चैत्र नवरात्रि आज, नाव पर सवार होकर धरती पर आएगी माता रानी

चैत्र नवरात्रि आज, नाव पर सवार होकर धरती पर आएगी माता रानी

मंदसौर.
कोरोना के साए में शक्ति की भक्ति का महापर्व चैत्र नवरात्रि का आज से शुरु हो रहा है। बुधवार को घटस्थापना होने के चलते इस बार मातारानी नाव पर सवार होकर धरती पर आएगी। मातारानी की आराधना के लिए इस नवरात्रि को बड़ी नवरात्रि माना जाता है। अभी देश और दुनिया में कोरोना वायरस महामारी आई है। इसके चलते हर कोई दहशत में है। नवरात्रि के इस दौर में दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का जाप और हवन करने से इस महामारी का विनाश हो सकेगा। कोरोना के प्रभाव के कारण मंदिरों में आयोजन निरस्त होने के कारण आराधको को घरों में ही माता की पूजा-अर्चना करना होगी।


तिथियों का नहीं होगा हास, इस बार नो दिनों की होगी नवरात्रि
पंडित राकेश भट्ट ने बताया कि इस बार नवरात्रि के दौर में तिथियों का हास नहीं होगा। ऐसे में नवरात्रि पूरे नो दिनों की होगी। 25 मार्च से नवरात्रि शुरू हो रही है। जो 2 अप्रैल को रामनवती तक रहेगी। इस बार की नवरात्रि कई कारणों की वजह से खास मानी जा रही है। इस बार किसी तिथि का क्षय नहीं है जिस वजह से मां दुर्गा की उपासना के लिए पूरे नौ दिन मिलेंगे। दूसरा नवरात्रि में कई शुभ योग भी बन रहे हैं।


इस दिन ब्रह्मा ने सरस्वती के कहने पर सृष्टि की रचना की
भट्ट ने बताया कि इस बार नवरात्रि में चार सर्वार्थसिद्धि, ६ रवि और एक अमृतसिद्धि के साथ एक द्विपुष्कर और एक गुरु पुष्य योग बन रहा है। जो इस नवरात्रि को कई मायनों में भक्तों के लिए खास बना रही है। नवरात्रि की शुरुआत से हिन्दी नववर्ष की शुरुआत होती है। हिन्दू पंचांग अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत का पहला दिन है। मान्यता है कि इसी दिन से कालगणना प्रारंभ हुई थी। इसी दिन ब्रह्मा जी ने मां सरस्वती के कहने पर सृष्टि का निर्माण किया था। इसी दिन सूर्य की पहली किरण पृथ्वी पर फैली थी। 9 ग्रह, 27 नक्षत्र और 12 राशियों का उदय और भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार भी इसी दिन हुआ था। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 24 मार्च मंगलवार दोपहर 2.57बजे से लग जाएगी और बुधवार शाम 5.26 बजे तक रहेगी। 25 मार्च सुबह 6.19 से सुबह 7.17 तक घटस्थापना का शुभ मुहूर्त है।


कब कौन सा योग रहेगा
पंडित भट्ट के अनुसार नवरात्रि के दौर में 26 मार्च को पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, 27 मार्च को सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6.17 से सुबह 10.09 और रवि योग, 28 मार्च रवि योग
29 मार्च को रवि योग, 30 मार्च पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और सुबह 6.13 से सुबह 5.18 तक रवि योग, 31 मार्च को द्विपुष्कर योग सुबह 6.12 से शाम 6.44 और रवि योग सुबह 7.14 से 6.44 शाम, 2 अप्रैल पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, गुरु पुष्य योग शाम 7.29 से सुबह 6.09 योग रहेगा। इसके साथ ही 25 मार्च को नवरात्रि के आरंभ के साथ घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा होगी तो 26 मार्च को मां ब्रह्मचारिणी, 27 मार्च को मां चंद्रघंटा, 28 मार्च को मां कुष्मांडा, 29 मार्च को मां स्कंदमाता, ३0 मार्च को मां कात्यायनी, 31 मार्च को मां कालरात्रि, 1 अप्रैल को मां महागौरी, 2 अप्रैल को मां सिद्धिदात्रि की पूजा-अर्चना होगी।


नाव पर सवार होकर आएंगी देवी और हाथी पर जाएंगी
भट्ट ने बताया कि इस बार नवरात्रि नाव पर सवार होकर आएगी और हाथी पर सवार होकर जाएगी। दोनों की देवी के वाहनों को शुभ माना गया है। माता दुर्गा जिस वाहन से पृथ्वी पर आती हैं, उसके अनुसार सालभर होने वाली घटनाओं का भी आंकलन किया जाता है। वैसे तो मां दुर्गा का वाहन सिंह को माना जाता है। लेकिन हर साल नवरात्रि के समय तिथि के अनुसार माता अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं। बुधवार के दिन कलश स्थापना होने पर माता नाव पर सवार होकर आती हैं। देवीभाग्वत पुराण में बताया गया है कि नवरात्र का आरंभ बुधवार को होगा तो देवी नौका पर यानी नाव पर चढ़कर आएंगी। माता के नौका पर चढ़कर आने का मतलब यह है कि इस साल खूब वर्षा होगी जिससे आम लोगों का जीवन प्रभावित हो सकता है। नवरात्र का समापन 3 मार्च को हो रहा है।

पुराण में कहा गया है कि शुक्रवार के दिन माता विदा होती हैं तो उनका वाहन हाथी होता है। हाथी वाहन होना भी इसी बात का ***** है कि अच्छी वर्षा होगी। लेकिन कृषि के मामले में स्थिति अच्छी रहेगी। अच्छी उपज से किसान उत्साहित रहेंगे। नवसंवत के मंत्री चंद्रमा और राजा बुध का होना भी यह बताता है कि आने वाले साल में अर्थव्यवस्था को संभलने का मौका मिलेगा।

Nilesh Trivedi Desk/Reporting
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