scriptTime will not be there for sisters | बहनो के लिए नहीं रहेगा समय का बंधन | Patrika News

बहनो के लिए नहीं रहेगा समय का बंधन

भद्राकाल के साया से मुक्त रक्षाबंधन, बहने पूरे दिन बांध सकेंगी राखी

मंडला

Published: August 22, 2021 09:52:58 am

मंडला. भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक त्योहार रक्षाबंधन आज धूमधाम से मनाया जाएगा। जिसको लेकर एक सप्ताह से बाजार में चहल पहल बढ़ गई है। बहने अपने भाई के लिए राखी रूमाल व अन्य सामग्री की खरीदी करती नजर आई। वहीं भाई अपने बहनों के लिए कपड़े व अन्य उपहार की खरीदी की। इस बार भाई बहिनों के लिए अच्छी खबर है। इस बार पर्व पर भद्राकाल न होने की वजह से पूरे दिन किसी भी समय राखी बांधी जा सकती है। अच्छे मुहूर्त अथवा भद्रारहित काल में भाई की कलाई में राखी बांधने से भाई को कार्य सिद्धि और विजय प्राप्त होती है। रक्षाबंधन पर्व पर इस बार भद्राकाल नहीं रहेगा। बहनें भाई की कलाई पर सुबह पांच बजकर 30 मिनट से लेकर शाम छह बजे तक किसी भी समय राखी बांध सकती हैं। वहीं भद्राकाल 23 अगस्त को सुबह पांच बजकर 34 मिनट से छह बजकर 12 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष के अनुसार इस बार वर्षों बाद रक्षाबंधन पर शुभ संयोग बन रहा है। इस बार शोभन योग रहेगा। ये योग मांगलिक कार्यों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इसके साथ ही इस दिन घनिष्ठा योग रहेगा। ज्योतिषों के अनुसार घनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। इस नक्षत्र में जन्मे लोगों का अपने भाईबहन के प्रति विशेष प्रेम होता है। इस दिन चंद्रमा मंगल के नक्षत्र और कुंभ राशि में गोचर करेंगे। इस बार राखी के त्योहार पर वर्षों के बाद एक महासंयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष 2021 में रक्षाबंधन का त्योहार राजयोग में मनाया जाएगा। राखी पर इस बार चंद्रमा कुंभ राशि में मौजूद रहेंगे और गुरु कुंभ राशि में ही वक्री चाल में मौजूद है।

बहनो के लिए नहीं रहेगा समय का बंधन
बहनो के लिए नहीं रहेगा समय का बंधन


ज्योतिषशास्त्र के अनुसार गुरु और चंद्रमा की इस युति से रक्षाबंधन पर गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष में गजकेसरी योग को बहुत ही शुभ माना गया है। गजकेसरी योग पर शुभ कार्य करने पर उसमें विजय होने की सद्भावना सबसे ज्यादा होती है। गजकेसरी योग पर सभी तरह के सुखों की प्राप्ति होती है। इस योग में किए जाने वाले कार्यों का परिणाम अच्छे प्राप्त होते हैं। किसी जातक की कुंडली में जब चंद्रमा और गुरु केंद्र में विराजमान हों और एक दूसरे पर दृष्टि डालते हों तब गजकेसरी योग बनता है। रक्षाबंधन के दिन सूर्य, मंगल और बुध तीनों एक साथ सिंह राशि में मौजूद रहेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार रक्षाबंधन के दिन तीन ग्रहों का ऐसा संयोग वर्षों बाद बन रहा है। वर्षों बाद रक्षाबंधन धनिष्ठा नक्षत्र में और सूर्य, मंगल और बुध का सिंह राशि में होने पर मनाया जाएगा।

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