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5665 मैट्रिक टन जिले में उपलब्ध फिर भी 85 केंद्र ऐसा जहां नहीं है यूरिया, विभाग रबी के लिए भंडारण में जुटा

5665 मैट्रिक टन जिले में उपलब्ध फिर भी 85 केंद्र ऐसा जहां नहीं है यूरिया, विभाग रबी के लिए भंडारण में जुटा

मंदसौर

Published: September 12, 2022 10:31:52 am

मंदसौर.
रबी सीजन के दौर में यूरिया की सबसे अधिक मांग होती है। इस बार खरीफ सीजन में भी जिले में खाद की कमी बनी रही और यह मुद्दा सुर्खियों में रहा। ऐसे में अब विभागीय तैयारियों को देखे तो खरीफ सीजन के आखरी दौर में जिले में खाद की कमी बनी हुई है। हालांकि खरीफ सीजन का अंतिम दौर है और खाद की मांग कम होने के चलते विभाग अभी से ही रबी सीजन को देखते हुए खाद के भंडारण करने की बात कह रहा है। विभाग का दावा है कि जिले में खाद की स्थिति बेहतर है और कही पर लाइन नहीं लग रही है। लेकिन उपलब्धता के आंकड़ों के बीच कई केंद्र ऐसे भी है जहां यूरिया नहीं है। रबी सीजन से पहले ही भंडारण के दावों पर खाद की कमी भी बनी हुई है।
Collusion: Urea missing from market, farmers upset
Collusion: Urea missing from market, farmers upset

८५ पर यूरिया तो ८९ पर एनपीकेएस नहीं
जिले में खाद का कुल भंडारण व वितरण तो हो रहा है और आंकड़ों को देखे तो पिछले साल से अधिक खाद आया है। लेकिन ८५ खाद वितरण के ऐसे केंद्र है। जहां वर्तमान की स्थिति में यूरिया जिले में नहीं है। तो ९७ केंद्रों पर डीएपी और १५४ केंद्रगों पर एमओपी के साथ ही ८९ केंद्रों पर एनपीकेएस के साथ एसएसपी १०२ केंद्रों पर नहीं है। ऐसे में यदि इन केंद्रों पर किसान खाद लेने के लिए पहुंचेगा तो उसे खाली हाथ लौटना पड़ेगा। हालांकि विभाग के आंकड़ों को देखे तो यूरिया ५६६५, डीएपी ४४२७, एमओपी ९५३, एनपीकेएस ४१५८, एसएसपी १३९९७ मैट्रिक टन उपलब्ध है। उपलब्ध खाद को देखते ही विभाग पर्याप्त खाद होने व किसानों के बीच खाद की किल्लत जैसी बात से जिले में होने से इंकार कर रहा है।

गबन के कारण अनुपलब्ध है स्टॉक
दो साल पूर्व जिले में खाद का गबन हुआ था। इसमें वेयर हाऊस से खाद तो उठा लेकिन वह सोसायटियों में नहीं पहुंचा था। वह खाद कहा गया इसकी जांच तो अब तक पूरी नहीं हुई लेकिन इस गबन के कारण आंकड़ों में अब तक खाद का स्टॉक आता है, लेकिन गनब के कारण भी अनुपलब्ध स्टॉक है। इसमें यूरिया 842, डीएपी 335, एमओपी 38,
एनपीकेएस 105० मैट्रिक टन में है। खाद के गबन के दौर के आंकड़े भी अब तक विभागीय स्टॉक में कागजों में चल रहे है।

खरीफ की फसल पकने को अभी रबी में समय
जिले में यूरिया खाद की पिछले कुछ सालों में रबी सीजन के दौरान सबसे अधिक जरुरत हो रही है। जिले में यूरिया की मांग ही सबसे अधिक रबी सीजन में रहती है। खरीफ की सीजन की फसल पकने को है और रबी सीजन में अभी समय में है। ऐसे में विभाग यह मानकर चल रहा है कि यूरिया की दिक्कत नहीं आएगी। पिछले सालों के आंकड़ों और इस बार रबी सीजन में गेहूं की स्थिति को देख यूरिया की मांग भेजी जाएगी। अभी खाद की जरुरत किसानों को अधिक नहीं होने के कारण भी विभाग सबकुछ ठीक होने की बात कह रहा है। वहीं पिछले साल रबी सीजन में खाद की कालाबाजारी को लेकर जिले में बड़ी कार्रवाईयां हुई थी।

फैक्ट फाइल...
जिले में खाद की स्थिति
खाद कुलभंडारण /वितरण/ उपलब्ध/ निरंक केंद्र
यूरिया 28319 23496 5665 85
डीएपी 11604 7512 4427 97
एमओपी 1197 282 953 154
एनपीकेएस 10612 7504 4158 89
एसएसपी 26941 12944 13997 102
नोट-खाद के आंकड़े मैट्रिक टन में है।

जिले में है बेहतर स्थिति
जिले में खाद को लेकर बेहतर स्थिति है। खरीफ की मुख्य फसल सोयाबीन कटाई की स्थिति की ओर है। रबी को लेकर भंडारण का काम कर रहे है। खाद वर्तमान में उपलब्ध भी है। कही पर लाइन नहीं लग रही है और ना ही किसानों में वर्तमान में खाद की मांग है। -एके बड़ोनिया, उपसंचालक, कृषि

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