देशभर में मंदसौर की पहचान बनेगी लहसुन, किसान को बनाएगी आत्मनिर्भर

देशभर में मंदसौर की पहचान बनेगी लहसुन, किसान को बनाएगी आत्मनिर्भर

By: Vikas Tiwari

Published: 22 Sep 2020, 12:21 AM IST

मंदसौर.
आत्मनिर्भर मप्र अभियान में आत्मनिर्भर मंदसौर जिले के लिए शासन-प्रशासन ने अपना प्लान तैयार कर लिया है। वन डिस्टिक वन प्रोडेक्ट में जिले की लहसुन का चयन किया है। उत्पादन, रकबा और क्वालिटी के साथ किसानों की रुचि को देखकर जिले की लहसुन को देशभर में मंदसौर की लहसुन के नाम से ब्रांडिग कर लहसुन कृषको को कृषक उद्यमी बनाकर प्रोसेसिंग यूनिट व लहसुन आधारित उद्योगों व यूनिटों से जोडऩे तक का काम शासन-प्रशासन के कई विभाग मिलकर करेंगे। देशभर में ब्रांडिग कर किसानों को उद्यमी बनाकर जिले को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया जाएगा। इसके लिए कई दिनों से प्लानिंग पर काम चल रहा है। उद्यानिकी विभाग के साथ कई अन्य विभागों को इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रशासन ने लगा दिया है।
एक जिला एक उत्पाद के तहस लहसुन का चयन कर इसकी ब्रांडिग की जाएगी। कलेक्टर की अध्यक्षता में इसके लिए कई विभागों को मिलाकर इसकी कमेटी बनी है। इसमें कृषि से लेकर उद्यानिकी, एमपी एग्रो से लेकर सहकारिता, बैंक, उद्योग, नाबार्ड, समूह वाले के साथ अन्य को शामिल किया है। हालांकि उद्यानिकी एवं खाद्य प्रंस्करण विभाग की इसमें सबसे अधिक भूमिका रहेगी।
लहसुन कृषकों को कृषक उद्यमी बनाने तक मदद करेंगा शासन-प्रशासन
सूक्ष्म प्रोसेसिंग यूनिट के लिए अनुदान देकर यूनिट लगवाने के साथ कोल्ड स्टोरेज, पैकिंग, ग्रेडिंग, पावडर सहित ट्रांसपोटेशन के साथ लहसुन के उद्योग स्थापित कर किसानों को खेती के साथ लहसुन के उद्योगों से जोडक़र उद्यमी बनाने में शासन मदद करेगा। इसके लिए सहकारिता से लेकर उद्योग विभाग अन्य विभागों के साथ मिलकर किसानों का चयन कर उन्हें लहसुन के क्षेत्र में कृषक से लेकर कृषक उद्यमी बनाने के लिए प्रोत्साहन देगा और विशेषज्ञों से प्रशिक्षित करवाएगा। इसमें पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि से लेकर उन्नत किसान भी बनाए जाने वाले समूहों में शामिल किए जाएंगे। जिले में उन क्षेत्रों का चयन किया जाएगा जहां अत्यधिक लहसुन उत्पादन होता है और उन क्षेत्रों में किसानों के समुह बनाकर प्रोसेसिंग यूनिटों से जोड़ा जाएगा। प्रदेश के साथ देशभर में लहसुन को मंदसौर की लहसुन के नाम से ब्रांडिग कर पहचान दिलाई जाएगी।
इसलिए हुआ जिले की लहसुन का चयन
जिले से दिल्ली से मुंबई तक एक्सप्रेस वे गुजर रहा है तो फोरलेन से लेकर अन्य हाईवे गुजर रहे है। वहीं चंबल के कारण पानी की उपलब्धता है और रेलवे परिवहन भी बेहतर है। सडक़-रेल परिवहन के साथ लहसुन की अधिकता व श्रमिक वर्ग के साथ लहसुन के लिए जलवायु अनुकूलता के साथ सभी परिस्थिति अनुकूल है। वैसे जिले में उद्यानिकी फसलों का रकबा १ लाख ७ हजार हैक्टेयर है और इनका उत्पादन ६ लाख ४३ हजार ५६६ मैट्रिक टन है। इसमें सबसे ज्यादा लहसुन का रकबा है। १८ हजार २११ हैक्टेयर रकबे की लहसुन में १ लाख ८२ हजार ११० मैट्रिक टन का उत्पादन होता है। देशी लहसुन के साथ ऊटी लहसुन व विदेशी किस्तों के साथ अन्य कई प्रकार की लहसुन का उत्पादन जिले के किसान कुशल तरीके से करते है। उत्पादन, क्वालिटी व रकबे के साथ किसानों की रुचि के कारण लहसुन का वन डिस्टिक वन प्रोडेक्ट में चयन किया गया। इसका सरप्लस भी बेहतर है तो जिले की लहसुन की प्रदेश ही नहीं देशभर के कई राज्यों में अधिक मांग की है। जिले की मंडियों से लहसुन देशभर में बड़ी मात्रा में जाती है। दवाई कंपनियों से लेकर अन्य प्रकार के उत्पादों में जिले की लहसुन की अधिक मांग के साथ लहसुन का चयन किया गया है।
क्वालिटी व पैदावार के चलते हुआ लहसुन का चयन
इसके लिए कई विभागों को मिलाकर कमेटी बनाई गई है। इसके अध्यक्ष कलेक्टर है। उनके निर्देशन में वन डिस्टिक-वन प्रोडेक्ट में लहसुन की जिले में पैदावार, क्वालिटी व रकबे के साथ उत्पादन को देखकर चयन किया है। इसका विजन डाक्यूमेंट तैयार किया है। किसान को उद्यमी बनाकर आत्मनिर्भर बनाने की शासन की योजना के तहत प्लानिंग की गई है। लहसुन की ब्रांडिग कर इसे प्रदेश व देशभर में मंदसौर की पहचान बनाते हुए जिले के किसान को आत्मनिर्भर बनाने का काम शासन-प्रशासन मिलकर इसमें करेगा।-मनीष चौहान, उपसंचालक, उद्यानिकी
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Vikas Tiwari Bureau Incharge
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