जर्जर लैब में उपकरण खा रहे धुल तो दीवारों में दरकने लगा प्लास्टर,

जर्जर लैब में उपकरण खा रहे धुल तो दीवारों में दरकने लगा प्लास्टर,

By: harinath dwivedi

Published: 20 Jul 2018, 01:23 PM IST

मंदसौर.
स्कूली विद्यार्थियों की सुरक्षा शहर के सरकारी स्कूलों में अब भी भगवान भरोसे है। कुछ दिनों पहले सुरक्षा पर सवाल उठे थे, लेकिन अब जर्जर होते स्कूल भवन के कारण विद्यार्थियों की सुरक्षा सवालों के घेरे में है। शहर का महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उमावि जिसका भवन सालों पुराना है और अब जर्जर हो चुका है। बावजूद ऐसे ही कमरों में यहां की व्यवस्था का संचालन हो रहा है। असुरक्षा के बीच छात्राएं यहां अपने विषयों की बारीकियां सीख रही है। विडबंना तो यह है कि जर्जर होते भवन के इस कक्ष की मरम्मत के लिए २ लाख रुपए की राशि स्वीकृत भी हो गई, फिर भी काम नहीं हो रहा है। ऐसा ही मामला इस स्कूल की फिजिक्स, केमेस्ट्री और बॉयो की खस्ताहाल लैब का सामने आया है। लैब के हालात तो ऐसे है कि यहां छात्राओं के खड़े रहने की जगह तक नहीं है। उपकरण से लेकर टेबल-कुर्सी व संसाधनों के बीच छात्राओं के यहां बैठने तो ठीक खड़े रहने की जगह नहीं, इस बीच यहां छात्राओं को प्रायोगिक का पाठ पढ़ाया जा रहा है। उपकरणों पर जमा धुल को देख लगता है कि लंबे समय से इन उपकरणों पर किसी के हाथ नहीं लगे है। सिर्फ दूर से प्रायोगिक पाठ पढ़ा दिया जाता है।


तीन लैब कक्ष, तीनों की हालात एक जैसी
यहां कक्षा ९ से १२वीं की करीब १०० से १५० छात्राओं को इन विषयों की बारीकियां बताते हुए प्रायोगिक काम करवाया जाता है, लेकिन स्कूल की इन लैब भवनों की दीवारों से लेकर छत के प्लास्टर में आई दीवारों और दरकते प्लास्टर की स्थिति ऐसी मानों हर समय यह नीचे गिरने को आतुर है। दीवारों में कुछ जगहों से प्लास्टर नीचे गिर भी चुका है। बावजूद इस प्रकार की जर्जर हो चुके इन लैब के भवरों में छात्राओं को असुरक्षा के बीच प्रायोगिक करवाया जा रहा है। छात्राओं के सबसे बड़े सरकारी स्कूल में सुरक्षा के नाम पर इस प्रकार की लापरवाही का आलम छाया हुआ है। जो स्कूल प्रबंधन के साथ ही विभाग पर छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीरता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। स्कूल में आने वाली छात्राएं जो इन लैबों में पढऩे-सीखने जाती है वह जंग खाए उपकरण व धुल लगे इन संसाधनों से जर्जर होते भवन के बीच असुरक्षा और लारवाही के इन हालातों के बीच मजबूरी में प्रायोगिक करती है। आश्चर्य तो यह है कि मरम्मत की राशि स्वीकृत है और स्कूल प्रशासन भी मानता है कि यह जर्जर होकर दयनीय स्थिति में आ चुका है, फिर भी इसकी मरम्मत नहीं करवाई जा रही है। पास-पास में ही तीन लैब कक्ष है, लेकिन तीनों की स्थिति एक जैसी ही।


विभाग को दे रही जानकारी
उसी लैब में छात्राओं को प्रायोगिक करवाया जाता है। पूराना भवन है और यह जर्जर हो चुका है। यह सही है। मरम्मत के लिए २ लाख की राशि स्वीकृत हुई है, लेकिन काम अब तक नहीं हो पाया, यह सही है, लेकिन मरम्मत के काम को अब जल्द करवाया जाएगा। विभाग को भवन की स्थिति को लेकर जानकारी दी गई है।
-एसएस निगवाल, प्राचार्य, महारानी लक्ष्मीबाई, कन्या उमावि, मंदसौर


पर्याप्त राशि के अभाव में नहीं हो सका काम
लैब की मरम्मत के लिए जितनी राशि चाहिए, उतनी पर्याप्त नहीं आई थी। आवंटन की राशि तकनीकि कारण से नहीं मिल पाई थी। इस कारण यह काम नहीं हो सका। मामले को दिखवाता हुं, जानकारी लेकर इसकी मरम्मत का काम करवाने की प्रक्रिया की जाएगी।

- आरएल कारपेंटर, डीईओ, मंदसौर

harinath dwivedi Editorial Incharge
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