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चल समारोह के साथ ज्वारे विसर्जन

नवरात्र के अंतिम दिन कन्या भोज व भंडारा ग्रहण करने पहुंचे श्रद्धालु

मंडला

Published: April 11, 2022 07:42:50 pm

मंडला. जिले में चैत्र के अंतिम दिन पूजन-पाठ करते हुए जवारे विसर्जन किया गया। जोत ज्वारा विसर्जन में सडक़ों पर भक्ति उल्लास छाया रहा। नंगे पैर महिलाएं, सिर पर कलश धारण माता की भक्ति में लीन दिखी। ग्रामीण अंचलों में दिन में ही माता के जवारे निकाले गए। धूप की तपन से बचाने के लिए सेवादार सडक़ों पर पानी का छिडक़ाव करते चल रहे थे। श्रृद्धालुओं की आस्था देखकर कई घर के सामने लोग घरों से पाइप के जरिये सडक़ पर पानी डालकर ठंडक पहुंचाने का प्रयास कर रहे थे।
शहर में जेल ग्राउंड परिसर में स्थित शीतला माई माता का मंदिर में चैत्र नवरात्र के अवसर पर विभिन धार्मिक अनुष्ठान किए गए। जिनके समापन पर कन्याभोज व भंडारा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया। जानकारी के अनुसार मंदिर समिति के अध्यक्ष किशनलाल शर्मा ने बताया कि हर, वर्ष की तरह यहां सैकड़ों की संख्या में जवारे बोए गए थे। जिनका विसर्जन धूमधाम के साथ किया गया। शीतला माता मंदिर से जेल घाट तक चल समारोह निकाला गया। पूजन आरती के बाद मां नर्मदा के जल में विसर्जन किया गया।
इसी तरह मवई विकास खंड के छपरतला में रविवार की दोपहर श्रद्धालुओं ने जवारे विसर्जन के लिए चल समारोह निकाला। छपरतला स्थित खैरमाई मंदिर में जवारे की स्थापना की गई थी। जहां नौ दिन श्रद्धालुओं ने माता की सेवा की। अंतिम दिन कन्या भोज व भंडारा का वितरण किया गया। इसके बाद चल समारोह के साथ श्रद्धालुओं ने जवारे का विसर्जन किया।
शहर में गाजे बाजे के साथ निकाले जवारे
शहर के विभिन्न इलाकों में ज्वारा का गाजे-बाजे के साथ विसर्जन किया। सिर पर जवारा से सजे कलश लेकर महिलाएं नदी घाटों तक गई, जबकि युवा-बुजुर्ग देवी मां की जयकार लगाते हुए चल रहे थे। चैत्र नवरात्रि के नवमीं तिथि के साथ शाम से ही जवारे विसर्जन का दौर शुरू हो गया। अधिकतर देवी मंदिरों में विसर्जन कार्यक्रम देर रात तक किया गया। मंदिरों में ज्वारे कलश स्थापित किए गए थे। जिन्हें नर्मदा नदी अथवा स्थानीय नदी, तालाब अथवा जल स्त्रोंतों में विसॢजत किया गया। इससे पहले उनका विधि-विधान से पूजन अर्चन किया गया। खैरमाई मंदिर बिंझिंया, शीतला मंदिर जेलग्राउंड सहित शहर के अन्य मंदिरों में भंडारा, यज्ञ सहित विविध धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। सभी कार्यक्रमों में माता के भक्तों का उत्साह चरम पर रहा। अंतिम दिन धूमधाम से माता के मंदिरों व मढिय़ों में स्थापित ज्वारों का विसर्जन किया गया। खैैरमाई मंदिर बिंङ्क्षझया में लगभग 237 कलश, खप्पर व शीतला बोए गए थे। रविवार की रात जवारे का विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। भाव में खेलते अनेक लोग मां की भक्ति में लीन हो जवारों के साथ-साथ चलते दिखाई दिए। विसर्जन के समय नर्मदा घाट में भक्तों की भारी भीड़ रही। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन घाटो में मुस्तैद रहा। नगर के हर तबके के लोग अपना सारा काम छोड़ ज्वारों को देखने के लिए घंटों पहले ही खड़े होकर जवारों का इंतजार करते रहे।
बकौरी. नगर के बीच पहाड़ी पर स्थित नक्खी माता के दरबार में रविवार को नवमीं पूजा और हवन में शामिल होने के लिए आसपास के गावों से भी भक्तों का हुजूम इक_ा हुआ। दोपहर को कन्या भोज के बाद जनता के लिए भंडारे की शुरुआत की गई। दरबार में कलश, खप्पर, टोकनियों में जवारे बोए गए थे। विसर्जन के लिए शाम को महिलाएं स्थानीय तालाब की ओर रवाना हुई। इस दौरान आसपास का पूरा वातावरण माता के जयकारों से गूंजता रहा और लोग झूमते रहे।
भुआबिछिया. नगर के दोनों खैरमाई भुआ एवं बिछिया में स्थापित ज्वारे का भक्ति भाव के साथ विसर्जन हुआ। दोपहर को चल समारोह के साथ जवारे कलश निकाले गए शाम को विसर्जन किया गया। इसी कड़ी में शिव पंडा की मडिय़ा में नगर एवं आसपास के ग्रामों के भक्तों द्वारा सैकड़ो की तादाद में कलश एवं ज्वारों की स्थापना की जाती है उनका भी भंडारा एवं कन्या भोजन के बाद विसर्जन किया गया। विसर्जन के समय बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों व घरों में स्थापित ज्वारे का विसर्जन आज भी किया जाएगा। नवमी को सिद्धदात्री की पूजा नगर के मंदिर देवालयों में श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा पूर्वक की गई। कन्या भोज एवं विशाल भंडरा का आयोजन किया गया। वहीं राममंदिर में सभी देवताओं को नए वस्त्र आभूषण पहना गया। सुबह से शाम तक पूजन पाठ हवन पूजा का दौर चलता रहा। सभी मंदिरों में साज सज्जा लाइट आदि से सजाया गया।
भाईबहिननाला. मां शेरावली माता दरबार मोतीनाला में रविवार को हवन, भोजन, भंडारा, पूजन हुआ, जिसमें विधिवत पूजा अर्चना की गई। मां शेरावाली माता दरबार में भी कलश जल रही थी। चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर बिसौरा खेरमाई मंदिर में सार्वजनिक रूप से जवारे बोये गए थे। नौ दिनों तक सुबह शाम आरती पूजन की गई पंडा बाबा के द्वारा जल सींचा गया। रविवार को बाजे गाजे के साथ ग्राम में भ्रमण कराते हुए तालाब में विसर्जन किया गया। जिसमें सभी ग्रामवासी उपस्थित रहे। खैरमाई देवरी कला के जवारे किये विसर्जन।
बबलिया. स्थानीय देवरी कला बबलिया में खैरमाई माता मंदिर में जवारे बोये गए। जहां पर निरंतर सुबह शाम आरती वंदन के साथ ही सभी महिला पुुरूषों के द्वारा सुबह सेे ही जल चढ़ानें वालों का तांता लगा रहता था। साथ ही रामनवमी के दिन रविवार को जवारे विसर्जन किए गए। जिसमें ग्राम के सभी माता बहने युवा वृद्ध जन सभी नें धर्म लाभ लेनेे के लिए भक्तिमय माहौल के साथ विसर्जन किया गया।
देर रात्रि तक चला ज्वारे विर्सजन
नैनपुर. चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर माता दुर्गा देवी के भिन्न भिन्न स्वरूपों की पूजा आराधना कर भक्त जनों के द्वारा उपासना की जाती रही। महापर्व चैत्र नवरात्रा का समापन भक्ति भाव पूर्वक 10 अप्रैल को सभी माता मंदिरों में हवन कर पूर्णाहुति अर्पण की गई तथा कन्या भोजन भंडारा का आयोजन कर नवरात्र पर्व का समापन किया गया। चैत्र नवरात्र में माता जगत जननी आदि शक्ति भवानी की दुर्गाष्टमी पर विशेष पूजा के दिवस पर माताओं बहनों के द्वारा पूजा आराधना की गई। बड़ी खैरमाई मंदिर वार्ड क्रमांक 15, छोटी खैरमाई मंदिर वार्ड कमांक 14, शारदा मंदिर वार्ड क्रमांक एक, काली मंदिर वार्ड क्रमांक 09, दुर्गा मंदिर वार्ड कमाक 05 सहित अन्य माता मंदिरों में माता रानी का श्रंगार कर श्रद्धा पूर्वक व्यजनों का भोग अर्पण कर माता सिद्धिदात्री देवी जी के चरणों में आराधना पूजा आरती कर प्रसाद वितरण किया गया।

चल समारोह के साथ ज्वारे विसर्जन
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