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गेहूं खरीदी में किसानों ने नहीं दिखाई रुचि तो चने की समर्थन पर हुई रेकार्ड खरीदी

गेहूं खरीदी में किसानों ने नहीं दिखाई रुचि तो चने की समर्थन पर हुई रेकार्ड खरीदी

मंदसौर

Published: June 09, 2022 10:57:12 am


मंदसौर.
रबी सीजन की गेहूं-चने की उपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी का काम पूरा हो गया है। इस बार जिले के किसानों ने समर्थन पर गेहूं बेचने में रुचि नहीं दिखाई तो चना समर्थन बेचने पर ही रुचि दिखाई वहीं मसूर व सरसों तो एक भी किसान उपार्जन केंद्र पर लेकर नहीं पहुंचा। हालांकि खरीदी पूरी होने के बाद भी गेहूं में २ करोड़ और चने में १७ करोड़ की राशि का भुगतान किसानों को होना अभी बाकी है। चना खरीदी तो पिछले साल से दोगुना हुई लेकिन गेहूं खरीदी के आंकड़े इस बार पिछले साल की तुलना में आधा भी नहीं हो पाया। जबकि दावा किया जा रहा था कि इस बार पंजीयन से लेकर उपार्जन तक बदली नीति के कारण किसानों को सुविधा होगी लेकिन बदली नीति के साथ मंडियों व बाजार में मिल रहे दाम के कारण किसान को उपार्जन केंद्र अपनी और खींच नहीं पाए। जबकि चने में ठीक उल्टा रहा और उपार्जन केंद्रों पर अच्छे दाम मिले।
WHEAT PRICE-----गेहूं के निर्यात पर रोक से भावों की तेजी पर लगी लगाम
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हर साल गेहूं-चने की खरीदी में होता है उलटफेर
हालांकि पिछले सालों की खरीदी को देखे तो हर साल गेहूं-चने की खरीदी में उलटफेर होता है। वर्ष २०२० में कोविड काल में हुई गेहूं खरीदी में मंडिया बंद और गेहूं का बंपर उत्पादन होने से खरीदी के आंकड़ों ने तमाम रेकार्ड तोड़े तो वहीं पिछले साल चना खरीदी में किसानों ने रुझान नहीं दिखाया तो इस बार समर्थन से ज्यादा अन्य जगह दाम मिलने के कारण गेहूं खरीदी का आंकड़ा कम रहा। जबकि आखरी के दिनों में जब मंडियों में गेहूं के दाम कम हुए तो समर्थन पर गेहंू लेकर किसान पहुंचे। आखरी के १० दिनों में समर्थन पर गेहूं बेचने वाले किसानों के आंकड़ो में बढ़ोतरी हुई। वहीं पिछले साल जहां समर्थन पर चना कम बिका वहीं इस बार चने की रेकॉर्ड खरीदी रही और पिछले सालों के आंकड़ें काफी पीछे रह गए। तो मसूर-सरसों की खरीदी हर बार जिले में कम होती है लेकिन इस बार तो हुई ही नहीं।

१०५ करोड़ का खरीदा चना तो ४० करोड़ का गेहूं
३१ मई तक गेहूं की खरीदी का दौर रहा तो ७ जून तक चने की खरीदी रही। इसमें ४० करोड़ ३१ लाख रुपए का गेहूं विभाग ने समर्थन मूल्य पर जिले के ३ हजार ९९ किसानों से खरीदा हालांकि अभी २ करोड़ का भुगतान प्रक्रियाओं के कारण लंबित है। वहीं १०५ करोड़ का चना समर्थन पर विभाग ने ७ हजार ८५८ किसानों से खरीदा और ८८ करोड़ का भुगतान हुआ और अब भी १७ करोड़ का भुगतान होना बाकी है। हालांकि खरीदी का दौर भले ही पूरा हो गया हो लेकिन रबी सीजन की फसलें अभी भी मंडी में आ रही है और गेहूं, चना से लेकर अन्य जिंसों की आवक हर दिन हो रही है।
समर्थन पर खरीदी पर इन कारणों ने डाला प्रभाव
-गेहूं के मंडी से लेकर बाजार में दाम अधिक होने से समर्थन में नहीं रही रुचि
-चने के मंडी में कम दाम होने से समर्थन पर मिल रहे बेहतर दाम के कारण वहां अधिक बेचने पहुंचे किसान
-मसूर व सरसों के मंडियों में अच्छे दाम मिलने के कारण समर्थन केंद्र पर नहीं पहुंचा कोई किसान
-मंडियों व बाजार में नगद भुगतान के कारण भी किसानों का रुझान समर्थन पर कम और मंडियों में अधिक रहता है।
-समर्थन मूल्य गेहूं खरीदी में इस बार पंजीयन से लेकर उपार्जन तक नई नीति थी ऐसे में किसान इसे कम समझ पाए।

फैक्ट फाइल....
जिले में गेहूं-चने की समर्थन पर खरीदी की स्थिति
गेहूं की हुई खरीदी- २ लाख १० हजार ४६१ क्विंटल
मैट्रिक टन में- २० हजार
किसान संख्या- ३ हजार ९९
भुगतान हुआ- ३ हजार ५९८ किसानों का करीब ४० करोड़ ३१ लाख
बकाया- २ करोड़ ९ लाख
३१ मई तक हुई गेहूं की खरीदी
चना, मसूर व सरसों की हुई खरीदी- ७ जून तक
चना की हुई खरीदी - २ लाख १ हजार क्विंटल
समर्थन पर खरीदा चना- १०५ करोड़
अब तक हुआ भुगतान- ८८ करोड़
किसान संख्या- ७ हजार ८५८
गत वर्ष हुई थी - १ लाख ४५ हजार क्विंटल
नोट-नागरिक आपूर्ति और विपणन विभाग से मिली जानकारी अनुसार

आधार लिंक नहीं मिलने के कारण हो रही दिक्कत
जिले में इस बार चने की रेकार्ड खरीदी हुई। अब तक ८८ करोड़ का भुगतान हो चुका है। जिन किसानों का बचा है उनमें से अधिकांश के आधार लिंक नहीं मिलने के कारण हो रहा है। आधार लिंक मिलान के साथ प्रक्रिया के तहत तेजी से भुगतान हो रहा है। इस बार २ लाख १ हजार क्विंटल चना खरीदा गया है। वही मसूर व सरसों की खरीदी शून्य रही है। -यशवर्धनसिंह, डीएमओ

२० हजार मैट्रिक टन रही खरीदी
३१ मई तक हुई गेहूं खरीदी में जिले में इस बार २ लाख १० हजार ४६१ क्विंटल गेहूं खरीदा गया। जो पिछले साल से आधा ही है। अब तक ४० करोड़ से अधिक का भुगतान हो चुका है तो २ करोड़ ९ लाख रुपए का भुगतान बाकी है। जो प्रक्रिया के तहत हो रहा है। ३ हजार ९९ किसानों ने समर्थन पर अपना गेहूं बेचा है। -केसी उपाध्याय, प्रबंधक, नागरिक आपूर्ति विभाग

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