कामेडी बिकती है, शुद्ध कविता को न तो सुनने वाले है नहीं सुनाने वालें

कामेडी बिकती है, शुद्ध कविता को न तो सुनने वाले है नहीं सुनाने वालें
Mandsaur news

vikram ahirwar | Publish: Apr, 24 2017 11:30:00 AM (IST) Mandsaur, Madhya Pradesh, India

- टेलीविजन पर कामेडी शो में कविता पाठ करने वाले अख्तर हिंदुस्तानी ने कहा


मंदसौर/रतलाम.
टेलीविजन पर कई कामेडी शो में कविता पाठ करने वाले अख्तर हिंदुस्तानी ने नगरी में 'पत्रिका' से सामान्य चर्चा में बताया कि आजकल कामेडी बिक रही है, शुद्ध कविता को न तो सुनने वाले है नहीं सुनाने वालें। हास्य एवं कविता के मिश्रण के बिना आजकल कवि सम्मेलन अधूरे है। मौलिक हिंदी साहित्य की कविताएं खत्म हो रही है। कवियों ने भी कविताओं को पेशा बना लिया है। सोशल मीडिया ने हर किसी को कवि बना दिया है। बकौल अख्तर हिंदुस्तानी ने वर्तमान में आधुनीकीकरण एवं नए- नए अभियानों को विनाश का कारण बनने की आशंका जताते हुए कहा कि वर्तमान में हर तरह सीमेंट क्रांकीट की सडके एवं इमारते बनने से तापमान बढ़ा, वही स्वच्छता अभियान ने तो कई जानवरों के खाने का हक तक छिन लिया है। अख्तर हिंदुस्तानी का कहना है कि आजकल टीवी चैनलों पर केवल कविता पाठ को बताने के लिए कोई तैयार नहीं है। लोगों को हंसाने के लिए कवि सम्मेलन में कविता कम एवं हास्य पैदा करने की बातें ज्यादा करनी पड़ती है।  

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