धान की फसल के लिए घातक बन रहा यूरिया

यूरिया छिड़काव न करने की चेतावनी, बढ़ जाएगा माहू

By: Mangal Singh Thakur

Published: 14 Sep 2020, 10:01 PM IST

मंडला. जिले में खरीफ के किसानों का संकट बढ़ता ही जा रहा है। जागरुकता की कमी के कारण धान की फसल पर आवश्यकता से अधिक किया गया यूरिया छिड़काव अब नुकसानदेह साबित हो रहा है। दरअसल पिछले कुछ दिनो से तेज धूप ने वातावरण में उमस में अत्यधिक बढ़ोत्तरी कर दी है। उमस अधिक होने के कारण कीड़ोंं और बीमारी का प्रकोप बढ़ गया है। पहले धान पर झुलसा रोग ने हमला किया और अब माहू रोग ने। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, धान पर सिर्फ माहू के ही नहीं, बल्कि केश वर्म रोग के लक्षण भी दिखाई पड़ रहे हैं। चूंकि जिले के किसानों ने निर्धारित मानक से अधिक यूरिया का छिड़काव कर दिया है। इसलिए अब यह नुकसानदायक साबित हो रहा है। कृषि विशेषज्ञों ने जिले के किसानों को चेतावनी दी है कि जहां धान पर माहू अथवा ब्लास्ट रोग दिखाई पड़ रहा है वहां वे यूरिया का छिड़काव बिल्कुल न करें। अन्यथा रोग में बढ़ोत्तरी हो जाएगी। इसके अलावा यदि पेड़ के नीचे खेत में पानी भरा है तो पानी की निकासी न करने पर केशवर्म का प्रभाव भी बढ़ गया है।
इस वर्ष खरीफ के सीजन की शुुरूआत से ही किसानों को मौसम की मार का सामना करना पड़ रहा है। पहले अल्पवृष्टि और तेज धूप, फिर कम समय में अत्यधिक बारिश और अब फिर तेज धूप ने उमस में अत्यधिक बढ़ोत्तरी कर दी है। इससे खरीफ की फसल पर संकट मंडरा रहा है और धान की फसल सर्वाधिक प्रभावित हो रही है।
ये करें उपाय
उपसंचालक कृषि एसएस मरावी ने बताया कि जहां खेतों में केश वर्म का प्रभाव देखने में आ रहा है। वहां पेड़ के नीचे खेत में भरे पानी की निकासी करे तथा कीटनाशक दवा का स्प्रे करें। भूरा धब्बा रोग में पत्तियों, पर्णछंद तथा तनों पर आक्रमण करता है जिससे पत्तियों पर गोल अण्डाकार, आयताकार छोटे भूरे धब्बे बनते है तथा पत्तियां झुलस जाती है।
खड़ी फसल पर लक्षण दिखते ही कार्बेन्डाजिम/मेनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
जस्ते की कमी वाली खेतों में पौधरोपण के 2 हफ्तों के बाद ही पुरानी पत्तीयों के आधार भाग पर हल्के पीले रंग के धब्बे बनते है जो बाद में कत्थई रंग के हो जाते हैं जिसे पौधा बोना रह जाता है तथा कन्से कम निकलते हैं। इस रोग के नियंत्रण के लिए 20-25 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट प्रति हेक्टर बुआई के पूर्व डालना चाहिए। खड़ी फसल में 1000 लीटर पानी में 5 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट 2.5 कि.ग्रा. बिना बुझा चूना के घोल बनाकर मिश्रण बनाले तथा 2 कि.ग्रा. यूरिया मिलाकर छिड़काव करें।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, धान पर झुलसा रोग ने भी हमला कर दिया है। ऐसे में यूरिया का छिड़काव करना और अधिक नुकसानदायक होगा। बताया गया है कि झुलसा रोग पौधे की पत्तियों, बाली की गरदन एवं तने की निचली गठानों पर प्रमुख रूप से दिखाई देता है। प्रारंभिक अवस्था में निचली पत्तियों पर हल्के बेंगनी रंग के छोटे-छोटे धब्बे बनते है, जो धीरे-धीरे आंख के समान बीच में चौड़े व किनारों पर सकरे हो जाते है। इन धब्बो के बीच का रंग हल्के भूरे रंग का होता है, जिससे दानो के भरने पर प्रभाव पड़ता हैं। फसल काल के दौरान रात का तापमान 20 से 22 सेल्सियस व आद्र्रता 95 प्रतिशत से अधिक होती है। तब इस रोग का प्रकोप होने की संभावना अधिक रहती है।
अगस्त में भी किया था अधिक छिड़काव
अगस्त माह में ज्यादातर क्षेत्रों में जिले के अनेक किसानों ने धान की फसल पर यूरिया खाद का जमकर छिड़काव किया। इस माह में भी तेज धूप होने के कारण धान का रोपा पीला पडऩे लगा था। उस दौरान विपणन अधिकारी एसके गवले ने चर्चा के दौरान बताया था कि जिले में कई क्षेत्रों में धान का रोपा पीला पडऩे लगा है। ऐसी परिस्थितियों में किसानों को खेतों में डीएपी का छिड़काव करना चाहिए। यदि वे डीएपी के बजाय यूरिया का छिड़काव करेंगे तो पीली पड़ चुकी धान के रोपे जल जाएंगे। यूरिया का छिड़काव किसान तब करना चाहिए जब धान गबोट में आ जाए। लेकिन ज्यादातर किसानों ने डीएपी के बजाय यूरिया का ही छिड़काव किया।

Mangal Singh Thakur
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