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बीमा की सुविधा से वंचित चल रहे पशु पालक

बीमा क्लेम के लिए भी करना पड़ता है संघर्ष

मंडला

Published: May 27, 2022 04:02:13 pm

मंडला। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की योजनाएं संचालित की जा रही है। जिसके तहत पशुधन की हानि होने पर पशुओं के बीमा तक की सुविधाएं पशुपालकों को देने का प्रावधान है। लेकिन आलम यह है कि आदिवासी बाहुल्य जिले में पर्याप्त प्रचार-प्रसार के अभाव में पशु पालकों को किसी प्रकार की बीमा सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पशुपालकों को न तो बीमा सुविधा का लाभ मिल पा रहा है और ना ही पशु पालन विभाग द्वारा बीमा के निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त किया जा रहा है। निर्धारित लक्ष्य के आगे किए गए बीमा भी उंट के मुंह में जीरा के बराबर नजर आते है। वहीं बीमा क्लेम देने में भी संबंधित बीमा कंपनियों द्वारा पशुपालकों को काफी परेशान किया जाता है जिससे जिले के पशु पालक अपने पशुओं का बीमा कराने में रूचि नहीं दिखा रहे है।
मवेशियों की संख्या में लाखों में, बीमा हजार
पशु पालन विभाग से मिली जानकारी अनुसार वर्ष 2021-22 में मात्र 1346 मवेशियों का बीमा कराया गया है। दि ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा मवेशियों का बीमा किया जा रहा है, जबकि जिले में गौवंश की संख्या 4 लाख 86 हजार 200 और भैंस की संख्या 82098 के लगभग है और बाकि पशुओं को मिलाकर यह संख्या करीब 7 लाख के करीब पहुंच रही है। वहीं इसके एवज में साल भर में मात्र 1346 मवेशियों का बीमा विभाग की कार्यप्रणाली के साथ पशुओं की सुरक्षा पर भी सवाल खडे कर रहा है।
वर्षाकाल में सबसेे अधिक होती है पशुधन की हानि
बारिश का समय शुरू होने को है वर्षाकाल के दौरान आए दिन आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। हर साल जिले में दर्जनों की संख्या में मवेशियों की मौत आकाशीय बिजली की चपेट में आने से हो जाती है, क्योंकि बारिश के दौरान लोग तो अपने आपको सुरक्षित कर लेते हैं लेकिन मवेशियों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जाता है जिससे वे आसानी से आकाशीय बिजली की चपेट में आ जाते हैं, इसके अलावा कई बार अग्नि दुर्घटनाओं से भी गौशाला में मवेशियों के बंधे होने से व बिजली की चपेट में आ जाते हैं हादसे होते है।
बीमा क्लेम के लिए पशुपालकों को करना पड़ता है संघर्ष
पशुधन बीमा योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, बीपीएल को एक वर्ष या 3 वर्ष के लिए 30 प्रतिशत प्रीमियम के साथ तथा एलपीएलए को 50 प्रतिशत प्रीमियम के साथ बीमा कराने का अवसर प्रदान किया गया है। 1 साल के लिए प्रीमियम की दर 2.92 प्रतिशत व 3 साल के लिए 7.34 प्रतिशत निर्धारित की गई है।
वहीं पशु पालकों ने बताया कि इंश्योरेंस कंपनी के एजेंटों द्वारा पशुओं का बीमा तो कर दिया जाता है और पशु पालकों द्वारा निर्धारित समय-समय में बीमा की किश्तें भी जमा कराई जाती हैं, लेकिन जब पशुओं की मौत हो जाती है और पशु पालक अपने इस नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कंपनी से संपर्क करते हैं तो इंश्योरेंस कंपनी द्वारा बीमा लाभ देने में कई तरह की परेशानियां खड़ी कर दी जाती है।
नाम ना छापने की शर्त पर पशुपालक ने बताया कि उन्होंने अपनी गाय का बीमा 2020-21 में कराया था बीमा की किश्त भी जमा की जाती रही, लेकिन अचानक गाय की मौत हो गई तो उन्होंने स्थानीय पशु चिकित्सक से संपर्क किया, पशु चिकित्सक बताया गया कि बीमा एजेंट के आने पर ही गाय का पीएम किया जाएगा। वहीं बीमा एजेंट से संपर्क करने पर उन्होंने बीमा क्लेम देने में कई तरह आनाकानी करना शुरू कर दिया यहां तक सीएम हेल्पलाईन का सहारा लेना पड़ा लेकिन कोई लाभ नहीं मिला।
तेजी से बढ़ रही है पशुधन की संख्या
पशु पालन विभाग से मिली जानकारी अनुसार हर 5 सालों में पशुओं की गणना की जाती है वर्ष 2019 के अनुसार जिले में गौ वंश की संख्या 4 लाख 86 हजार 200, भैंस- 82098, बकरी- 109461, भेड़- 102, सुअर- 17160 बताई गई है। बताया गया कि जिले में पशुधन की संख्या में पिछले सालों के मुकाबले बढ़ोत्तरी हुई है।

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