दो सितंबर को निर्जला व्रत रखेंगी महिलाएं

दो सितंबर को निर्जला व्रत रखेंगी महिलाएं
दो सितंबर को निर्जला व्रत रखेंगी महिलाएं

Mangal Singh Thakur | Updated: 01 Sep 2019, 11:50:49 AM (IST) Mandla, Mandla, Madhya Pradesh, India

पूजन सामग्री खरीदने बाजार में दिखी रौनक

मंडला. भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन रखा जाता है। पति परिवार और बच्चों की सुख समृद्धि के लिए मनाया जाने वाला हरतालिका व्रत 2 सितंबर को मनाया जाएगा। हालांकि की कुछ महिलाएं एक सितंबर को भी व्रत रखेंगी। 1 सितंबर रविवार को सुबह 8 बजकर 26 मिनट से रात्रि 4 बजकर 56 मिनट तक व्रत रखना है। 2 सितंबर को उदया तिथि चतुर्थी होगी और व्रत पूजन रविवार को होगा। नीलू महाराज ने बताया कि व्रत पूजन 2 सितंबर को किया जाना चाहिए। पुराणों के अनुसार जो तीज दूज के साथ सम्मिलित होती है वह वैष्णव के दोष युक्त मानी गई है। इसलिए उसके दूसरे दिन व्रत रखना उचित होगा। हिन्दू धर्म में सभी महिलाएं अपने पति की लम्बी आयु के लिए हरतालिका तीज व्रत रखती है। नीलू महाराज ने बताया है कि ऐसा माना जाता है कि हरतालिका तीज व्रत सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। इस व्रत में भगवान शिव और पार्वती के विवाह की कथा सुनने का बहुत अधिक महत्व है। इसलिए सभी महिलाएं हरतालिका तीज व्रत करके अपने पति की आयु लम्बी आयु की कामना करती हैं। बताया गया कि अगर यह हरतालिका तीज व्रत कुंवारी लड़कियां रखती है तो उनकी इस व्रत से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। महिलाएं द्वारा रखा गया हरतालिका तीज व्रत उनकी पति की लम्बी आयु के लिए बुहत ही शुभ माना गया है। हरतालिका तीज व्रत अगर पूरे विधि विधान और साफ दिल से रखा जाए तो जल्दी ही महिलाओं की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। पर्व की तैयारी महिलाएं शुरू कर दी है। जिसको लेकर शनिवार की शाम से हीबाजार में रौनक दिखने लगी। पूजन सामग्री के साथ सौंदर्य सामग्री, कपड़ों की दुकानों में काफी भीड़ रही।
हिन्दू धर्म में हरतालिका तीज व्रत का महत्व बहुत अधिक माना जाता हैं। इस व्रत की पात्र कुमारी कन्याएं या सुहागिन महिलाएं दोनों ही हैं, लेकिन एक बार व्रत रखने बाद जीवनभर इस व्रत को रखना पड़ता है। यदि व्रती महिला गंभीर रोगी हालात में हो तो उसके बदले में दूसरी महिला या उसका पति भी इस व्रत को रख सकता है।
हरतालिका तीज पूजा विधि
सबसे पहले महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान करके निवृत्त होकर शिव और पार्वती की मूर्तियों को मिट्टी से बनाकर स्थापित करें।
भगवान शिव और पार्वती की मूर्तियों की पूजा शुरू करने के साथ ही सबसे पहले श्री गणेश पूजन करें।
गणेश पूजन के करने के बाद शिव-पार्वती पूजा करें।
पूजन के बाद पुष्प चढ़ाकर आरती करें और अंत में हरतालिका तीज व्रत कथा करें।
इसके बाद तीज व्रत का पालन करने का संकल्प लें और पूरे दिन निर्जला व्रत रखें।
हरतालिका तीज के अगले दिन की सुबह तक जागरण करें और ओम नम: शिवाय का जाप करें। हरतालिका तीज के अगले दिन सुबह व्रत का पारण करें।

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