण योजना के बारे में जिन्हें पता चला, उन्हें भी आधी-अधूरी जानकारी देकर रवाना किया गया। नतीजा यह हुआ कि जिले में यह योजना प्रभावी तरीके से कारगर नहीं हो रही है और आज भी रेहड़ी-ठेला-पटरी पर दुकान लगाने वाले दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे हैं। जिला शहरी विकास अभिकरण के आंकड़े बता रहे हैं कि जानकारी के अभाव के कारण जिले भर से अब तक मात्र 3455 लोगों ने ही आवेदन किया जबकि बेरोजगारों की संख्या उक्त आंकड़े सेे कई गुना अधिक है। इनमें से मात्र 1605 बेरोजगारों ने ही बैंक को ऋण देने के लिए आवेदन दिया है। अधिकांश का कहना है कि उन्हें पता ही नहीं, कि बैंक से ऋण लेने के लिए उन्हें आवेदन देना होगा। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में इस योजना का प्रचार-प्रसार किस स्तर से किया गया है?
कई रुकावटें हैं योजना में
पंजीयन के लिए शुरुआत में आधार नंबर अनिवार्य किया गया था लेकिन जैसे ही कोई हितग्राही अपना आवेदन संबंधित पोर्टल पर अपलोड करता तो उसे ओटीपी नंबर ही नहीं मिलता क्योंकि बहुत से हितग्राहियों ने आधार नंबर से अटैच अपना मोबाइल नंबर बदल दिया था। बाद में शासन ने योजना के तहत पंजीयन के लिए बायोमीट्रिक मशीन के उपयोग को लागू कर दिया। लेकिन बताया जा रहा है कि यह सिस्टम भी कई स्थानों पर सफल नहीं हो पाया है। इसके चलते योजना के क्रियान्वयन में कुछ व्यवधान आ रहे हैं। इसके अलावा दूसरा बड़ा कारण ये भी है कि अधिकांश वेंडर ने योजना के तहत पंजीयन तो करा लिया लेकिन वे बैंक से ऋण मांगने अलग से आवेदन नहीं कर रहे। चूंकि आवेदन नहीं हो रहे इसलिए ऋण मंजूरी और वितरण के प्रकरण, पंजीयन के मुकाबले बहुत कम हैं।
12 महीने का ऋण
इस योजना के अंतर्गत लाभार्थी को 10 हजार रूपये की ऋण राशि 12 महीने अवधि के लिए दी जाती है जिसकी मासिक किस्त लगभग 900-950 रूपये के बीच होती है। इस योजना में समय पर किस्त भरने वाले लाभार्थियों को सरकार के द्वारा ब्याज की सहायता राशि दी जाएगी जिसमें ब्याज अनुदान एवं कैशबैक इंसेंटिव की राशि शामिल है। लाभार्थी द्वारा समय पर किस्त चुकाने के बाद उन्हें पुन: 20 हजार रूपये की ऋण राशि दी जा सकेगी। डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए सभी लाभार्थियों को अनिवार्य रूप से क्यूआर कोड वितरित किए जाएंगे जिस पर ट्रांजैक्शन करने के बाद उन्हें कैशबैक का लाभ भी मिलेगा। साथ ही रुपयों के भौतिक लेनदेन से छुटकारे के साथ-साथ कोरोना संक्रमण का जोखिम भी कम होगा।
ऐसे करे आवेदन
स्ट्रीट विक्रेता को आत्मनिर्भर स्वनिधि योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन या प्रारंभिक कार्यशील पूंजी ऋण प्राप्त करने के लिए बैंकों में ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, लोग बीटा वर्जन पोर्टल पर स्ट्रीट वेंडर सर्वे सर्च करके भी इस योजना के लाभार्थियों की सूची में अपना नाम देख सकते हैं। इस पोर्टल पर ऋणदाता की सूची भी मौजूद रहती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि सब्जी विक्रेता, फल विक्रेता जैसे दैनिक मजदूरी कमाने वाले अपनी आजीविका कमाते हैं। उन्हें 10 हजार रुपये की ये अल्पकालिक सहायता अपने काम को फिर से शुरू करने में सक्षम बनाएगी। इनमें से अधिकांश वे लोग हैं जो कोविड-19 के चलते हुए लॉकडाउन में बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं।
फैक्ट फाइल:
3455- कुल पंजीकृत आवेदक
2656- स्वीकृत आवेदन
1605- ऋण के आवेदक
1223 - आवेदकों के ऋण स्वीकृत

Mangal Singh Thakur
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