जीवन में चंदन का वृक्ष बनकर चारों और खुशबू फैलाएं-प्रतीकसागर महाराज

जीवन में चंदन का वृक्ष बनकर चारों और खुशबू फैलाएं-प्रतीकसागर महाराज

By: Nilesh Trivedi

Published: 19 Mar 2020, 11:12 AM IST

मंदसौर.
मुनि प्रतीक सागर महाराज के सानिध्य में चल रहे पांच दिवसीय सर्व धर्म सत्संग मानव कल्याण महोत्सव के चौथे दिन भी प्रवचन का दौर जारी रहा। बुधवार को समाजजनों द्वारा आचार्य पुष्पदंतसागर महाराज व तरुणसागर महाराज की तस्वीर पर दीप प्रज्वलन के बाद कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद संगीतकार पुखराज जैन द्वारा मंगलाचरण गीत प्रस्तुत किया व अभा जैन दिवाकर विचार मंच अध्यक्ष नयन जैन ने संबोधित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं, नागदा, खारवा कला, मानपुरा, लदुना, अफजलपुर श्रीसंघो के सदस्यों ने श्रीफल भेंट किया।


मुनि प्रतीकसागर ने कहा की हम किसी भी शुभ कार्य से पहले मुहूर्त निकालते हैं। शादी विवाह गृह प्रवेश शादी में हम मुहूर्त क्यों देखते हैं। हम हर शुभ कार्य को करने से पहले मुहूर्त निकालते हैं गुरुदेव ने कहा कि मुहूर्त देख कर कार्य करने के बाद सब कुछ मंगल होगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। मुनि ने कहा कि अपने मन को मंगल बना लीजिए तो कुछ भी अमंगल होगा ही नहीं जिस दिन आपका मन मंगल हो जाएगा उस दिन सबका मंगल ही मंगल होगा। हम शादी से पहले गुण मिलाते हैं लड़के में कितने गुण हैं लड़की में कितने गुण हैं लेकिन महापुरुषों ने कहा है कि गुण मिलाने से अच्छा है स्वभाव मिलाएं जाएं तो झगड़े ही खत्म हो जाते।


एक मां १०० गुरुओं के बराबर होती है
मुनि ने कहा कि पहली गुरु बच्चे की मां होती है किसने कहा जाता है गुड मदर इज हंड्रेड टीचर। एक मां 100 गुरुओं के बराबर हुआ करती हैष्। एक बच्चा कोई भी चीज स्कूल में बाद में सीखता है पहले उसके शिक्षा की शुरुआत स्वयं के घर से होती है और उच्च शिक्षा की शुरुआत मां से होती है। मां के द्वारा दी गई शिक्षा ही संस्कार होते हैं और उन्हीं संस्कारों के चलते बच्चा आगे बढ़ता जा चला जाता है।

उन्होंने कहा कि मेरी मां ने मुझे संस्कार दिए इसीलिए मैं संत बन पाया हूं। हम गंदे कपड़े धोबी को दिया करते हैं और मैं भी यहां सीतामऊ नगर में धोबी बन कर आया हूं क्योंकि किसी बड़े संत ने कहा है गुरु धोबी शिष्य कपड़ा है। और मैं वासना और कामना के गंदे कपड़े जो आपके मन के अंदर है उन्हें धोने के लिए आया हूं। व्यक्ति को चंदन का वृक्ष बनाने की आवश्यकता है। अभी व्यक्ति का स्वभाव बबूल के वृक्ष देता है लेकिन व्यक्ति का स्वभाव चंदन के वृक्ष रिश्ता होना चाहिए। चंदन के वृक्ष को जिस कुल्हाड़ी से काटा जाता है वह कुल्हाड़ी भी सुगंधित हो जाती है। जिस अग्नि में चंदन की लकड़ी को जलाया जाता है वह अग्नि भी सुगंधित हो जाती है।


108 परिवार करेंगे प्रक्षालन
पांच दिवसीय सर्वधर्म सत्संग मानव कल्याण महोत्सव के अंतिम दिवस सुबह के सत्र में 108 परिवारों द्वारा मुनि प्रतीक सागर का पाद प्रक्षालन किया जाएगा। शाम को गुरुदेव की महाआरती होगी।

Nilesh Trivedi Desk/Reporting
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