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मृत्युदर रोकने 28 दिन तक बच्चों की देखरेख बेहद जरूरी

राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह का शुभारंभ, 21 को होगा समापन

मंडला

Published: November 17, 2021 11:38:57 am

मृत्युदर रोकने 28 दिन तक बच्चों की देखरेख बेहद जरूरी
मंडला. नवजात शिशु की मृत्यु दर में कमी लाने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मप्र शासन ने राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह मनाने के निर्देश दिये है। जिसका मुख्य उद्देश्य सभी स्वास्थ्य संस्थाओं एवं समुदाय स्तर पर नवजात शिशु की देखभाल की गुणवत्ता में सुधार व समानता और गरिमा सुनिश्चित करना है। जिससे नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके। नवजात शिशु सप्ताह का शुभारंभ जिला चिकित्सालय में किया। नवजात शिशु सप्ताह का आयोजन 21 नवम्बर तक किया जाएगा। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. आरके शाक्य, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वायके झारिया, डीएचओ डॉ. आरके पीपरे, डॉ. अल्का तेजा, आरबीएसके जिला समन्वयक अर्जुन सिंह, आरकेएसके परामर्शदाता संजना राय समेत स्टाफ नर्स समेत चिकित्सालय का स्टाफ मौजूद रहा।
सीएस डॉ. शाक्य ने उपस्थित स्टाफ से कहा कि बच्चों की एक मुस्कान से हमारी सारी परेशानियां दूर हो जाती है। नवजात शिशुओं की देखभाल अपना शिशु समझकर करें। जिससे हम एक अच्छे इंसान के रूप में पहचाने जाएंगे। उन्होंने कहा कि चिकित्सक और चिकित्सा स्टाफ के बिना हम अधूरे है। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह के आयोजन का मुख्य उद्देश्य समस्त स्वास्थ्य संस्थाओं एवं समुदाय स्तर पर नवजात शिशु की देखभाल की गुणवत्ता में सुधार एवं समानता और गरिमा सुनिश्चित करना है, जिससे नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।
डीएचओ डॉ. आरके पीपरे ने कहा कि नवजात शिशु की उचित देखभाल द्वारा शिशु मृत्यु को कम किया जा सकता है। सप्ताह के दौरान सम्पूर्ण जिले में इस संबंध में आवश्यक प्रयास किये जायेंगे, जिसके तहत् प्रसव कक्षों में आवश्यक नवजात शिशु देखभाल प्रदान की जायेगी, साथ ही पोस्ट नेटल वार्ड्स में नवजात शिशु के संबंध में आवश्यक जानकारियां परिजनों को प्रदाय की जायेंगी। लाभार्थी वे समस्त शिशु होंगे जो जन्म से 28 दिवस के बीच की आयु के हैं, समय पूर्व जन्में एवं कम वजन के नवजात शिशु एवं नवजात शिशु गहन चिकित्सा ईकाई से डिस्चार्ज नवजात शिशु।

शिशुओं की देखभाल की दी जाएगी जानकारी :
टीकाकरण अधिकारी डॉ. वायके झारिया ने कहा कि सप्ताह के अंतर्गत समुदाय स्तर पर आशा कार्यकर्ता द्वारा गांव के समस्त नवजात शिशुओं के वजन, तापमान, सांस की गिनती की जांच की जायेगी एवं माताओं को स्तनपान, टीकाकरण, साफ सफाई, खतरे के आम चिन्ह तथा कंगारू मदर केयर के संबंध में सलाह दी जायेगी। उन्होंने आगे कहा कि इस दौरान विशेष गतिविधियों का आयोजन कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुये किया जायेगा, जिसमें समस्त धात्री माताओं की बैठक ली जाकर उन्हें नवजात सुरक्षा, खतरे के चिन्हों एवं संस्था आधारित नवजात देखभाल के बारे में जानकारी प्रदाय की जायेगी।
की जाएगी गतिविधियां आयोजित :
राष्ट्रीय नवजात शिशु सप्ताह कार्यक्रम के दौरान सभी एसएनसीयू, एनबीएसयू, पीएनसी एवं मदर वार्ड में आईईसी का प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान विशेष स्टाल लगाएं जायगे, जहां पर न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग के लिये विशेष व्यवस्था की जाएगी। जिले की सभी डिलेवरी प्वाइंट में स्क्रीनिंग की जाएगी। स्वास्थ्य संस्थाओं के पीएनसी वार्ड, एनबीएसयू एवं लेबर रूम में कार्यरत समस्त स्टाफ नर्सो का आवश्यक नवजात शिशु देखभाल, कंगारू मातृ सुरक्षा, जन्मजात विकृति की पहचान किये जाने के लिये शिशु रोग विशेषज्ञ, चिकित्सक द्वारा प्रशिक्षण दिया गया है। आरबीएसके चिकित्सा अधिकारी, नर्सिंग मेंटर द्वारा जिले के सभी प्रसव केन्द्रों का भ्रमण किया जा रहा है। सप्ताह के दौरान स्तनपान, तापमान नियंत्रण, साफ सफाई, खतरों के आम चिन्ह, टीकाकरण के संबंध में जानकारी परिजनों को दी जाएगी। गंभीर स्थिति में नवजात शिशु को जननी वाहन या 108 की मदद से रैफर कर नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती किया जाएगा।
शिशुओं की माताओं से ली एसएनसीयू की जानकारी :
सिविल सर्जन डॉ. आरके शाक्य ने कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान उपस्थित नवजात शिशुओं की माताओं से एसएनसीयू में शिशुओं या माताओं को किसी भी प्रकार की सुविधा से वंचित रखा जा रहा है इसकी जानकारी ली। माताओं ने बताया कि एसएनसीयू में हमारे बच्चों की केयर बहुत ही अच्छे से होती है। बच्चे की देखभाल यहां का स्टाफ बहुत ही बेहतर ढंग से करते है। श्री सिंह ने शिशुओं की माताओं को बताया कि नवजात को माँ को स्तनपान करना जरूरी है। यह बच्चे के लिये अमृत तुल्य है। उन्होंने मातओं से कहा कि बच्चे की सुरक्षा के लिये हमें किसी को देने से पहले हाथ साफ करे, मास्क पहने, और बच्चे को ठंड और गीलेपन से बचाना है।
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