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थाली से रोटी भी हो जाएगी गायब जानिए क्या है कारण

जून से नहीं मिलेगा गेहूं

मंडला

Updated: May 29, 2022 07:27:09 pm

मंडला. वर्तमान में पोषण आहार को लेकर काफी चर्चाएं हो रही हैं, चूंकि जिले में कुपोषण की समस्या हमेशा से अधिक रही है इसलिए आंगनबाडिय़ों के माध्यम से बच्चों को पोषण आहार दिया जा रहा है, गरीब बैगा महिलाओं को पोषण आहार के नाम पर हर महिने निर्धारित राशि तक दी जा रही है वहीं दूसरी ओर जो गरीब सस्ते अनाज के लिए राशन दुकानों पर निर्भर हैं, उन्हें जो शरीर के पोषण के लिए अत्यधिक जरूरी है गेहूं की जगह चावल वितरण कराया जाएगा। इसमें प्रति माह एक रुपए किलो मिलने वाले राशन के साथ प्रधानमंत्री खाद्यान्न योजना का निशुल्क राशन भी शामिल है। चावल के साथ जितना गेहूं दिया जाता था अब उस गेहूं के वजन का चावल ही दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर राशन दुकानों से जो गरीब सस्ता अनाज लेकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे हैं उन्हें अभी से यह चिंता सताने लगी है कि यदि राशन दुकान से सिर्फ चॉवल मिलेगा, तो वे अपनी जरूरत का गेहूं बाजार से कैसे खरीद पाएंगे? क्योंकि बाजार में गेहूं काफी महंगा बिक रहा है।
9 लाख गरीब राशन दुकानों पर निर्भर
खाद्य एवं आपूर्ती अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार जिले में कुल 2 लाख 36 हजार 224 राशन कार्डधारी है, जिसमें करीब 8 लाख 98 हजार 98 सदस्यों के लिए हर महिने सस्ता अनाज वितरण किया जा रहा है। इन्हें राशन दुकानों से चॉवल, गेहंू, शक्कर, नमक के साथ केरोसीन भी दिया जा रहा है, जिससे इन गरीबों का महिने भर पेट चलता है, इसमें से कोई एक भी सामग्री नहीं मिलने से गरीब के घर का बजट ही बिगड़ जाता है। खाद्य एवं आपूर्ती अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार जून के लिए राशन दुकानों में एक रुपए प्रति किलो मिलने वाले चॉवल का 61 लाख 20 हजार 145 किग्रा का आवंटन मिला है, वहीं प्रधानमंत्री खाद्यान्न योजना के तहत मिलने वाले चॉवल के लिए 38 लाख 98 हजार 278 किग्रा का आवंटन मिला है। बता दें कि किसी को कुल 35 किलो चॉवल और गेहूं मिलता था तो अब गेहूं की जगह 35 किलो सिर्फ चॉवल ही दिया जाएगा।
बाजार से खरीदेंगे महंगा गेहूं
शरीर के लिए चॉवल और रोटी दोनों ही फायदेमंद मानी जाती है जिसमें रोटी को अपेक्षाकृत अधिक पोष्टिक, उर्जा देने वाला माना जाता है, बीमार होने पर गेहूं की दलिया ही मरीज को खिलाई जाती है। राशन दुकान से हर महिने राशन लेने वाले कुछ परिवार के लोगों ने बताया कि राशन दुकान से जो खाद्यान्न मिलता है उसी का उपयोग परिवार के सभी सदस्य करते हैं, यदि राशन दुकान से कोई एक भी सामग्री कम मिलती है, तो उसे बाजार से खरीदना काफी मुश्किल हो जाता है।
हितग्राहियों का कहना है कि बाजार में इन दिनों गेहूं 2500 से 2600 प्रति क्विंटल बिक रहा है, जो आने वाले दिनों में और भी महंगा होने की बात कही जा रही है ऐसे में राशन दुकान से यदि सिर्फ चावल ही दिया जाएगा तो बाजार से गेहंू खरीदने की नौबत आ जाएगी, जो गरीब परिवार बड़ी मुश्किल पैदा करने वाला हो सकता है।
निर्यात ने खड़ी कर दी मुश्किल
यह सर्वविदित है कि इस बार समर्थन मूल्य में खरीदा जाने वाला गेहूं अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका है। करीब 9 लाख क्विंटल का लक्ष्य रखा गया था जो खरीदी की तारीख बढ़ाने के बाद भी लक्ष्य तक पहुंचना तो दूर लक्ष्य से आधा तक नहीं हो सका है। सूत्रों के अनुसार जिले में ही करीब 6 लाख क्विंटल गेहूं की खपत है, उसके मुकाबले अब तक समर्थन मूल्य से महज 4 लाख 37 हजार क्विंटल की ही खरीदी की जा सकी है।
लोगों का यह भी कहना है कि पिछले दिनों रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते भारत से बड़ी मात्रा में गेहूं का निर्यात हुआ है, करीब दो माह तक लगातार रोजाना बड़ी मात्रा में गेहूं रूस और यूक्रेन भेजा जा रहा था क्योंकि युद्ध के हालात होने से वहां गेहूं के दाम बढ़ गए थे, विदेश में गेहूं की आपूर्ती के चलते जब स्टॉक कम हुआ तो अचानक निर्यात पर रोक लगा दी गई लेकिन तब तक काफी गेहूं का निर्यात हो चुका था।
इनका कहना है।
खरीदी केन्द्रों में प्रभारी, सर्वेयरों द्वारा किसानों की उपज का सेम्पल फेल होने का भय दिखाया जाता है, जिससे किसानों ने इस बार खरीदी केन्द्रों की जगह बाजार में ही गेहूं बेचना ठीक समझा। इसी के साथ सरकार ने बड़ी मात्रा में गेहूं विदेश निर्यात कर दिया जिससे यह स्थिति अब निर्मित हो गई है कि राशन दुकानों में गरीबों को दिए जाने के लिए तक गेहूं नहीं बचा है।
नारायण सिंह पट्टा, विधायक, बिछिया
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