शिवना के जहर को जांचने आई प्रदूषण बोर्ड की टीम

- प्रदूषित शिवना की सुध लेने के प्रयास हुए शुरु

By: harinath dwivedi

Published: 04 Jan 2018, 07:54 PM IST





मंदसौर.
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक दल ने गुरुवार को प्रदूषित शिवना का निरीक्षण किया। उन्होंने शिवना के जहर को जांचने के लिए नदी के विभिन्न स्थानों से १० सैंपल लिए और इन्हें जांच के लिए उज्जैन स्थित लैब भेजा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शहर की शिवना नदी जहरीली हो चुकी है। इसका प्रदूषित पानी तरह- तरह के रंग में दिख रहा है। भगवान पशुपतिनाथ मंदिर क्षेत्र में पानी काई सा नीला है तो मुक्तिधाम क्षेत्र में पानी लाल रंग का है। वहीं अलावदाखेड़ी क्षेत्र में पानी का रंग दूजा।
इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने केंद्रीय पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को बुलाया। गुरुवार की सुबह बोर्ड की सांइटिस्ट डॉ शोभा दानेकर चार सदस्यीय टीम के साथ शहर पहुंची। उन्होंने पूरी शिवना नदी का निरीक्षण किया। उन स्थानों को देखा जहां से प्रदूषित पानी शिवना नदी में मिल रहा है। इस दल के लिए मुक्तिधाम क्षेत्र में लाल पानी मिस्ट्री की तरह लगा। वे यह पता नहीं कर पाएं कि इस क्षेत्र में पानी लाल रंग का क्यों है। इस क्षेत्र में एक फैक्ट्री है, यदि उसका पानी नदी में मिलता हैतो पानी काला होना चाहिए। इस क्षेत्र में कईप्रदूषित नाले मिल रहे है पर यहां ऐसी कोईफैक्ट्रियां नहीं है, जिनमें रंगों का कोईकाम हो। कपड़े व लच्छा रंगने का व्यवसाय करने वाले खानपुरा क्षेत्र में रहते है और यहां से मुक्तिधाम क्षेत्र की दूरी करीब ४ किलोमीटर है।बीच में कहीं भी पानी लाल रंग का नहीं है। वैज्ञानिको ने करीब १० जगह से शिवना नदी के पानी का सैंपल लिया। इस सैंपल का परीक्षण के बाद ही वैज्ञानिक बता पाएंगे कि पानी किस हद तक जहरीला हो चुका है।
यहां से लिए सैंपल
प्रदूषण बोर्ड की टीम ने खानपुरा क्षेत्र, तीन छतरी बालाजी क्षेत्र, भगवान पशुपतिनाथ मंदिर के पास बड़ी पुलिया के पास, मुक्तिधाम क्षेत्र से पानी के करीब १० नमूने लिए। यह नमूने बोर्ड के उज्जैन प्रयोगशाला में जांचे जाएंगे।
६ साल पहले भी लिए पानी के सेंपल, पाए गए खतरनाक रसायन
छह साल पहले भी शिवना नदी के पानी के सेंपल लिए गए थे। जिसकी रिपोर्ट प्रदूषण बोर्डकी साइंटिस्ट शोभा धानेकर ने प्रशासन को प्रेषित की थी। रिपोर्टमें कहा गया थाकि शिवना नदी के जल में खतरनाक स्तर पर रसायन पाए गए है। रेलवे कॉलोनी व रहवासी क्षेत्र आदि से शिवना नदी में एल्गलीग्रोथ अनुपचारिक दूषित जल-मल, अपशिष्ठ मिल रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
प्रदूषण बोर्डनदियों की मॉनिटरिंग करती है। गुरुवार को शिवना नदी का निरीक्षण किया।खानपुरा क्षेत्र में गंदा नाला मिल रहा है। पर वहां पानी पर कलर अलग था। वहीं मुक्तिधाम क्षेत्र में नदी का पानी लाल रंग का हो गया है। नदी में प्रदूषण का स्तर कितना इसके लिए पानी के नमूने लिए है।प्रयोगशाला में जांच के बाद ही बता पाएंगे कि पानी में खतरनाक रसायन कितनी मात्रा में है।
शोभा धानेकर, साइंटिस्ट, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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harinath dwivedi Editorial Incharge
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