जाने क्यों होती है नवरात्र में महाअष्टमी व महानवमी पर विशेष पूजा

जाने क्यों होती है नवरात्र में महाअष्टमी व महानवमी पर विशेष पूजा
जाने क्यों होती है नवरात्र में महाअष्टमी व महानवमी पर विशेष पूजा

Nilesh Trivedi | Publish: Oct, 06 2019 09:01:01 AM (IST) Mandsaur, Mandsaur, Madhya Pradesh, India

जाने क्यों होती है नवरात्र में महाअष्टमी व महानवमी पर विशेष पूजा

मंदसौर.
शक्ति की भक्ति के महापर्व के अंतिम पड़ाव में अष्टमी व नवमी को देवी घर-घर पूजी जाएगी। आज महाअष्टमी तो कल महानवमी पूजा जाएगी। सालों से चली आ रही परंपरा की शुरुआत महाभारत काल के दौरान हुई थी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और धर्मराज युधिष्ठिर ने नवरात्रि के महानवमी और दुर्गाष्टमी की पूजा पर चर्चा की थी। तब से ही यह दौर चल रहा है जो अब तक जारी है। इसका उल्लेख पुराणों में है।

दुर्गाष्टमी और महानवमी की पूजा सभी युगों में होती रही है। देवी के मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान से लेकर यज्ञ भी होंगे तो कन्यापूजन व कन्याभोज के आयोजन भी होंगे। मां की पूजा में होने वाली हर एक विधि की पौराणीक मान्यताएं शास्त्रों के अनुसार होती है।


अखंड ज्योत से लेकर कन्या पूजन का है महत्व
एस्टोलोजर रवीशराय गौड़ ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रीकृष्ण व युधिष्ठिर की चर्चा में दुर्गा पूजा और नवरात्रि में हवन से लेकर अखंड ज्योत और कन्या पूजन से लेकर कन्याभोजन का महत्व बताया गया है। २ साल से लेकर १० साल तक की कन्या को शास्त्रों के अनुसार देवी स्वरुपों में पूजा जाता है। धर्मराज से धर्म के इस प्रकल्प की शुरुआत युगो-युगो से चली आ रही है। और अष्टमी से लेकर नवमी को भी उन्हें विधि-विधानों से पूजा की जाती है। ऐसे में रविवार व सोमवार को भी उसी क्रम में पूजा-अर्चना की जाएगी।


शहर सहित अंचल में होंगे अनेक आयोजन
शहर सहित अंचल में अष्टमी व नवमी को लेकर घरों में देवी की पूजा होगी तो मंदिरों में विभिन्न आयोजन होंगे। अष्टमी व नवमी को लेकर देवी के मंदिरों में भक्तों की भीड़ रहेगी तो यहां विभिन्न आयोजन होंगे। जिले के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में आस्था व श्रद्धाभाव के साथ भक्त माता के दरबार में पहुंचेगी।


अष्टमी व नवमी में कन्या पूजन का है अलग महत्व
गौड़ ने कहा कि अष्टमी तिथि को महाअष्टमी कहा जाता है और नवमी को महानवमी। अष्टमी और नवमी दोनों ही दिन कन्या पूजन का विधान है। कई परिवारों में अष्टमी तो कई में नवमी की पूजा की जाती है। अष्टमी को कन्या पूजन वही करते हैं तो नवरात्रि में केवल चढ़ती और उतरती व्रत करते हैं। जबकि नवमी को कन्या पूजन वो लोग करते हैं जो नवरात्रि के पूरे नौ दिन तक व्रत करते हैं। इस दिन नवमी का हवन और कन्या पूजन के बाद नवमी पारण का विधान होता है। वैसे तो नवरात्रि पर्व नौ दिनों तक चलता है। नौ दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना करने के बाद ही नवरात्रि व्रत पूरा माना जाता है। नौ कन्याओं को नौ देवियों के प्रतिबिंब के रूप अष्टमी और नवमी के दिन पूजा जाता है।

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