एक से दूसरे मवेशी में फैल रहा वायरस

अब तक 14 सौ मवेशी चपेट में, पशु चिकित्सक भी परेशान

By: Mangal Singh Thakur

Published: 07 Sep 2020, 11:24 AM IST

मंडला. चिकित्सा के क्षेत्र में जिले में कोरोना के बाद एक और संकट आ गया है। इस बार मवेशी चपेट में हैं। जिनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं दवाईयों की उपलब्धता भी कम होने से बीमारी में जल्द लगाम लगा पाना पशु चिकित्सकों के लिए मुश्किल होगा। जानकारी के अनुसार जिले के मवेशियों लम्पी स्किन डिसीज नामक संक्रामक बीमारी फैल रही है। जिसकी चपेट में एक के बाद एक जिले के 246 गांव के मवेशी आ गए हैं। जिनकी संख्या 14 सौ के आसपास है। कम समय में लगातार बढ़ रहे संक्रमित मवेशियों के चलते पशुपालक ही नहीं बल्की पशुचिकित्सक भी परेशान हैं। बीमारी मंडला जिले के साथ प्रदेश के अन्य जिलों में भी पैर पसार चुकी है। जिले में रोग की वस्तु स्थिति जानने के लिए डॉ एपी गौतम संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा सेवायें जबलपुर, डॉ पीके सोलंकी प्रभारी पशुरोग अनुसंधान प्रयोगशाला संभाग जबलपुर, डॉ एमएल मेहरा उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवा मंडला, डॉ पीके ज्योतिषी, डॉ सुमित पटेल, डॉ श्रुति गौर द्वारा विकास खंड नैनपुर के ग्राम सिमरिया, जहरमऊ एवं विकास खंड मंडला के ग्राम भंवरदा में भ्रमण किया। बीमार पशुओं का सेंपल लिया गया। जिसे जांच के लिए राज्य स्तरीय पशु रोग अन्वेषण प्रयोगशाला भोपाल भेजा जाएगा। अब तक 79 सेंम्पल भोपाल जांच के लिए भेजे गए हैं। राहत भरी खबर यह है कि इस बीमारी का उपचार संभव हैं। जिले में एक भी पशु की उक्त बीमारी से मौत नहीं हुई है। पांच दिन के उपचार में बीमारी से पशु को राहत मिल जाती है। जिले में अब तक 275 पशु उपचार के बाद ठीक हो चुके हैं।
दिखने लगते हैं ये लक्ष्ण
पशुपालकों ने बताया कि इस बीमारी से पशुओं के शरीर का कोई भी हिस्सा अचानक सूजन हो जाता है। साथ ही पशुओं को हल्की बुखार एवं सर्दी भी रहती है। वहीं पशुओं के शरीर पर गोल-गोल छल्ले नुमा घाव भी दिखाई दे रहे है। यह घाव में पानी छूटते रहता है। जिससे घाव जल्दी सूख नहीं पाता है। जो पशुओं के लिए बेहद कष्टदायक रहता है। इस बीमारी से दुधारू पशु एवं गर्भवती गायों को ज्यादा खतरा है। डॉ आरएम मुरमुदे पशु चिकित्सा विस्तार अधिकारी घुघरी ने बताया कि लम्पी स्किन डिसीज एक संक्रामक रोग है। जो तेजी से पशुओं में फैल रहा है। यह एक प्रकार की वायरल डिसीज है। जो पूरे भारत में फैला हुआ है। इस बीमारी की चपेट में ज्यादातर गौवंश वाले पशु ही आ रहे हैं। भैंस व बकरी इससे बचे हुए हैं। इस संक्रामक रोग को रोकने के लिए विभाग पूरी तरह से जुटा हुआ है। जिन गांवों में ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, वहां बाकायदा शिविर लगाकर पशुओं का इलाज किया जा रहा है। घुघरी के आसपास गांव में भी शिविर लगाए जा रहे हैं। इलाज के रूप में एंटीबायोटिक इंजेक्शन एवं दवाओं का प्रयोग किया जा रहा है। संक्रमित पशुओं का उचित देखभाल कर बीमारी को स्वस्थ पशुओं में फैलने से रोका जा सकता है।
मिली जानकारी अनुसार लम्पी स्किन डिसीज एक संक्रामक रोग है। जो संक्रमित पशु के संपर्क में आने से स्वस्थ पशुओं में फैलता है। लम्पी स्किन डिसीज से संक्रमित पशु को स्वस्थ्य पशुओं से अलग रखना चाहिए। संक्रमित पशु के चारे, पानी की प्रबंध अलग से करना चाहिए। संक्रमित पशुओं को गोठान में ना भेजें। ऐसा करने पर यह संक्रामक रोग स्वस्थ्य पशुओ में तेजी से फैलने का खतरा बना रहता है। लम्पी स्किन डिसीज से पीडि़त पशु का उचित देखभाल करना चाहिए। जिससे पशु जल्दी ही स्वस्थ्य हो सके। पशुपालकों को जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि किसी भी स्थिति में फिनाइल का प्रयोग नहीं करें। इससे घाव और अधिक बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस बीमारी से पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इस बीमारी से मृत्यु दर लगभग शून्य है।

Mangal Singh Thakur
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