सोयाबीन के भावांतर से लेकर गेंहू के बोनस और प्याज की प्रोत्साहन राशि की बाट जोह रहे किसान

सोयाबीन के भावांतर से लेकर गेंहू के बोनस और प्याज की प्रोत्साहन राशि की बाट जोह रहे किसान
सोयाबीन के भावांतर से लेकर गेंहू के बोनस और प्याज की प्रोत्साहन राशि की बाट जोह रहे किसान

Nilesh Trivedi | Updated: 23 Aug 2019, 12:57:40 PM (IST) Mandsaur, Mandsaur, Madhya Pradesh, India


सोयाबीन के भावांतर से लेकर गेंहू के बोनस और प्याज की प्रोत्साहन राशि की बाट जोह रहे किसान

मंदसौर.
जिले के 1 लाख किसानों को शासन से योजना में बेची गई उपज की राशि मिलने का इंतजार है। किसान भले ही अपने खाते चेक करते हुए राशि जमा होने की राह देख रहे है, लेकिन विभागीय अधिकारियों के पास राशि को लेकर किसानों द्वारा पूछे जा रहे सवालों का कोई जवाब नहीं है।

भावांतर में पिछली सीजन में जिले के ६४ हजार से अधिक किसानों ने सोयाबीन बेची थी। इसके बाद सरकार बदल गई, तो भावांतर की राशि भी अब तक नहीं आई। ५०० रुपए तक फ्लैट रेट मिलना था। जिसका साल भर बाद भी किसान इंतजार ही कर रहे है। वहीं मार्च माह में हुई समर्थन मूल्य पर हुई गेंहू खरीदी में जिले के २१ हजार से ज्यादा किसानों ने गेंहू बेचा था। जिन्हें बोनस राशि अब तक नहीं मिली है। लंबे समय से यह बोनस राशि की बाट जो रही है तो इसी तरह प्याज की प्रोत्साहन राशि का भी ३ हजार से अधिक किसान इंतजार कर रहे है। इस तरह जिले के १ लाख किसानों को करोड़ों रुपए का इंतजार है, लेकिन शासन स्तर से इस पर अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ। इसी कारण किसानों को इंतजार लंबा होता चला जा रहा है।
करीब १ लाख किसानों को राशि का है इंतजार
समर्थन मूल्य पर हुई गेंहू खरीदी में जिले में २१ हजार से अधिक किसानों ने अपना गेंहू बेचा था। इन्हें समर्थन की राशि तो मिली लेकिन राज्य शासन से मिलने वाली बोनस की १६० रुपए प्रति क्विंटल की राशि मिलना बाकी है। इसी तरह जून माह में प्याज प्रोत्साहन योजना में प्याज बेचने वाले जिले के ३ हजार ७ किसानों को अंतर की राशि का इंतजार है। शासन ने ८०० रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। इसमें मंडी में जिस भाव बिका, उसमें और सरकार द्वारा तय मूल्य के अंतर की राशि सरकार देगी। यह किसानों को अब तक नहीं मिली है। वही २०१८ में विधानसभा चुनाव के दौर में २० अक्टूबर-२०१८ से लेकर १९ जनवरी-२०१९ तक भावांतर में सोयाबीन की खरीदी का दौर चल रहा था। इसमें जिले के ६४ हजार ६७३ किसानों ने सोयाबीन बेची। जिन्हें फ्लैट रेट जो तय था। वह मिलना है। ५०० रुपए तक का फ्लैट रेट मिलना था। जो लगभग एक साल होने के बाद भी नहीं मिला है। इस तरह समर्थन के बोनस और प्याज प्रोत्साहन से लेकर भावांतर की राशि में जिले के १ लाख किसानों को राज्य शासन से राशि मिलने का इंतजार है।
विभाग को नहीं पता, कब तक मिलेगी राशि
किसानों को भले ही लंबे समय से राशि मिलने का इंतजार हो, लेकिन कृषि विभाग को नहीं पता है कि राशि किसानों को कब मिलेगी। किसानों ने खाता नंबर से लेकर अपनी जानकारी विभागों को उपलब्ध करा रखी है। उसी में राशि जाना है, लेकिन शासन स्तर का निर्णय होने के कारण इस मामले की विभागीय अधिकारियेंा को कोई जानकारी नहीं है। इसी कारण राशि के लिए बार-बार दफ्तरों में चक्कर काट रहे किसानों को विभागों से निराशा ही मिल रही है। लेकिन समर्थन और प्याज तो ठीक लेकिन भावांतर की सोयाबीन की राशि के लिए किसान एक साल से इंतजार कर रहे है।

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