गर्मियों के लिए पहाड़ का पानी सहेजने में जुटीं महिलाएं

गांव का जलस्तर बढ़ाने की कवायद, गर्मी में गहरा जाता है जलसंकट

By: Mangal Singh Thakur

Published: 15 Sep 2020, 05:54 PM IST

मंगल सिंह ठाकुर
मंडला. गर्मियों में गांव को जलसंकट बचाने की कवायद में जुटी महिलाएं पहाड़ी से गिरने वाले पानी को सहेज रही हैं। इस काम में महिलाएं श्रमदान करती हैं। इन्होंने पहाड़ी में वाटर शेड तैयार किया है, ताकि बारिश के पान को संरक्षित और सुरक्षित रखा जा सके। इन महिलाओं को प्रोत्साहन के रूप में अनाज दिया जा रहा है। मंडला के घुघरी ?लॉक के परसवाह पंचायत के अंतर्गत पहाड़ी पर रहने वाले बहरा गांव के रहवासी पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में वाटर शेड बनाकर बारिश के पानी को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। सुंदरिया बाई बताती हैं कि गांव में पानी रहेगा तो गांव में खुशहाली रहेगी। सुमंत्रा बाई और परवती बाई कहती हैँ कि कोरोना संक्रमण के कारण राशन की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। श्रमदान से हम गांव की समस्या सुलझा रहे हैं, वहीं राशन किट मिलने से परिवार चलाने में मदद मिल रही है।
चार साल के प्रयासों से मिली सफलता
गांव की गीता बाई बताती हैं कि गांव में जलस्तर बढऩे से खेती को फायदा मिलेगा। दरअसल, पानी सहेजने के इस सामूहिक योजना का अमल में लाने में सामाजिक संस्था प्रयास शिक्षा समिति को चार साल लगे। इस दौरान समिति ने सभी को पानी संरक्षित करने के लिए जागरूक किया। राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित संस्था की अध्यक्ष उतरा अशोक परवार का कहना है कि श्रमदान करने वाली महिलाओं को प्रोत्साहन के रूप में कपड़े, खाद्यान्न और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं दी जाती हैं।
गड्ढे बनाकर संरक्षित कर रहे पानी
बहरा गांव पहाड़ी पर बसा है। ये गांव चारों ओर से पहाडिय़ों से भी घिरा है। मानसून में बारिश का पानी इन पहाडिय़ों से बहकर बेकार हो जाता है। ऐसे में इस पानी को संरक्षित करने के लिए पहाडिय़ों पर छोटे-छोटे गड्ढे बनाए गए हैं। इससे गर्मियों में इस पानी का उपयोग कर सकें। साथ ही जलस्तर में भी बढ़ोतरी हो। बहरा गांव के अलावा घुरघुटी, छोटा छाता, धोबा घाट, दूबा सहित 10 गांवों में वाटर शेड बनाए गए हैं। इसके लिए 3487 गड्ढे किए हैं। यहां पौधरोपण भी किया गया है।

Mangal Singh Thakur
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