अब पापा की तरह नहीं बनना 'डॉक्टर

अब पापा की तरह नहीं बनना 'डॉक्टर

harinath dwivedi | Publish: Mar, 14 2018 08:17:41 PM (IST) Mandsaur, Madhya Pradesh, India

इंजीनियरिंग में अच्छे पैकेज से मिलने लंबी डॉक्टर की पढ़ाई से मोह हुआ भंग

मंदसौर । नोबेल प्रोफेशन होने के बावजूद जिले के अधिकांश डॉक्टरों की संताने पिता के पेशे में नहीं आना चाहती है। वे आकर्षक जॉब को देखते हुए इंजीनियरिंग, एमबीए व अन्य फील्ड में जा रही है। सर्जिकल विशेषज्ञ डॉ एके गुलाटी ने की बेटी तरुषी ने अध्यापन की फिल्ड चुनी और वर्तमान में आर्मीस्कूल अलवर में पढ़ाती है। बेटा संयुज ने बीटेक किया और नोयडा में इन्फोसिस में इंजीनियर है, क्योंकि वे डॉक्टर की जॉब में लंबा समय बर्बाद नहीं करना चाहते थे। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ एसएल वर्मा का बेटे मैहुल और बेटी ने एयरलाइन की पढ़ाईकी। मैहुल ने मंदसौर से बीईकिया और पुना से एमबीए किया। और वर्तमान में यूएसए में जॉब कर रहा है। वहीं बेटी महिमा ने भोपाल एयरपोर्ट पर सुपरवाइजर की जॉब करती है। ऐसे कईउदाहरण ं है जहां डॉक्टर्स की संतानोंं ने मेडिकल फिल्ड से मुंह फेर लिया। स्थित यह हैकि लंबी पढ़ाईकरने के बाद पैकेज कम होने से स्वयं डॉक्टर्स अपनी संतानों को इस पेशे में आने की सलाह नहीं दे रहे है। यही कारण है कि जिला ही नहीं पूरा प्रदेश डॉक्टरों की बहुत कमी झेल रहा है।
११ साल लगते स्पेशलाइजेशन तक पहुंचने में
डॉक्टरों के अनुसार डॉक्टर की पढ़ाईकरने में काफी समय लगता है। साढ़े पांच साल का एमबीबीएस की पढ़ाई होती है। इकसे बाद तीन साल पोस्ट गेज्यूएशन के लगते है। फिर स्पेशलाइजेशन के लिए साढ़े तीन साल का सुपर स्पेशलाइजेशन का कोर्सकरना पड़ता है। इतना करने में करीब साढ़े ग्यारह साल लग जाते है।
सीटें भी है बहुत कम
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यप्रदेश में कुल छह मेडिकल कॉलेज है। जिनमें करीब ८०० सीटें है। वहीं मेडिकल एवं अन्य प्रोफेशनल कोर्स के कॉलेज कईअधिक संख्या में है और सीटें भी अधिक है। इन मेडिलक कॉलेज से प्रतिवर्ष सैकड़ों डॉक्टर निकलते है तो इंजीनियरिंग एवं एमबीए कॉलेज से हजारों विद्यार्थी प्रतिवर्ष निकलते है।
इसलिए हुआ आकर्षण कम
सर्जिकल विशेषज्ञ डॉ एके गुलाटी ने बताया कि कईप्रमुख कारण ऐसे है जिनके कारण डॉक्टर्स की संताने इस फील्ड में नहीं आना चाहती है। जिसमें प्रमुख है डॉक्टर्स के व्यस्त शेडयूल, सैलरी कम होना, करीब साढ़े ११ साल की लंबी पढ़ाई होना। वहीं इस फील्उ के मुकाबले दूसरी फील्ड में कम समय में युवाओं को बेहतर पैकेज मिलता हैजिससे वे जल्दी सेटल हो जाते है। इसलिए उनका झुकाव अन्यं प्रोफेशनल कोर्स की ओर हो गया है।
२०१८ में जिले की सेहत
जिले की जनसंख्या-साढ़े १३ लाख
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र-४१
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र-६
सिविल अस्पताल-२
डॉक्टरों की रिक्त पद-४७
डॉक्टर कार्यरत-५६
(स्त्रोत-सीएमएचओ कार्यालय )
एक्सपर्ट व्यू
डॉक्टरों की संताने अन्य फील्ड में अधिक जा रहे है। क्योंंकि डॉक्टर की पढ़ाई बहुत लंबी है। करीब साढ़े ११ साल लगते है पूरी तरह से डॉक्टर बनने में। वहीं अन्य प्रोफेशनल कोर्समें तीन से पांच साल में बेहतर जॉब लग जाती है। साथ ही बेहतर पैकेज भी मिलता है। जिससे युवा जल्दी सेटल हो जाते है। वर्तमान में डॉक्टरों की सैलरी बहुत कम है। इसको बढ़ाना चाहिए। वहीं सुरक्षा को लेकर भी सख्त कदम उठाना चाहिए।
डॉ अधीर मिश्रा, सिविल सर्जन जिला अस्पताल।

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