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जर्जर टेंकरों से हो रही पानी की सप्लाई

गर्मी की आहट, जल संकट के लिए तैयार नहीं है नगरपालिका

मंडला

Published: March 05, 2022 08:01:31 pm

मंडला. गर्मी की आहट के साथ ही जलसंकट भी दस्तक दे दी है। इससे निपटने के लिए विभागीय तैयारियां भी शुरू हो गई है। लेकिन नगर पालिका या आसपास क्षेत्र में जलसंकट की स्थिति बनती है तो को इससे निपटने में समस्या आ सकती है। जानकारी के अनुसार नगरपालिका कार्यालय में पेयजल सप्लाई के लिए पानी के मात्र 25 टेंकर उपलब्ध है जो नगरपालिका क्षेत्र की आबादी के हिसाब से काफी कम हैं। एक तरफ पानी के टेंकरों की कम संख्या तो वहीं जो टेंकर है वे समय के साथ-साथ काफी जर्जर हो चुके हैं, जिन्हें मरम्मतीकरण कराकर नगरपालिका द्वारा पेयजल की सप्लाई कराई जा रही है। किसी घर में विवाह आयोजन या फिर कोई राजनैतिक आयोजन इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के साथ भोजन तैयार करने के लिए नपा द्वारा पानी उपलब्ध कराया जाता है, इसके बाद नपा द्वारा एक निर्धारित राशि ग्राहकों से वसूली जाती है, लेकिन नपा परिसर में लगे ट्यूब बेल से जब ये टेंकर पानी लेकर गंतव्य के लिए रवाना होते हैं तो गंतव्य तक पहुंचने के पहले ही इनसे काफी पानी का रिसाव हो चुका होता है क्योंकि पानी ले जाने वाले अधिकांश टेंकर काफी पुराने हो चुके हैं।
कुंभ आयोजन के दौरान हुई थी खरीदी
जानकारी अनुसार वर्ष 2011 में मां नर्मदा सामाजिक कुंभ का आयोजन किया गया था। इस दौरान देश भर से लाखों की संख्या श्रद्धालु मंडला पहुंचे थे, इन श्रद्धालुओं की पेयजल व्यवस्था के लिए नपा को पानी के टेंकर उपलब्ध कराए गए थे। वही टेंकर आज तक मंडला शहर और उपनगर महाराजपुर के नगरपालिका क्षेत्र अंतर्गत पेयजल सप्लाई के लिए उपयोग किए जा रहे हैं। लगभग 11 साल के इस अंतराल में इनमें से अधिकांश टेंकर जर्जर हो गए हैं, जिन्हें समय-समय में नपा परिसर में कार्यरत कारीगरों द्वारा वेल्डिंग मशीन से मरम्मतीकरण किया जाता है लेकिन अधिक पुराने होने के कारण कुछ ही दिनों में एक नया सुराग इन टेंकरों में हो जाता है, जिनसे पानी सप्लाई के समय रिसाव होता रहता है।
24 वार्डों के लिए 25 टेंकर
पिछले कुछ साल पहले के अनुभवों पर गौर किया जाए तो बढ़ती गर्मी से शहर के कई वार्डों में पेयजल संकट गहरा जाता है, इसी के साथ अचानक यदि पाईप लाईन से पेयजल सप्लाई बाधित होती है, पंप में अचानक कोई खराबी आती है तो मात्र 25 टेंकरों से मंडला और महाराजपुर की बड़ी आबादी की पेयजल की आपूर्ति कैसे हो सकेगी यह बड़ा सवाल बना हुआ है। नगरपालिका कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार नगरपालिका मंडला के 24 वार्डों की हजारों की आबादी के लिए मात्र 25 पानी के टेंकर हैं। हालांकि नपा में पानी टेंकरों से सप्लाई की जवाबदारी संभालने वाले कर्मचारियों का कहना है कि 25 टेंकर जरूरत के हिसाब से पर्याप्त हैं। इन कर्मचारियों ने यह भी बताया कि शहर में पेयजल के लिए लाईन बिछाई जा चुकी है, इसलिए इन टेंकरों का उपयोग कम ही होता है।

जर्जर टेंकरों से हो रही पानी की सप्लाई
जर्जर टेंकरों से हो रही पानी की सप्लाई
समय-समय में होने वाले राजनैतिक, सामाजिक आयोजनों के दौरान जरूर इन टेंकरों का उपयोग किया जाता है। ये कर्मचारी भी स्वीकार करते हैं कि जो टेंकर पानी सप्लाई के लिए उपयोग किए जा रहे हैं वे पुराने हो चुके हैं और समय-समय में इनका मरम्मतीकरण कराकर इन्हें उपयोगी बनाए रखा गया है।
दो तरह के टेंकरों से होती है पानी की आपूर्ति
नपा की जल शाखा से मिली जानकारी अनुसार यहां 4500 लीटर वाले 11 और 3000 लीटर वाले 14 पानी के टेंकर हैं। 4500 लीटर वाले टेंकर से पानी उपलब्ध कराने पर ग्राहकों से 400 रुपए जलकर लिया जाता है वहीं 3000 लीटर वाले टेंकर से पानी पहुंचाने के लिए 300 रुपए लिए जाते हैं। वहीं किसी निर्माण या फिर निजी आयोजन में यही राशि दोगुनी कर दी जाती है।
बॉक्स
वाटर कूलर भी अनदेखी का शिकार
फोटो- 03 वाटर कूलर के आसपास अतिक्रमण।
गर्मी के समय में नगरवासियों को शीतल पानी उपलब्ध कराने के लिए पूर्व नगरपालिका परिषद द्वारा मंडला शहर और महाराजपुर के कई स्थानों में वाटर कूलर लगाए गए थे लेकिन समय के साथ ही अब ये वाटर कूलर अनदेखी का शिकार हो चुके हैं। कई स्थानों में इन कूलरों के आसपास भारी गंदगी रहती है, नगरपालिका के पास ज्ञानदीप स्कूल के सामने लगे वाटर कूलर के आसपास वाहनों का जमावड़ा होने से बाहर से आने वाले लोगों का इस वाटर कूलर के होने का पता ही नहीं चल पाता। यही नहीं इन वाटर कूलर से आसानी से पानी भरकर उपयोग किया जा सके इसके लिए यहां गिलास भी चेन से बांधकर रखे गए थे लेकिन अब कहीं गिलास नहीं दिखाई दे रही है। लोग हाथ में पानी भरकर पानी पीते हैं। इसी के साथ कई लोगों ने यह भी बताया कि इन वाटर कूलरों में पानी सप्लाई के लिए पानी की टंकी रखी गई है लेकिन इनकी सफाई में भी रुचि नहीं है।

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